Sport : Explainer: भारतीय टेस्ट टीम की नई दीवार बनने के लिए तैयार देवदत्त पडिक्कल, जानें क्यों हैं नंबर-3 के सबसे परफेक्ट दावेदार? #INA

Devdutt Padikkal: क्रिकेट में नंबर-3 और 4 की पोजीशन बेहद अहम होती है. यह वो संवेदनशील स्थान है, जो काफी हद तक तय करता है कि मैच का रुख किस ओर मुड़ेगा. भारतीय टेस्ट इतिहास में इस नंबर पर राहुल द्रविड़ और चेतेश्वर पुजारा जैसे दिग्गज खिलाड़ी सालों तक टीम इंडिया के लिए अटूट दीवार बनकर खड़े रहे. जाहिर है, नंबर-3 को संभालने के लिए एक ऐसे बल्लेबाज की जरूरत होती है जो न सिर्फ लंबी पारी खेल सके, बल्कि पारी को स्थिरता भी दे सके. पुजारा के बाद से पिछले कुछ समय से टीम इंडिया को नंबर-3 पोजीशन के लिए एक बल्लेबाज की तलाश है. भारत ने इस महत्वपूर्ण पोजीशन के लिए कई खिलाड़ियों को आजमाया, लेकिन कोई भी उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर सका. हालांकि, अब ऐसा लगता है कि भारतीय टीम की यह लंबी तलाश खत्म होने वाली है. बाएं हाथ के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट में नंबर-3 पर धमाकेदार प्रदर्शन कर इस स्थान के लिए अपनी दावेदारी को बेहद मजबूत कर लिया है, तो चलिए जानते हैं कि पडिक्कल इस स्थान के लिए क्यों परफेक्ट दावेदार हैं.

प्रथम श्रेणी क्रिकेट का बेजोड़ रिकॉर्ड

देवदत्त पडिक्कल ने घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक के लिए लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है. उनके पास रेड बॉल क्रिकेट का लंबा अनुभव है और उन्होंने मुश्किल पिचों पर दबाव की परिस्थितियों में रन बनाकर खुद को साबित भी किया है. आमतौर पर नंबर-3 पोजीशन के बल्लेबाजों को अक्सर नई गेंद का सामना करना पड़ता है, क्योंकि यदि कोई ओपनर जल्दी आउट हो जाए तो उन्हें तुरंत बल्लेबाजी के लिए उतरना होता है. पडिक्कल के पास एक बेहद ठोस रक्षात्मक तकनीक है, जिसके चलते वह गेंद को अपने शरीर के करीब खेलते हैं. वह स्विंग और सीम होती गेंदों को आसानी से छोड़ने में माहिर हैं. इतना ही नहीं, अपनी लंबी कद-काठी के कारण उन्हें तेज गेंदबाजों के खिलाफ पेस और बाउंस से निपटने में अतिरिक्त फायदा मिलता है.

पडिक्कल ने रणजी ट्रॉफी के 2025-26 सीजन में 10 पारियों में 60.33 की बेहतरीन औसत से कुल 543 रन बनाए थे. इस शानदार प्रदर्शन के दौरान उन्होंने 2 शतक और 1 अर्धशतक जड़ा था. उनके फर्स्ट-क्लास करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 232 रन भी शामिल था. उनके इस प्रदर्शन को देखते हुए श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उन्हें मौका मिला.  

बाएं हाथ के बल्लेबाज का रणनीतिक फायदा

भारतीय टेस्ट टीम के टॉप-ऑर्डर में दाएं हाथ के बल्लेबाजों का भी दबदबा रहा है. देवदत्त पडिक्कल एक बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं. ऐसे में, उनके नंबर-3 पर बल्लेबाजी करने आने से भारतीय टीम को टॉप-ऑर्डर में ‘दाएं और बाएं हाथ का बेहतरीन कॉम्बिनेशन मिलता है. यह कॉम्बिनेशन किसी भी विरोधी टीम के गेंदबाजों की लाइन-लेंथ को बिगाड़ने और विपक्षी कप्तान की फील्ड सेटिंग को परेशान करने के लिए सबसे सटीक रणनीति होती है.

लंबी पारी खेलने का धैर्य 

आधुनिक क्रिकेट में अक्सर बल्लेबाजों में धैर्य की कमी देखने को मिलती है, क्योंकि टी20 फॉर्मेट के प्रभाव के कारण वे टेस्ट मैच में भी जल्दबाजी करते हैं और अपना विकेट गंवा बैठते हैं. हालांकि, क्रीज पर समय बिताने के मामले में देवदत्त पडिक्कल के पास गजब का धैर्य है. वह अपनी पारी को धीरे-धीरे आगे बढ़ाते हैं और खराब गेंद का इंतजार करते हैं. उनमें टेस्ट मैच के हर सेशन में पूरे संयम के साथ बल्लेबाजी करने का गजब का हुनर है. 

स्पिन और तेज गेंदबाजी के खिलाफ समान रूप से सक्षम

टेस्ट क्रिकेट में एक बेहतरीन नंबर-3 का बल्लेबाज वही होता है जो विदेशों में तेज गेंदबाजों और उपमहाद्वीप में स्पिनरों, दोनों के खिलाफ अच्छा खेलने में माहिर हो. पडिक्कल अपनी लंबी कद-काठी के कारण स्पिनरों के खिलाफ कदमों का बेहतरीन इस्तेमाल करते हैं. यही कारण है कि वह स्पिनर्स को आसानी से टिकने नहीं देते हैं. इसके अलावा, वह तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी शानदार पुल और कट शॉट्स लगाते हैं. साफ है कि जरूरत पड़ने पर वह बड़े शॉट्स खेलने में भी पूरी तरह सक्षम हैं.

भारतीय क्रिकेट का भविष्य 

भारतीय टेस्ट टीम युवा कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है. ऐसे में टीम प्रबंधन के पास अगले 5-7 सालों के लिए एक मजबूत टॉप-ऑर्डर तैयार करने का दबाव है, खासकर नंबर-3 के उस महत्वपूर्ण स्थान के लिए जो टीम के लिए दीवार बन सके. देवदत्त पडिक्कल की उम्र और उनकी शानदार फिटनेस को देखते हुए उन्हें नंबर-3 पोजीशन पर लगातार बल्लेबाजी का मौका देना भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए एक बेहतरीन निवेश साबित हो सकता है.

अपने पहले ही विदेशी टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल ने दिखाया जलवा

श्रीलंका के खिलाफ गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला गया पहला टेस्ट मैच देवदत्त पडिक्कल के लिए किसी सपने से कम नहीं रहा. इस बल्लेबाज ने इस टेस्ट की दोनों पारियों में कमाल की बल्लेबाजी की और टीम इंडिया को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया. पहली पारी में भारत की ओर से सिर्फ पडिक्कल ने शतक लगाया. विदेशी सरजमीं पर अपना पहला टेस्ट खेल रहे देवदत्त पडिक्कल ने पहली ही पारी में 167 रन बनाकर तहलका मचा दिया था, जबकि दूसरी पारी में उन्होंने 44 रनों की पारी खेली. इस तरह दोनों पारियों को मिलाकर पडिक्कल ने कुल 211 रन बनाए. 

इसी के साथ पडिक्कल ने एक बड़ा कीर्तिमान भी बना दिया है. पडिक्कल अब विदेशी धरती पर नंबर-3 की पोजीशन पर बल्लेबाजी करते हुए किसी टेस्ट मुकाबले में 200 या उससे अधिक रन बनाने वाले सिर्फ तीसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं. इससे पहले भारत के लिए ऐसा सिर्फ राहुल द्रविड़ और संजय मंजरेकर ने किया था.

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