Sport : 1951 के पहले मेडल से 2026 के रिले गोल्ड तक… देखें एशियन गेम्स एथलेटिक्स में भारत के पदकों का पूरा इतिहास और जादुई आंकड़े #INA

Asian Games 2026: एशियन गेम्स के इतिहास में भारतीय एथलेटिक्स का सफर देश की खेल क्रांति की रीढ़ रहा है. साल 1951 में जब नई दिल्ली में पहले एशियन गेम्स का आयोजन हुआ, तभी से ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला. भारत ने एशियन गेम्स के इतिहास में 283 से अधिक मेडल अकेले एथलेटिक्स से जीते हैं, जिसमें 85 गोल्ड, 102 सिल्वर और 96 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं. यह एशियन गेम्स के इतिहास में भारत द्वारा किसी भी एक खेल में जीता गया सबसे बड़ा मेडल कलेक्शन है. महान मिल्खा सिंह से लेकर उड़न परी पीटी उषा, आज के ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा और विथ्या रामराज तक, भारतीय एथलीटों ने हर पीढ़ी में देश का मान वैश्विक स्तर पर बढ़ाया है.

1951 में घरेलू मैदान पर भारत का ऐतिहासिक शुरुआत

साल 1951 में दिल्ली की धरती पर जब पहले एशियाई खेलों का आगाज हुआ, तब भारत ने एथलेटिक्स में अपनी जो छाप छोड़ी, वह आज भी एक रिकॉर्ड है. भारत के महान फर्राटा धावक लवी पिंटो ने 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में दो स्वर्ण पदक जीतकर खुद को एशिया के सबसे तेज धावक के रूप में स्थापित किया था. 

पहला मेडल धमाका: इस पहले ही संस्करण में भारत ने एथलेटिक्स में 34 पदक (जिसमें 10 गोल्ड मेडल शामिल थे) अपने नाम किए थे. एक ही खेल में इतने ज्यादा पदक जीतने का यह रिकॉर्ड दशकों तक कायम रहा. परदुमन सिंह ब्रार (शॉटपुट और डिस्कस थ्रो) जैसे एथलीटों ने थ्रोइंग इवेंट्स में भारत का दबदबा स्थापित किया.

मिल्खा सिंह का दौर (1958-1962): ‘द फ्लाइंग सिख’ का साम्राज्य

1950 के दशक के आखिरी सालों में भारतीय एथलेटिक्स को एक ऐसा चमकता सितारा मिला, जिसने दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर दिया. हम यहां ‘द फ्लाइंग सिख’ के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह की बात कर रहे हैं. मिल्खा सिंह ने 1958 के टोक्यो एशियन गेम्स में 200 मीटर और 400 मीटर की रेस में दो गोल्ड मेडल जीतकर तहलका मचा दिया था. इसके बाद 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स में भी उन्होंने 400 मीटर और 4×400 मीटर रिले रेस में गोल्ड मेडल जीतकर एशियाई ट्रैक पर अपनी बादशाहत कायम की थी. इसी सुनहरे दौर में गुरबचन सिंह रंधावा (डेकाथलॉन) और मोहिंदर सिंह (ट्रिपल जंप) जैसे दिग्गज एथलीटों ने भी शानदार खेल दिखाते हुए गोल्ड मेडल जीते और देश के पदकों की संख्या को नई ऊंचाइयों पर बनाए रखा. 

1970 और 1980 का दशक: श्रीराम सिंह का कमाल और पीटी उषा की उड़ान

1970 के दशक में भारतीय एथलेटिक्स का एक नया दौर शुरू हुआ, जहां पुरुष खिलाड़ियों के साथ-साथ हमारी महिला एथलीटों ने भी ट्रैक पर अपनी ताकत दिखाना शुरू कर दिया था. इसी दौर में मध्यम दूरी के बादशाह कहे जाने वाले भारत के श्रीराम सिंह ने 1974 और 1978 के एशियन गेम्स में लगातार दो बार 800 मीटर की रेस में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था. उन्होंने न सिर्फ देश को बैक-टू-बैक दो मेडल दिलाए, बल्कि रेस को इतने कम समय में पूरा किया कि उस समय का एक नया एशियाई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया.

1986 के सियोल एशियन गेम्स को हमेशा ‘उड़न परी’ पीटी उषा के उस चमत्कारिक प्रदर्शन के लिए याद किया जाता है जिसने इतिहास रच दिया था. उन्होंने इस टूर्नामेंट में अकेले ही 4 गोल्ड मेडल (200 मीटर, 400 मीटर, 400 मीटर हर्डल्स और 4×400 मीटर रिले रेस) और एक सिल्वर मेडल जीतकर तहलका मचा दिया था. एक ही एशियन गेम्स में उनके इस ऐतिहासिक और धमाकेदार प्रदर्शन ने भारत में महिला एथलेटिक्स की पूरी सूरत ही बदल दी और लाखों लड़कियों को खेलों में आने के लिए प्रेरित किया. 

21वीं सदी का आगाज: अंजू बॉबी जॉर्ज से हांगझोऊ 2023 का महा-रिकॉर्ड

1990 के दशक में मिले कुछ झटकों के बाद, साल 2002 में अंजू बॉबी जॉर्ज ने लॉन्ग जंप में गोल्ड मेडल जीतकर भारतीय एथलेटिक्स में एक नई जान फूंक दी थी. इसके बाद कृष्णा पूनिया और सीमा पूनिया जैसी दिग्गज खिलाड़ियों ने चक्का फेंक (डिसकस थ्रो) जैसे तकनीकी खेलों में भारत का दबदबा आगे बढ़ाया. इसी का नतीजा रहा कि साल 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में भारतीय एथलेटिक्स टीम ने इतिहास रच दिया. भारत ने वहां अपने इतिहास का सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 29 मेडल जीते, जिसमें 6 गोल्ड, 14 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल थे. 

नीरज चोपड़ा की बादशाहत

टोक्यो ओलंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ने 2018 जकार्ता के बाद 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी जवेलीन थ्रो में अपना लगातार दूसरा गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था. उस ऐतिहासिक मुकाबले में उनके साथ ही किशोर जेना ने भी सिल्वर मेडल जीतकर पोडियम पर भारत का दबदबा दिखाया था. इसके अलावा, शॉटपुट के दिग्गज खिलाड़ी तेजिंदर पाल सिंह तूर ने भी वहां लगातार अपना दूसरा गोल्ड मेडल अपने नाम किया था. 

एशियन गेम्स 2026: आइची-नागोया में भी जारी है मेडल की गूंज

जापान के आइची-नागोया में चल रहे 20वें एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स टीम एक बार फिर से धमाल मचा रही है. भारतीय एथलीटों ने अपने शानदार और धमाकेदार खेल से देश के लिए मेडल की झड़ी लगा दी है और भारत के कुल मेडल की संख्या को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है.

एशियन गेम्स 2026 में हमारी ‘गोल्डन गर्ल्स’ ने ट्रैक पर आग लगा दी है. किरण पहल, एमआर पूवम्मा, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज की महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने बहरीन और चीन जैसी मजबूत टीमों को धूल चटाते हुए शानदार गोल्ड मेडल अपने नाम किया. यह इस बार एथलेटिक्स (ट्रैक एंड फील्ड) में भारत का सबसे यादगार और इकलौता स्वर्ण पदक रहा. 

रिले रेस के इस धमाके के अलावा बाकी खेलों में भी भारतीय एथलीटों का जलवा देखने को मिला. जहां सीमा कुमारी ने महिलाओं की 10000 मीटर दौड़ में देश का 16 साल का सूखा खत्म कर ब्रॉन्ज मेडल जीता. वहीं, हाई जंपर सर्वेश कुशारे ने 56 साल का लंबा इंतजार खत्म करते हुए सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया. इतिहास तो तब बना जब पोल वॉल्ट इवेंट में बारनिका एलंगोवन ने देश को इस खेल का पहला ब्रॉन्ज मेडल दिलाया, जिससे साफ पता चलता है कि अब भारतीय खिलाड़ी हर खेल में माहिर हो चुके हैं. सिर्फ यही नहीं, रिले रेस के अन्य इवेंट्स में भी भारत ने अपना पूरा दबदबा दिखाया. टीम इंडिया ने मिक्स्ड 4×400 मीटर में सिल्वर, जबकि पुरुष 4×400 मीटर और मिक्स्ड 4×100 मीटर रिले में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रौशन किया.

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