Tach – China CCTV Camera : चीन से आने वाले कैमरे कितने सेफ? आपके घर में भी लगे हैं तो जरूर पढ़ें ये खबर

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- China CCTV Camera : केंद्र सरकार ने बिना सर्टिफिकेशन वाले इंटरनेट कनेक्टेड चाइनीज सीसीटीवी कैमरों पर बैन लगा दिया है. चाइनीज इलेक्ट्रोनिक्स उपकरणों को दुनियाभर में संदेह की नजरों से देखा जाता है. सीसीटीवी कैमरे भी संवेदनशील प्रोडक्ट्स की श्रेणी में आते हैं.
- क्यों खतरा बने चाइनीज सीसीटीवी
- राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी के लिए खतरा
- भारत ने कड़े किए नियम
China CCTV Camera : केंद्र सरकार ने बिना सर्टिफिकेशन वाले इंटरनेट कनेक्टेड चाइनीज सीसीटीवी कैमरों पर बैन लगा दिया है. चाइनीज इलेक्ट्रोनिक्स उपकरणों को दुनियाभर में संदेह की नजरों से देखा जाता है. सीसीटीवी कैमरे भी संवेदनशील प्रोडक्ट्स की श्रेणी में आते हैं.
इन कैमरों की कमजोरियों का फायदा उठाकर अपराधी लाइव वीडियो फीड चुराकर उसे डार्क वेब पर बेच चुके हैं.
नई दिल्ली. भारत सरकार ने एक अप्रैल से देश चीनी मूल के और इंटरनेट से जुड़े ऐसे सीसीटीवी कैमरों की बिक्री पर रोक लगा दी है जिनके पास स्टैंडर्ड टेस्टिंग और क्वालिटी सर्टिफिकेशन नहीं है. सरकार का यह फैसला मुख्य रूप से जासूसी के खतरों को रोकने और भारतीय नागरिकों के डेटा को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है. इसका सीधा असर हिकविजन (Hikvision) और डाहुआ (Dahua) जैसी दिग्गज चीनी कंपनियों पर पड़ेगा, जो वर्तमान में भारतीय बाजार के बड़े हिस्से पर काबिज हैं. सरकार के इस फैसले से सवाल उठाता है कि चीन से आने वाले सीसीटीवी कैमरे कितने सेफ हैं?
चाइनीज इलेक्ट्रोनिक्स उपकरणों को दुनियाभर में संदेह की नजरों से देखा जाता है. सीसीटीवी कैमरे भी संवेदनशील प्रोडक्ट्स की श्रेणी में आते हैं. यही वजह है कि अमेरिका में साल 2019 से ही फेडरल सरकार, सेना और सरकारी एजेंसियां के परिसरों में चाइनीज कंपनी हैकविजन और डाहूआ के सीसीटीवी कैमरे बैन हैं. 2022 में अमेरिका ने चीन से नए सीसीटीवी के इंपोर्ट, बिक्री और यूज पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया. ब्रिटेन में संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संस्थानों में चाइनीज सीसीटीवी कैमरे बैन है. कनाडा में Hikvision पर 2025 में प्रतिबंध लगा दिया गया.
क्यों खतरा बने चाइनीज सीसीटीवी
विशेषज्ञों के अनुसार, ये कैमरे न केवल साइबर सुरक्षा के लिहाज से कमजोर हैं, बल्कि देश की गोपनीयता के लिए भी एक बड़ा खतरा हैं. साइबर सुरक्षा के लिहाज से काफी कमजोर होते हैं. चीनी मूल के कैमरों में बार-बार बैकडोर (Backdoors), डिफ़ॉल्ट पासवर्ड और अनपैच्ड बग (Unpatched Bugs) पाए जाते हैं. हैकर्स इन खामियों का फायदा उठाकर आसानी से डिवाइस का रिमोट एक्सेस प्राप्त कर लेते हैं.
हिकविज़न और डाहुआ के कैमरों में ऐसी कमियां देखी गई हैं, जिनकी वजह से अपराधी लाइव वीडियो फीड चुराकर उसे डार्क वेब पर बेच चुके हैं. ये कंपनियां अक्सर कमजोर फर्मवेयर (Firmware) और एन्क्रिप्शन (Encryption) का इस्तेमाल करती हैं, इसलिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइसेज की श्रेणी में चाइनीज कैमरे सबसे ज्यादा हैक होने वाले प्रोडक्ट्स में शामिल हैं.
राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी के लिए खतरा
चीन की ज्यादातर कंपनियों का सीधा संबंध चीनी सरकार से होना सबसे बड़ी चिंता का विषय है. उदाहरण के लिए, हिकविज़न (Hikvision) में चीनी सरकार की बड़ी हिस्सेदारी है. चीन के इंटेलिजेंस कानून के तहत वहां की कंपनियां सरकार को डेटा देने के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार हैं.
कई रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ है कि ये कैमरे क्लाउड कनेक्शन बंद होने के बावजूद यूजर का डेटा चीनी या चीन द्वारा नियंत्रित सर्वरों पर भेजते हैं. यदि इन कैमरों का इस्तेमाल सरकारी भवनों या संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जाता है, तो इससे जासूसी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. इसके अलावा ये निजी डेटा भी चुरा सकते हैं. इसलिए इनका इस्तेमाल अपने बेडरूम या ऐसी ही किसी और निजी जगह करना आपकी निजता को खतरे में डाल सकता है.
भारत ने कड़े किए नियम
इन सब खतरों को देखते हुए भारत सरकार ने स्टैंडर्डाइजेशन और क्वालिटी सर्टिफिकेशन के नए नियम लागू किए हैं. इन नियमों के कारण चाइनीज ब्रांड्स का भारतीय बाजार में टिकना लगभग नामुमकिन हो गया है.
- चिपसेट पर पाबंदी: ऐसे किसी भी उत्पाद को सर्टिफिकेशन नहीं दिया जाएगा जिसमें चीनी चिपसेट (SoC) या फर्मवेयर (Firmware) का इस्तेमाल किया गया हो.
- अनिवार्य टेस्टिंग: अब प्रत्येक डिवाइस के लिए रिमोट एक्सेस वल्नरेबिलिटी (Remote Access Vulnerability) की गहन जांच कराना अनिवार्य है.
- लोकल टेस्टिंग: कंपनियों के लिए अपनी सप्लाई चेन (Supply Chain) में पूर्ण पारदर्शिता बरतना और भारत की स्थानीय लैब्स में सुरक्षा परीक्षण कराना जरूरी कर दिया गया है.
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