Technology, एआई पर लगाम ढीली रखने के पक्ष में अमेरिका: जी20 देशों से कहा- इनोवेशन को रोकने वाले नियम बनाने से बचें – America Wants Loose Ai Regulations G20 Meeting Elon Musk Carolina Principles Us China Ai Race — INA

सार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच अमेरिका ने G20 देशों से एआई के लिए नई और सख्त नियामक संस्थाएं बनाने से बचने की अपील की है। अमेरिकी प्रशासन कम सरकारी हस्तक्षेप, तेज तकनीकी विकास और कारोबार के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर जोर दे रही है।
अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर वैश्विक स्तर पर सख्त नियमों की दिशा में बढ़ रहे कदमों का विरोध किया है। अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना में आयोजित G20 की तकनीकी बैठक में अमेरिकी अधिकारियों ने सदस्य देशों से कहा कि एआई के लिए हर नई तकनीक को अलग नियामक समस्या मानने के बजाय मौजूदा ढांचे के भीतर ही नीतियां बनाई जानी चाहिए। अमेरिका का तर्क है कि जरूरत से ज्यादा नियम तकनीकी विकास और नई AI सेवाओं की लॉन्चिंग को धीमा कर सकते हैं।
अमेरिका ने पेश किए ‘कैरोलिना प्रिंसिपल्स’
बैठक की सह-अध्यक्षता कर रहे अमेरिकी तकनीकी सलाहकार माइकल क्रैटसियोस ने G20 प्रतिनिधियों के सामने एक नीति ढांचा रखा, जिसे ‘कैरोलिना प्रिंसिपल्स’ नाम दिया गया है। इसके तहत देशों से कहा गया है कि एआई के लिए नए नियम तभी बनाए जाएं जब तकनीक किसी ऐसी नई चुनौती को जन्म दे, जिसे मौजूदा कानूनों से संभालना संभव न हो।
अमेरिका चाहता है कि देश एआई के बुनियादी अनुसंधान में निवेश बढ़ाएं, नई खोजों को गति दें और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए बेहतर माहौल तैयार करें। क्रैटसियोस ने कहा कि हर नई तकनीक के सामने आने पर उसे बिल्कुल नई नीतिगत समस्या मानना उचित नहीं है।
अमेरिकी प्रशासन इस बैठक में G20 देशों को एआई विकास की निगरानी के लिए नई नियामक संस्थाएं बनाने से भी रोकना चाहता है।
एआई कंपनियों के हितों से मेल खाती है अमेरिकी नीति
अमेरिका का यह रुख दुनिया की कई बड़ी एआई कंपनियों की मांग से भी काफी हद तक मेल खाता है। इनमें ज्यादातर कंपनियां अमेरिका की हैं और उनका मानना है कि अलग-अलग देशों में कड़े और असंगत नियम एआई उत्पादों के विकास, परीक्षण और लॉन्च में अड़चन पैदा कर सकते हैं।
कंपनियों को यह भी चिंता है कि सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े नए सरकारी प्रावधानों के कारण उन्हें अपने मॉडल में बदलाव करने पड़ सकते हैं। इससे नए एआई उत्पाद बाजार में लाने की रफ्तार और कंपनियों के मुनाफे, दोनों पर असर पड़ने की आशंका है।
दूसरी तरफ एआई से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी
हालांकि एआई पर लगाम ढीली रखने की अमेरिकी सोच के बीच इसकी सुरक्षा को लेकर बहस भी तेज हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल ने हाल में चेतावनी दी थी कि एआआई का विकास वैज्ञानिक समझ और सरकारी नीतियों की रफ्तार से . निकल रहा है।
हाल की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई है। एक मामले में एक अनियंत्रित एआई एजेंट के कारण हुए साइबर हमले में एआई कंपनी हगिंग फेस के बुनियादी ढांचे से समझौता होने की बात सामने आई। एआई एजेंट ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जो इंसानी निगरानी के बिना या बेहद कम हस्तक्षेप के साथ कई काम कर सकते हैं।
यही वजह है कि कई देशों में यह सवाल उठ रहा है कि एआई के तेज विकास के साथ सुरक्षा और जवाबदेही के लिए कितने नियम जरूरी हैं।
एलन मस्क ने की यूरोपीय नियमों की आलोचना
बैठक में उद्योग जगत के बड़े नामों ने भी अपने विचार रखे। अमेरिकी अरबपति कारोबारी एलन मस्क (Elon Musk) ने यूरोपीय संघ के तकनीकी नियमों की आलोचना करते हुए कहा कि वहां की नीतियां कंपनियों की प्रगति में बाधा डालती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि चीन के बाहर के देशों को डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली जरूरत पूरी करने के लिए ऊर्जा के नए स्रोत विकसित करने होंगे। एआई के बड़े मॉडल और कंप्यूटिंग सिस्टम चलाने के लिए विशाल स्तर पर बिजली की जरूरत पड़ती है, इसलिए ऊर्जा उपलब्धता भविष्य की एआई प्रतिस्पर्धा का अहम हिस्सा बनती जा रही है।
इस बैठक में मेटा से मार्क जुकरबर्ग, एंथ्रोपिक से डेमिस हासाबिस, ओपनएआई से सैम ऑल्टमैन और एनवीडिया से जेनसन हुआंग के भी शामिल होने की उम्मीद है।
असली मुकाबला अमेरिका और चीन के बीच
एआई पर यह बहस ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी बढ़त हासिल करने की होड़ तेज है। चीन के ओपन-वेट एआई मॉडल तेजी से सक्षम हो रहे हैं। इन मॉडलों के कुछ मुख्य हिस्से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होते हैं, जिससे डेवलपर्स और कंपनियां उन्हें अपने हिसाब से इस्तेमाल या विकसित कर सकती हैं।
इन चीनी मॉडलों की बढ़ती क्षमता अमेरिकी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती बन रही है। साथ ही अमेरिका में यह चिंता भी है कि अगर चीन के एआई सिस्टम दुनिया के दूसरे देशों में बड़े पैमाने पर अपनाए जाते हैं, तो इससे तकनीकी और सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं।
अमेरिकी नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वॉशिंगटन की कोशिश सिर्फ अपने एआई उद्योग को . बढ़ाने तक सीमित नहीं है। वह चाहता है कि दुनिया के ज्यादा से ज्यादा देश अमेरिकी तकनीकी इकोसिस्टम से जुड़े रहें और चीन के वैकल्पिक एआई ढांचे की ओर न बढ़ें।