Technology, 22 जुलाई से बदल जाएगा गूगल प्ले स्टोर: अब एक ही जगह मिलेंगे कई एप स्टोर्स; यूजर्स को मिलेगा नया एक्सपीरियंस — INA

गूगल और एपिक गेम्स के बीच लंबे समय से चल रहे एंटीट्रस्ट कानूनी विवाद अब खत्म करने वाला सेटलमेंट अचानक वापस ले लिया गया है। जिसके बाद गूगल को कोर्ट की बातें माननी पड़ी। इसके बाद 22 जुलाई से गूगल प्ले स्टोर के भीतर ही आपको प्रतिद्वंद्वी थर्ड-पार्टी एप स्टोर्स देखने को मिलेंगे, जो गूगल के रेवेन्यू पर नजर रखेगा, लेकिन क्या इससे एंड्रॉयड एप डाउनलोड करना पहले की तरह सुरक्षित रह पाएगा? या फिर आपके फोन में मालवेयर का खतरा बढ़ सकता है। जानिए इस लेख में…

पूरा मामला क्या है?


  • दरअसल, साल 2020 में एपिक गेम्स ने अपने पसंदीदा गेम Fortnite (फोर्टनाइट) में V-Bucks खरीदने के लिए गूगल और एपल के आधिकारिक पेमेंट सिस्टम की जगह डायरेक्ट पेमेंट विकल्प जोड़ दिया था। इससे दोनों कंपनियों को मिलने वाला 30 प्रतिशत कमीशन बच जाता था।

  • इसे नियमों का उल्लंघन माना गया और फोर्टनाइट को गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर से हटा दिया गया। जिसके बाद एपिक गेम्स ने गूगल के खिलाफ एंटीट्रस्ट मुकदमा दायर कर किया।

  • इस मुकदमें में एपल तो सुरक्षित निकल गया, लेकिन गूगल अपने ओपन सोर्स एंड्रॉयड के दावों में खुद फंस गया। कोर्ट में यह भी साबित हो गया कि गूगल ने नियमों के खिलाफ जाकर फोन निर्माता कंपनियों (Device Makers) को अन्य एप स्टोर्स प्री-लोड करने या प्रमोट करने से रोका था और इस सच को छिपाने की कोशिश भी की थी।

  • इसका नतीजा यह रहा है कि जज जेम्स डोनाटो (James Donato) ने गूगल पर सख्त पाबंदियां लगा दी। जिसमें फीस कम करना, दूसरे स्टोर्स पर एप्स को मिरर करने की आजादी देना और सबसे प्ले स्टोर के भीतर ही दूसरे स्टोर्स को जगह देना अनिवार्य कर दिया गया।

क्यों रद्द हुआ सेटलमेंट और क्या है गूगल का नया स्टैंड?

शुरुआती योजना के अनुसार, दोनों कंपनियों ने एक वैश्विक रजिस्टर्ड एप स्टोर प्रोग्राम के तहत समझौता किया था, जिसमें थर्ड-पार्टी स्टोर्स को सिस्टम फीचर्स तो मिलते, लेकिन यूजर्स को उन्हें अलग से साइडलोड करना पड़ता था।

हालांकि, जज डोनाटो ने इस ढीले प्रस्ताव पर गहरा संदेह जताया, जिसके बाद एपिक और गूगल ने इसे पूरी तरह वापस ले लिया। इस पूरे मामले पर गूगल के ट्रस्ट एंड रेपुटेशन कम्युनिकेशन लीड डैन जैक्सन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि इकोसिस्टम में फैली अनिश्चितता को कम करने के लिए हमने यूएस कोर्ट के इंजंक्शन में संशोधन की अपनी याचिका को एपिक की सहमति से वापस ले लिया है। कहा हमारा पूरा ध्यान अब ग्लोबल बिजनेस मॉडल में बदलाव करने पर है, जिससे यूजर्स को एप्स के ज्यादा विकल्प, कम कीमतें और डेवलपर्स के लिए नए मौके मिल सकें। हम एंड्रॉइड की सुरक्षा को बनाए रखते हुए एक प्रतिस्पर्धी बाजार विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

कौन से नए नियम लागू होने वाले हैं?

इस मामले के बाद अब 22 जुलाई 2026 से इस नए डिजिटल एरा में गूगल ने सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने के लिए कुछ खास गाइडलाइंस तय की हैं, जिनके बारे में नीचे बताया है।

1. प्ले स्टोर कैटलॉग का एक्सेस

गूगल प्ले स्टोर में शामिल होने वाले नए थर्ड-पार्टी एप स्टोर्स को डिफॉल्ट रूप से प्ले स्टोर के पूरे एप कैटलॉग का एक्सेस मिलेगा। हालांकि, जो डेवलपर्स अपने एप्स को इन बाहरी स्टोर्स पर नहीं दिखाना चाहते, उन्हें ऑप्ट-आउट (बाहर होने) का विकल्प दिया जाएगा।

2. सालाना कंप्लायंस फीस

गूगल इन बाहरी एप स्टोर्स की सुरक्षा जांच और नियमों के अनुपालन के लिए प्रतिवर्ष $5,000 (लगभग 4.15 लाख रुपये) की फीस वसूलने का अधिकार रखेगा।

क्या इससे एंड्राॅयड यूजर्स के फोन में मालवेयर का खतरा बढ़ सकता है?

इस फैसले के बाद एंड्रॉयड यूजर्स की टेंशन बढ़ गई है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। प्ले स्टोर में जगह पाने वाले हर नए स्टोर के लिए कुछ कड़े नियम तय किए गए हैं:


  • कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म पर मालवेयर यानी खतरनाक वायरस को ब्लॉक करना होगा।

  • बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) और कॉपीराइट नियमों का कड़ाई से सम्मान करना होगा।

  • यूजर्स को एप्स को आसानी से अपडेट और अनइंस्टॉल करने की पूरी सुविधा देनी होगी।

  • इसके अलावा अगर किसी एप स्टोर के कुल इंस्टॉलेशन में से 1प्रतिशत से अधिक ऐप्स में कभी भी मालवेयर या वायरस पाया जाता है, तो गूगल के पास उस पूरे स्टोर को तुरंत अपने प्रोग्राम से हटाने का अधिकार होगा।

यह कैसे काम करेगा?

गूगल का यह नया रजिस्टर्ड एप स्टोर प्रोग्राम तकनीकी रूप से पूरी दुनिया में काम करेगा, लेकिन प्ले स्टोर के होमपेज पर थर्ड-पार्टी एप स्टोर्स दिखने की यह अनोखी सुविधा फिलहाल विशेष रूप से अमेरिका (US) के यूजर्स के लिए लाइव की जा रही है।

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