Technology, भारत में 6g नेटवर्क आने में देरी संभव: 2030 तक लॉन्च की उम्मीद, फुल रोलआउट पर सवाल; Coai ने आखिर क्या बताया? – India’s 6g Rollout May Face Delays Beyond 2030 Telecom Operators Seek Viable Use Cases — INA

सार
भारत में 6G नेटवर्क के लिए 2030 का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इसके रोलआउट में तय समय से देरी हो सकती है। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) के महानिदेशक के अनुसार, 5G से पर्याप्त कमाई (रेवेन्यू) देने वाले खास एप्लीकेशंस की कमी और टेलीकॉम कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव की वजह से आगामी 6G तकनीक में निवेश को लेकर कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। क्या 5G से मुनाफा न मिलने के कारण 6G तकनीक के रोलआउट पर ब्रेक लग जाएगा? आइएजानते हैं कि COAI के महानिदेशक ने इस पूरी स्थिति पर क्या खास बातें बताई हैं…

भारत में 6G नेटवर्क को लेकर तैयारियां चल रही हैं, लेकिन इसका पूर्ण पैमाने पर रोलआउट तय समय से . बढ़ सकता है। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) के महानिदेशक एसपी कोचर के मुताबिक, 6G तकनीक के 2030 के आसपास आने की उम्मीद है, लेकिन इसका देशभर में पूरा विस्तार होने में अधिक समय लग सकता है। इसकी एक बड़ी वजह मौजूदा 5G नेटवर्क से पर्याप्त कमाई कराने वाले खास एप्लिकेशन की कमी है। इसके अलावा, टेलीकॉम कंपनियों के बढ़ते खर्च और घटते मुनाफे ने भी अगली पीढ़ी के नेटवर्क में निवेश को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कोचर ने सरकार से शुल्क और स्पेक्ट्रम की कीमतों में राहत देने की मांग भी की है।
6G नेटवर्क के पूर्ण रोलआउट में क्यों हो सकती है देरी?
भारत में 6G नेटवर्क के पूर्ण रोलआउट में देरी हो सकती है। COAI के महानिदेशक एसपी कोचर ने नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के दौरान कहा कि 6G तकनीक के 2030 के आसपास आने की उम्मीद है, लेकिन इसका पूर्ण रोलआउट कुछ समय . बढ़ सकता है। कोचर ने कहा कि यह 2030 तक लॉन्च होने का अनुमान है। इसमें थोड़ी देरी हो सकती है। उन्होंने यह भी साफ किया कि 2030 के आसपास तकनीक से जुड़ी शुरुआत हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसी समय तक पूरे नेटवर्क का विस्तार हो जाएगा। उनके मुताबिक, 6G को लेकर सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि टेलीकॉम कंपनियों को इस तकनीक में बड़े निवेश के बदले कमाई का स्पष्ट रास्ता दिखाई देना चाहिए।
5G से कमाई बढ़ाने वाले खास एप्लिकेशन की कमी
कोचर ने कहा कि मौजूदा 5G नेटवर्क में ऐसे खास एप्लिकेशन की कमी है, जो टेलीकॉम कंपनियों के लिए बड़े स्तर पर अतिरिक्त राजस्व पैदा कर सकें। ऐसे में कंपनियों के सामने यह सवाल हो रहा है कि 6G नेटवर्क में निवेश करने के बाद उन्हें ऐसे कौन-से व्यावहारिक इस्तेमाल मिलेंगे, जिनसे कमाई हो सके। उन्होंने कहा कि चूंकि 5G में कोई किलर एप्लिकेशन नहीं हैं, इसलिए जो भी 6G में निवेश करेगा, उसे दो बार सोचना पड़ेगा कि क्या ऐसे अनुप्रयोग होंगे, जिन्हें मुद्रीकृत किया जा सके या नहीं। इसलिए इसके रोलआउट में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
यहां किलर एप्लिकेशन से मतलब ऐसे खास इस्तेमाल या सेवाओं से है, जो किसी तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए प्रेरित करें और उससे कमाई का रास्ता भी बने। कोचर के मुताबिक, 6G में निवेश का फैसला इस बात पर भी निर्भर करेगा कि कंपनियों को इसके व्यावसायिक इस्तेमाल कितने स्पष्ट दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि 2030 में 6G से जुड़ी कुछ शुरुआत जरूर हो सकती है, लेकिन इसे पूर्ण रोलआउट नहीं माना जाना चाहिए।
भारत का 6G विजन क्या है?
भारत सरकार ने मार्च 2023 में भारत 6G विजन पेश किया था। इसका उद्देश्य 2030 तक भारत को 6G तकनीक के डिजाइन, विकास और तैनाती में अग्रणी योगदान बनाना है। इस विजन के तहत भारत वैश्विक 6G पेटेंट और मानकों में 10 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रख रहा है। इसके लिए घरेलू स्तर पर रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विकास में भारत की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
कोचर के मुताबिक, 6G के वैश्विक मानकों पर काम 3GPP यानी 3rd जेनरेशन पार्टनशिप प्रोजेक्ट के जरिए . बढ़ रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय संगठन मोबाइल टेलीकॉम तकनीक के मानक विकसित करता है। उन्होंने कहा कि भारत इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। देश में पेटेंट दाखिल करने, मानक तैयार करने और 6G तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल की पहचान करने पर काम हो रहा है। कोचर ने कहा कि हमारा वातावरण बहुत सारे पेटेंट दाखिल करना शुरू कर चुका है। हम मानकों के निर्माण में भाग ले रहे हैं। हम यूज केस तलाश रहे हैं।
टेलीकॉम कंपनियों पर बढ़ रहा वित्तीय दबाव
6G में निवेश की चुनौती के साथ-साथ कोचर ने टेलीकॉम कंपनियों की मौजूदा वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, कंपनियों की आय और खर्च के बीच का अंतर बढ़ रहा है, जिससे मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी आय और खर्च के बीच का अंतर बढ़ रहा है। इसलिए हमारे मुनाफे घट रहे हैं।
टेलीकॉम नेटवर्क का विस्तार करने के लिए कंपनियों को लगातार निवेश करना पड़ता है। इसमें नेटवर्क से जुड़े उपकरण, स्पेक्ट्रम और दूसरी परिचालन लागत शामिल होती हैं। अगर खर्च बढ़ता रहे और निवेश के मुकाबले पर्याप्त रिटर्न न मिले, तो नेटवर्क विस्तार की गति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से कोचर ने सरकार से टेलीकॉम कंपनियों पर लगने वाले नियामकीय शुल्क, लेवी और स्पेक्ट्रम की कीमतों में राहत देने की मांग की है।
क्या मोबाइल टैरिफ भी बढ़ सकते हैं?
इतना ही नहीं कोचर ने यह भी संकेत दिया है कि अगर टेलीकॉम कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ती रही और उन्हें पर्याप्त वित्तीय राहत नहीं मिली, तो उपभोक्ताओं के लिए मोबाइल टैरिफ बढ़ाना उद्योग का आखिरी विकल्प हो सकता है।
उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि सरकार हम पर लगने वाले लेवी और शुल्क कम करेगी ताकि हमें टैरिफ की ओर भी न देखना पड़े। यह अंतिम विकल्प है। इस बयान से स्पष्ट है कि उद्योग फिलहाल सरकार से लागत का बोझ कम करने की उम्मीद कर रहा है। कंपनियां नेटवर्क विस्तार जारी रखना चाहती हैं, लेकिन इसके लिए निवेश पर पर्याप्त रिटर्न मिलना जरूरी है।
COAI ने 5G और AI के इस्तेमाल पर क्या कहा?
इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान कोचर ने टेलीकॉम क्षेत्र में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि COAI की ओर से कोई नई डेवलपमेंट नहीं है, लेकिन पूरे टेलीकॉम इकोसिस्टम में कई बदलाव हुए हैं। कोचर के मुताबिक, भारत में दुनिया का सबसे तेज 5G लॉन्च हुआ और सब्सक्राइबर बेस में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि टेलीकॉम नेटवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल किया जा रहा है।
उनके अनुसार, एआई का इस्तेमाल नेटवर्क से जुड़े कामों के अलावा स्कैम और धोखाधड़ी को रोकने के लिए भी शुरू किया गया है। इससे पता चलता है कि टेलीकॉम कंपनियां नेटवर्क को बेहतर बनाने और डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं।
6G के अंतरराष्ट्रीय मानक तय करने में जुटी मीडियाटेक
इसी दौरान इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में मीडियाटेक बैंगलोर प्राइवेट लिमिटेड के सीनियर डायरेक्टर अक्षय अग्रवाल ने कहा कि कंपनी कई दशकों से टेलीकॉम सेक्टर में सक्रिय है। उन्होंने कहा कि भारत में 2G लाने में हम सबसे . थे और 5G में हमारी बाजार हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। मीडियाटेक उन मानकों को तय करने की प्रक्रिया में शामिल है, जिन्हें 6G के लिए लागू किया जाएगा।”
अग्रवाल के अनुसार, 6G से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानक दुनिया भर की कई एजेंसियां मिलकर तय करती हैं, जिनमें 3GPP (थर्ड जनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट) भी शामिल है। उन्होंने कहा कि फिलहाल 6G तकनीक पर ज्यादातर रिसर्च का काम चल रहा है। इसके लिए मीडियाटेक अलग-अलग संगठनों, टेलीकॉम इंडस्ट्री और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रही है।