Technology, टेक एक्सप्लेंड: सिर्फ एक चेन खींचने से कैसे थम जाती है 100 की रफ्तार से दौड़ती ट्रेन? जानिए इसके पीछे की तकनीक – How Train Chain Pulling System Works Indian Railways Emergency Brakes Explained — INA

सार
Train Chain Pulling System: ट्रेन में लगी लाल रंग की इमरजेंसी चेन सिर्फ एक रस्सी या लीवर नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा खास सिस्टम है। इसे खींचते ही 100 की रफ्तार से भागती ट्रेन भी कुछ सकेंड में रुक जाती है। जानिये ट्रेन का चेन पुलिंग सिस्टम कैसे काम करता है।
शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा जिसने कभी ट्रेन में सफर न किया हो। सफर के दौरान आपने हर डिब्बे में लाल रंग की एक जंजीर (अलार्म चेन) लटकती जरूर देखी होगी। अगर कोई यात्री स्टेशन पर छूट जाए, किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए या कोई इमरजेंसी आ जाए, तो यह चेन ही यात्रियों का सबसे बड़ा सहारा होती है। लेकिन क्या आपके दिमाग में कभी यह सवाल आया है कि हजारों टन वजनी और 100-130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भागती हुई एक विशालकाय ट्रेन, सिर्फ एक पतली सी चेन खींचने से सेकंडों में कैसे रुक जाती है?
आज के आधुनिक दौर में जब ट्रेनें हाई-टेक हो चुकी हैं, तब भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह मैकेनिकल सिस्टम सबसे भरोसेमंद माना जाता है। आइए आपको बताते हैं कि चेन खींचते ही ट्रेन के पहियों में ऐसा क्या होता है कि पूरी ट्रेन वहीं थम जाती है।
ब्रेक सिस्टम का उल्टा विज्ञान
अक्सर हम सोचते हैं कि जैसे साइकिल या कार में ब्रेक लगाने के लिए हमें अपनी तरफ से प्रेशर या ताकत लगानी पड़ती है, ट्रेन में भी ऐसा ही होता होगा। लेकिन भारतीय रेलवे का ‘एयर ब्रेक सिस्टम’ (Air Brake System) इसके ठीक उलट काम करता है।
ट्रेन के इंजन से लेकर आखिरी डिब्बे तक एक मोटी पाइपलाइन जुड़ी होती है, जिसे ‘ब्रेक पाइप’ कहा जाता है। जब ट्रेन को चलना होता है, तो इस पाइप में कंप्रेसर के जरिए लगातार हाई प्रेशर भरा जाता है। यह हवा का दबाव ही ब्रेक शूज को पहियों से दूर धकेल कर रखता है, जिससे पहिए फ्री हो जाते हैं और ट्रेन सरपट दौड़ती रहती है।
चेन खींचते ही एकदम से कैसे लगते हैं ब्रेक?
अब जैसे ही कोई यात्री डिब्बे में लटकी अलार्म चेन को खींचता है, उस डिब्बे के नीचे लगा एक छोटा सा मैकेनिकल वाल्व खुल जाता है। इस वाल्व के खुलते ही पाइप में भरी हाई प्रेशर वाली हवा ‘हिस’ की तेज आवाज के साथ तेजी से बाहर निकलने लगती है।
हवा बाहर निकलते ही पाइपलाइन के अंदर दबाव (प्रेशर) अचानक गिर जाता है। दबाव कम होते ही स्प्रिंग की ताकत से ब्रेक सिलेंडर एक्टिव हो जाते हैं और ब्रेक शूज तुरंत जाकर पहियों से चिपक जाते हैं, जिससे पूरी ट्रेन में एक साथ ब्रेक लगने लगते हैं।
ड्राइवर को कैसे मिलता है सिग्नल?
कई लोगों को लगता है कि चेन खींचने से सिर्फ उसी एक डिब्बे में ब्रेक लगता है। लेकिन अगर ऐसा हो, तो पीछे वाले डिब्बे . वाले डिब्बों से टकरा जाएंगे और ट्रेन पटरी से उतर जाएगी। चूंकि ब्रेक पाइप पूरी ट्रेन यानी इंजन से लेकर गार्ड के डिब्बे तक में एक साथ जुड़ी होती है, इसलिए किसी भी एक डिब्बे से हवा निकलने पर पूरी पाइपलाइन का प्रेशर तुरंत ड्रॉप हो जाता है। प्रेशर कम होते ही इंजन में बैठे लोको पायलट (ड्राइवर) के सामने लगे प्रेशर गेज की सुई अचानक नीचे गिर जाती है और उसके केबिन में एक अलार्म या बजर बजने लगता है।
ड्राइवर तुरंत समझ जाता है कि किसी ने चेन खींची है। इसके बाद लोको पायलट ट्रेन को तीन बार हॉर्न देकर तुरंत इंजन की पावर काट देता है और मैनुअली भी ब्रेक अप्लाई कर देता है, ताकि ट्रेन बिना किसी बड़े झटके के सुरक्षित तरीके से रुक सके।
मजे के लिए नहीं खींच सकते चेन
बिना किसी वजह या इमरजेंसी के बिना ट्रेन की चेन खींचना दंडनीय अपराध है। इससे रेलवे को नुकसान होता है और यात्रियों की समय की बर्बादी होती है। बेवजह चेन पुलिंग से ट्रैक पर खड़ी ट्रेन दूसरी ट्रेनों को भी लेट करवा सकती है। रेलवे के मुताबिक, बिना उचित कारण चेन खींचन से रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत सजा हो सकती है। इसमें एक साल तक की जेल, 1,000 रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
जैसे किसी यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, ट्रेन में आग लगने का खतरा हो या किसी यात्री की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर स्थिति पैदा हो जाए। ट्रेन छूटने पर किसी को चढ़ाने या सामान लेने के लिए चेन खींचना गलत है।