आज का एक्सप्लेनर:जिनपिंग का स्वागत करने एयरपोर्ट जाएंगे ट्रम्प, स्टेट डिनर भी देंगे; आखिर चीन को खुश क्यों कर रहा अमेरिका, पूरी कहानी- INA NEWS

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से तीखी बहस, जापान की पीएम को नीचा दिखाना, भारत के पीएम को टैरिफ की चेतावनी… अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ज्यादातर विदेशी नेताओं के साथ अपमानजनक तरीके से पेश आते रहे। लेकिन चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के दौरे से पहले ट्रम्प के तेवर बदले-बदले से हैं। जिनपिंग के लिए रेड कार्पेट कैसे बिछा रहे ट्रम्प, चीन को खुश करने के पीछे क्या कोई खास मकसद और इस दौरे का दुनिया पर असर क्या पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अमेरिका की जमीन पर जिनपिंग के स्वागत में क्या-क्या होगा? जवाब: शी जिनपिंग 11 साल बाद अमेरिका पहुंच रहे हैं। भारतीय समय के मुताबिक 23-24 सितंबर की रात 1 बजे के बाद उनका विमान वॉशिंगटन डीसी के जॉइंट बेस एंड्रयूज पर लैंड करेगा। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक… सवाल-2: आखिर जिनपिंग को इतनी तवज्जो क्यों दे रहे ट्रम्प, बदले में क्या चाहिए? जवाब: अमेरिका में दशकों पुरानी परंपरा रही है कि विदेशी नेता राष्ट्रपति से मिलने व्हाइट हाउस आते हैं, व्हाइट हाउस उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट नहीं जाता। ट्रम्प का प्रोटोकॉल तोड़ना सिर्फ शिष्टाचार नहीं, चीन की अहमियत का कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। इसकी वजह मोटे-तौर पर 4 मांगों में छिपी है… 1. चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई बनाए रखे 2. चाकू, बेलन, नोटबुक का कारोबार टैरिफ-फ्री हो 3. बड़ी डील की घोषणा, जिससे मिड-टर्म चुनावों में माहौल बने 4. चीन के साथ ‘AI हॉटलाइन’ बने, ताकि ये बेलगाम न हो अमेरिकी थिंकटैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में चीनी कारोबार के एक्सपर्ट स्कॉट कैनेडी के मुताबिक, ‘ट्रम्प प्रशासन को उम्मीद थी कि टैरिफ के एकतरफा भारी दबाव से चीन झुक जाएगा। ऐसा नहीं हुआ। चीन का निर्यात इस साल 28% बढ़ा है। इसलिए मोलभाव में शी की स्थिति ट्रम्प से मजबूत दिख रही है।’ सवाल-3: जिनपिंग अमेरिका से क्या हासिल करने की कोशिश करेंगे? जवाब: अमेरिकी टैरिफ के बावजूद लगातार दूसरे साल चीन का ट्रेड सरप्लस 1 ट्रिलियन डॉलर पार कर सकता है। यानी चीन ने जितना सामान दूसरे देशों से खरीदा उससे कहीं ज्यादा उन्हें बेचा है। साफ है कि चीन व्यापार के लिए सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं है। ऐसे में अमेरिकी दौरे से जिनपिंग 3 चीजें साधना चाहते हैं… 1. अमेरिका ताइवान की आजादी का विरोध करे 2. रेयर अर्थ मिनरल्स के एवज में ज्यादा टैरिफ छूट मिले 3. जिनपिंग का भव्य स्वागत, जिससे चीन में छवि मजबूत हो सवाल-4: क्या इस दौरे से भारत और दुनिया पर कोई बड़ा असर पड़ेगा? जवाब: एशियाई और यूरोपीय देशों को डर है कि अगर अमेरिका और चीन साथ आ गए तो ये वर्ल्ड ऑर्डर, यानी दुनिया के नियम खुद तय करेंगे। AI के क्षेत्र में अमेरिका और चीन ही सबसे तेजी से काम कर रहे हैं। दोनों नेताओं की मीटिंग के बाद पूरी दुनिया में AI को नियंत्रित करने का सिस्टम तैयार हो सकता है। ईरान जंग शुरू होने के बाद से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। अगर चीन की मध्यस्थता से अमेरिका ईरान जंग से बाहर निकल पाए और होर्मुज स्ट्रेट के कंट्रोल पर सहमति बन जाए, तो ग्लोबल ऑइल सप्लाई फिर पटरी पर आ सकती है। अमेरिका और चीन में ट्रेड वॉर की वजह से विदेशी कंपनियों के फैक्ट्री लगाने के लिए भारत विकल्प बनकर उभरा था। अमेरिका-चीन की सुलह से भारत के हाथ से यह मौका निकल सकता है। ब्रिगेडियर अनिल रमन (रि.) के मुताबिक, ‘एशिया-पैसेफिक क्षेत्र में चीन को मैनेज करने के लिए अमेरिका भारत से अच्छे रिश्ते बनाकर रखता था। अगर अब अमेरिका-चीन आपस में ही अपने रिश्ते संभालने लगेंगे, तो अमेरिका को भारत की जरूरत कम होगी। लेकिन अगर चीन-अमेरिका में सहमति नहीं बन पाती है, तो अमेरिका के लिए भारत की जरूरत बढ़ जाएगी।’ अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास हो गया है। अगर रेयर अर्थ मिनरल्स के बदले अमेरिका चीन को रूसी तेल खरीदने की ढील देता है, तो भारत पर अमेरिका को ऐसा कोई ऑफर देने का दबाव बढ़ेगा, जिससे उसे भी रियायत मिले। ———- ये खबर भी पढ़िए… खामेनेई को घर में मारा, अब ईरानी राष्ट्रपति को वीजा:अमेरिका के दुश्मनों को भी न्यूयॉर्क आकर खिलाफ बोलने की छूट क्यों; 5 किस्से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। वे हर साल होने वाले यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) में आज भाषण देंगे। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी होंगे। इन नेताओं को अपना दुश्मन मानने वाले अमेरिका ने ही इन्हें वीजा दिया है। पूरी खबर पढ़िए..

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यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |

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