आगरा के अटल आवासीय विद्यालय में लहराता तिरंगा और बच्चों के सपनो की उड़ान

आगरा: एक दौर है जब देशभक्ति को साबित करने के कई पैमाने बन गए हैं लेकिन जब किसी स्कूल के प्रांगण में बच्चे अपने हाथों में तिरंगा थामते हैं तो वो दृश्य किसी भी पैमाने से ऊपर उठ जाता है आगरा के अटल आवासीय विद्यालय में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जहां हर घर तिरंगा अभियान सिर्फ एक सरकारी आयोजन नहीं बल्कि बच्चों के चेहरों की सच्ची मुस्कान बन गया
बात सिर्फ झंडा फहराने की नहीं है बात उस एहसास की है जो इन छात्रों के भीतर बोया जा रहा है विद्यालय प्रांगण में जब हर घर तिरंगा कार्यक्रम की शुरुआत हुई तो वहां मौजूद छात्रों का उत्साह देखते ही बन रहा था इस मौके पर प्रधानाचार्या सुनीता वशिष्ठ और प्रशासनिक अधिकारी अशोक कुमार मौजूद थे जिनके सामने बच्चों ने अपनी देशभक्ति का जो प्रदर्शन किया वो ये बताने के लिए काफी था कि नया भारत किन हाथों में पल रहा है ।
प्रवीण शर्मा और शारीरिक शिक्षा शिक्षक राम गोपाल सैनी के मार्गदर्शन में बच्चों ने सिर्फ रस्में नहीं निभाई बल्कि उन रस्मों को जिया। जब हवा में देशभक्ति के नारे गूंजे और वंदे मातरम के स्वर आसमान की तरफ उठे तो लगा जैसे आगरा की इस जमीन पर पूरा देश सिमट आया हो। बच्चों ने देशभक्ति गीत गाए और ये गीत सिर्फ होठों तक सीमित नहीं थे उनकी आंखों में एक चमक थी वो चमक जो शायद किसी भी देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय खजाना होती है
अब यहां थोड़ा रुक कर सोचने की जरूरत है देशभक्ति क्या है क्या ये सिर्फ एक दिन नारे लगाने और झंडा फहराने तक सीमित है या फिर ये इन बच्चों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य की गारंटी में छुपी है जब ये बच्चे पूरे जोश के साथ वंदे मातरम गाते हैं तो क्या हम और आप ये सोचते हैं कि इनके सपनों का भारत कैसा होगा। क्या हम इन्हें सिर्फ एक अभियान का हिस्सा बना रहे हैं या वाकई इनके लिए एक ऐसा देश बना रहे हैं जहां इन्हें आगे चलकर अपने हक के लिए संघर्ष न करना पड़े
ये सवाल इसलिए भी जरूरी हैं क्योंकि जब आयोजन खत्म हो जाता है और तिरंगा सहेज कर रख दिया जाता है तब असली परीक्षा शुरू होती है हमारे तंत्र की हमारी व्यवस्था की। क्या ये व्यवस्था इन बच्चों के उस जोश को बचा कर रख पाएगी जो आज हर घर तिरंगा के नाम पर छलक रहा है
उम्मीदों का आसमान
खैर इस आयोजन ने विद्यालय के छात्रों और स्टाफ के बीच देशभक्ति एकता और राष्ट्रीय गौरव का एक गहरा बीज जरूर बो दिया है ये बच्चे जब तिरंगा हाथ में लेकर चलते हैं तो लगता है कि देश सही दिशा में कदम बढ़ा रहा है उम्मीद की जानी चाहिए कि इन बच्चों का जोश और इनकी आंखों में दिखने वाला देशप्रेम कभी सिस्टम की फाइलों की धूल में दबकर न रह जाएआगरा का ये विद्यालय आज भले ही इस अभियान से रोशन है लेकिन असल कामयाबी तब होगी जब इन बच्चों का भविष्य भी हर दिन तिरंगे की तरह ऊंचा और बेदाग लहराए। राष्ट्रगान और नारों के बीच पनपी ये ऊर्जा आने वाले कल के लिए एक मजबूत भारत की नींव रखे यही इस पूरे आयोजन का सबसे बड़ा हासिल होना चाहिए