UP News: स्कूल में बेटी को मच्छर ने काटा तो अमेरिका से लौटे वैज्ञानिक पिता ने खोला मोर्चा, DM को भेजी फोटो… मिला ये आश्वासन – INA

मुरादाबाद के एक नामचीन निजी विद्यालय में एलकेजी में अध्ययनरत एक मासूम छात्रा को स्कूल परिसर के भीतर बार-बार मच्छरों द्वारा काटे जाने का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है. आठ वर्षों तक अमेरिका में बतौर न्यूरोसाइंटिस्ट सेवाएं दे चुके छात्रा के पिता डॉ. सोनू सिंह ने बच्ची के शरीर पर बने मच्छरों के डंक के निशानों की तस्वीरें संलग्न करते हुए जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया को आधिकारिक ई-मेल भेजकर अपनी तीव्र चिंता दर्ज कराई है.

अभिभावक का मेल में कहना है कि प्राथमिक स्तर पर स्कूल डायरी के माध्यम से प्रबंधन को इस संबंध में सूचित किया गया था, परंतु तंत्र की उदासीनता के कारण कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप बच्ची दोबारा मच्छर जनित जोखिम का शिकार बनी है.

संपूर्ण शुल्क वसूलने के बाद भी छात्रों को स्वास्थ्यप्रद और सुरक्षित वातावरण न दे पाना निजी शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली और बच्चों की बुनियादी सुरक्षा के प्रति उनकी जिम्मेदारी पर बेहद गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. डेंगू, मलेरिया एवं चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियों के व्यापक खतरे को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर इस लापरवाही को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ लिया जा रहा है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक ऋतु तोमर ने संज्ञान लिया है और जिले भर के विद्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त करने हेतु फॉगिंग कराने की प्रशासनिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है.

अभिभावक का विरोध, जोखिम की गंभीरता

छात्रा के पिता ने अपनी शिकायत में इस बात पर विशेष बल दिया है कि यह विषय केवल एक मामूली असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि मासूम बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है. छोटे बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जिससे वे मच्छर जनित गंभीर संक्रमणों की चपेट में अति शीघ्र आ सकते हैं.

अभिभावकों का तर्क है कि वे विद्यालय प्रबंधन को भारी-भरकम शुल्क का भुगतान केवल किताबी ज्ञान के लिए नहीं, अपितु अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक कल्याण की पूर्ण सुरक्षा की आशा में करते हैं. पहली शिकायत के उपरांत भी कोई निरोधात्मक कदम न उठाया जाना प्रबंधन की आपराधिक उपेक्षा को प्रदर्शित करता है.

विद्यालय प्रबंधन की जवाबदेही पर उठे कड़े सवाल

इस संपूर्ण प्रकरण ने निजी विद्यालयों के बुनियादी ढांचे, स्वच्छता मानकों और प्रबंधन की व्यावसायिक मानसिकता की पोल खोलकर रख दी है. जब अभिभावक अपने बच्चों को कई घंटों के लिए स्कूल परिसर के सुपुर्द करते हैं, तब एक सुरक्षित, कीट-मुक्त और रोग-रहित वातावरण प्रदान करना संस्था की प्राथमिक नैतिक एवं वैधानिक जिम्मेदारी बन जाती है.

शिकायत दर्ज कराने के बाद भी स्थिति का पहले जैसी बने रहना यह दर्शाता है कि शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों की स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े बुनियादी पैमानों को लेकर कितने लापरवाह हैं. यह घटना अन्य सभी निजी शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक कड़ा सबक और सचेतक है.

फॉगिंग के कड़े दिशा-निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) ने स्पष्ट किया कि सभी विद्यालयों को परिसर में नियमित सफाई और मच्छर नियंत्रण के कड़े निर्देश पहले से जारी हैं. निजी संस्थानों को अपने स्तर पर ये सुरक्षा इंतजाम स्वतः पूरे करने होते हैं, परंतु इस लापरवाही के बाद संबंधित स्कूल को कड़ी हिदायत दी गई है.

इसके अतिरिक्त, जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) को पत्र प्रेषित कर जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों के आसपास व्यापक स्तर पर फॉगिंग अभियान चलाने का अनुरोध किया गया है, ताकि संचारी रोगों के प्रसार को समय रहते पूर्णतः रोका जा सके.

स्कूल में बेटी को मच्छर ने काटा तो अमेरिका से लौटे वैज्ञानिक पिता ने खोला मोर्चा, DM को भेजी फोटो… मिला ये आश्वासन


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