UP News: 28 साल का इंतजार खत्म… सारनाथ यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल, जानें काशी को कैसे मिला यह गौरव? – INA

Sarnath UNESCO World Heritage List: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर (World Heritage) सूची में शामिल कर लिया गया है. करीब 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिली इस उपलब्धि से काशी और पूरे देश में खुशी की लहर है. दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की 48वीं वर्ल्ड हेरिटेज समिति की बैठक में सारनाथ को शामिल करने की अंतिम मंजूरी दी गई. आइए जानते हैं कि चयन कैसे किया गया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए ट्वीट कर लिखा कि सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध है और उनका ज्ञान, करुणा और सद्भाव का संदेश पूरी दुनिया को प्रेरित करता है. उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व का पल बताया.

1998 से चल रही थी कोशिश

सारनाथ को वर्ष 1998 में यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया था. इसके बाद लगातार प्रयास होते रहे, लेकिन विभिन्न तकनीकी और दस्तावेज कमियों के कारण इसे वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में जगह नहीं मिल पा रही थी. साल 2024 के अंत से इस दिशा में नए सिरे से प्रयास शुरू हुए और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं.

अक्टूबर 2025 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (ICOMOS) की टीम ने संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ सारनाथ का तीन दिनों तक सर्वे किया. सारनाथ मोन्यूमेंट को लेकर डोजियर /डॉक्यूमेंट जैसे आधार पहले से तैयार था. जनवरी /फरवरी में ICOMOS ने सारनाथ को हेरिटेज लिस्ट में शामिल करने के लिए रेकमेंड किया.


उसके बाद कॉउन्सिल ने असेसमेंट और रिव्यू किया और फिर जाकर रिव्यू रिपोर्ट कॉउन्सिल में विचार के लिए जमा हुआ. 48th काउंसिल मीट साउथ कोरिया के शहर बुसान में 22 से 25 जुलाई तक आयोजन हुआ. 24 जुलाई को सारनाथ को लिस्ट में शामिल करने की मंजूरी दी गई और इस तरह से सारनाथ यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में शामिल हो गया.

किन मानकों पर वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में हुआ शामिल?

वाराणसी के पर्यटन विशेषज्ञ और ICOMOS के सदस्य प्रोफेसर राणा पी.बी. सिंह के अनुसार, यूनेस्को के 10 चयन मानकों में से सारनाथ ने दो प्रमुख मानकों को पूरा किया. पहला, सांस्कृतिक परंपरा की असाधारण गवाही, क्योंकि सारनाथ बौद्ध संस्कृति और परंपरा का अद्वितीय केंद्र है. दूसरा, ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराओं से प्रत्यक्ष जुड़ाव, क्योंकि दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालु अपने तीर्थ यात्रा क्रम में सारनाथ आकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. यही इसकी विशिष्ट वैश्विक पहचान है. इन्हीं मानकों पर सारनाथ को लिस्ट में शामिल किया गया.

वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल होने से क्या होगा फायदा?

वाराणसी के टूरिज्म सेक्टर से जुड़े शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से वाराणसी में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. खासकर बौद्ध देशों के साथ-साथ अमेरिका और यूरोप से भी अधिक पर्यटक यहां पहुंचेंगे. इससे स्थानीय रोजगार, होटल, ट्रैवल, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों को बड़ा लाभ मिलेगा.

इसके अलावा सारनाथ की वैश्विक ब्रांडिंग मजबूत होगी, शोध और इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और क्षेत्र का सुनियोजित विकास होगा. भविष्य में बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, हेरिटेज मोबिलिटी प्लान, हरित क्षेत्र के विस्तार और अतिक्रमण मुक्त विकास जैसी योजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है.

ये भी पढ़ें- दिल्ली, UP-बिहार में बारिश का अलर्ट, कैसा रहेगा MP-उत्तराखंड का मौसम?

28 साल का इंतजार खत्म… सारनाथ यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल, जानें काशी को कैसे मिला यह गौरव?


#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY

Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,

Back to top button