UP News: हाथ में कटोरा, बेबसी और लाचारी… गुड़िया के नाजुक कंधों पर उम्मीद की जिम्मेदारी – INA

UP News: हाथ में कटोरा, बेबसी और लाचारी… गुड़िया के नाजुक कंधों पर उम्मीद की जिम्मेदारी – INA

‘गुड़िया’ चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी है. उम्र भी सिर्फ 9 साल है, लेकिन कंधों पर जिम्मेदारी उम्र से कहीं ज्यादा थी. ये उम्र है, जब गुड़िया के हाथ में किताब होनी चाहिए थी, कलम होनी चाहिए थी, जिससे वह अपनी तकदीर लिख सके, लेकिन गुड़िया के हाथ में एक ‘कटोरा’ था. ये उस उम्मीद, बेबसी और लाचारी का कटोरा था, जो किसी के सामने गिड़गिड़ाने, आंसू बहाने के बाद भर जाए तो ठीक नहीं तो खाली रह जाता था. हालांकि 9 साल की गुड़िया अपने घर से 800 किलोमीटर दूर भीख मांग-मांग कर इसी कटोरे को भर रही थी, जिससे घर में रहने वाले उसके मां-बाप और भाई-बहन भूखे न सोएं…

ये कहानी केवल एक गुड़िया की नहीं है, बल्कि देशभर में हजारों बच्चे इसी तरह बेबस और लालाच हैं. बच्चों की इसी बेबसी और लाचारी को खत्म करने के लिए पंजाब सरकार ने ‘ऑपरेशन जीवन ज्योति- 2’ की शुरुआत की है. इस ऑपरेशन का मकसद पंजाब से भिक्षावृत्ति को जड़ से खत्म करना है. अभी इस ऑपेरशन की शुरुआत को महज सात दिन हुए हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 137 बच्चे रेस्क्यू किए जा चुके हैं. लागातार यह रेस्कियू ऑपरेशन जारी है. पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री बलजीत ने बताया कि हमारी मुहिम लगातार जारी है. भीख मांग रहे बच्चों को उनके घर तक पहुंचाना है. भीख मांगने से मुक्ति करवा कर उनको शिक्षा की ओर लेकर जाना है.

9 महीने में 367 बच्चों का रेस्क्यू

कैबिनेट मंत्री बलजीत ने बताया कि पंजाब में ‘ऑपरेशन जीवन ज्योति’ की शुरुआत का सिलसिला सितंबर 2024 से शुरू किया गया था. पहले ऑपरेशन में 9 महीने में 367 बच्चों का रेस्क्यू किया गया. बच्चो को छुड़ाने के लिए 753 जगहों पर छापेमारी की गई थी. इनमें से 350 बच्चों को उनके परिवारों को दे दिया गया था. 17 बच्चे ऐसे थे, जिनके माता-पिता नहीं मिले तो उन्हें बाल गृह में रखा गया. 159 बच्चे दूसरे राज्यों से थे. 183 बच्चे ऐसे थे, जिनको भिक्षावृत्ति से छुड़ाकर स्कूल भेजा गया.

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कैबिनेट मंत्री बलजीत ने बताया कि छह वर्ष से छोटे 13 बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजा गया. इनमें से 30 बच्चों को किसी न किसी संस्था द्वारा गोद लिया गया. इन बच्चों के खर्च के लिए संस्था द्वारा चार हजार रुपए महीना दिया जाता है. वहीं 16 बच्चों को 1500 रुपए महीना पेंशन सरकार द्वारा लगाई गई है.

रेस्क्यू किए गए 57 बच्चे हो गए लापता

कैबिनेट मंत्री बलजीत ने बताया कि तीन महीने बाद इसका फॉलोअप भी किया गया. इस दौरान हैरान कर देने वाले तथ्य सामने आए. 57 बच्चे लापता मिले, जो कि दोबारा मिले ही नहीं. यह बच्चे जाते कहां हैं, ये बड़ा सवाल था. अब हमने ‘ऑपरेशन जीवन ज्योति-2’ प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसमें हमने DNA टेस्ट जोड़ा है. इसका फायदा होगी कि आने वाले समय में कई बच्चे जो चुरा लिए जाते हैं, उनको परिवारों तक पहुंचाया जा सकेगा. साथ ही साथ उस बड़े गिरोह का पता चलेगा, जो बच्चों की तस्करी करता है. इस प्रोजेक्ट में पुलिस और NGO को भी शामिल किया गया है.

केस नंबर-1

13 बच्चे जो पंजाब के बाहर से थे, उसमें से एक राम शरण (बदला हुआ नाम) भी था, जो बिहार के गया जिले के छोटे से गांव का रहने वाले था. राम शरण को उसके माता-पिता ने भीख मांगने वालों के साथ भेज दिया था. जब ‘ऑपरेशन जीवन ज्योति’ की टीम राम शरण को छोड़ने गया पुहंची तो उसके माता-पिता ने बताया कि जिन लोगों के साथ राम शरण को भेजा था, वह उनके दूर के रिश्तेदार हैं. घर गरीबी और लाचारी में जी रहा है तो इस वजह से राम शरण को भेज दिया. राम शरण के पांच और भाई-बहन हैं. गरीबी में बच्चों का पालन-पोषण संभव नहीं है. वह लोग भी मजदूरी करते हैं.

Operation Jeevan Jyoti

केस नंबर-2

अब बात उस गुड़िया की, जो नौ साल की उम्र में भीख मांग रही थी. गुड़िया उतर प्रदेश के एक छोटे से गांव की रहने वाली है. ‘ऑपरेशन जीवन ज्योति’ की टीम ने गुड़िया के घर का पता लगाया. परिवार के पास जब टीम पहुंची तो स्थिति देख तरस आ गया. गुड़िया चार भाई-बहनों में से सबसे बड़ी है. उसको पंजाब में भीख मांगने का काम करने वाली मौसी के साथ भेजा गया था. गुड़िया के घर के हालात बेहद खराब हैं. मां खेतों में काम करती है. पिता फैक्ट्री में मजदूर हैं. अन्य तीनों बच्चे छोटे हैं, जिनकी अभी पढ़ाई नहीं चल रही है. यही वजह थी कि घर की बड़ी 9 साल की गुड़िया को परिवार का खर्च चलाने के लिए भीख मांगने मौसी के साथ भेजा गया.

(रिपोर्ट- अमनप्रीत सिंह/पंजाब)

हाथ में कटोरा, बेबसी और लाचारी… गुड़िया के नाजुक कंधों पर उम्मीद की जिम्मेदारी




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