UP News: नोएडा डीएम की सैलरी से कैसे वसूले जाएंगे 5 लाख रुपए? हाई कोर्ट फैसले के बाद समझिए नियम – INA

नोएडा की डीएम मेधा रूपम से जुड़ा एक हाई कोर्ट का आदेश इन दिनों चर्चा में है. मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी की NSA यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हुई हिरासत से जुड़ा है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति की हिरासत को रद्द कर दिया और उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. दरअसल, ये सारा मामला अप्रैल में हुए मजदूरों के वेतन और काम की परिस्थितियों को लेकर प्रदर्शन के बाद से शुरू हुआ.

इलाहाबाद हाई कोर्ट की के फैसले के बाद सबसे ज्यादा चर्चा आकृति को दिए जाने वाला 5 लाख रुपये का मुआवजे का ये पैसा सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि उस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूला जाएगा. कोर्ट ने नोएडा की डीएम मेधा रूपम और मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों, जिसमें संबंधित SHO भी शामिल है, से इस रकम की वसूली का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में भी अदालत की नाराजगी दर्ज करने का आदेश दिया है.

सैलरी से पैसा कटता कैसे है?

अब सवाल उठता है कि अगर किसी सरकारी अधिकारी से लाखों रुपये की वसूली करनी हो तो उसकी सैलरी से पैसा आखिर कटता कैसे है? क्या पूरी रकम एक साथ काट ली जाती है या हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा काटा जाता है? इन सवालों को समझने के लिए दो अलग चीजों को समझना जरूरी है. पहली, हाई कोर्ट का मौजूदा आदेश, जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से मुआवजे की वसूली की बात कही गई है. दूसरी, वेतन से जुड़े सामान्य कानूनी नियम, जिनमें CPC की धारा 60(1)(i) और आदेश 21 नियम 48 जैसे प्रावधान आते हैं.

क्या है ये पूरा मामला?

  • आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 के नोएडा मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था.
  • बाद में उन पर NSA लगाया गया और वह करीब पांच महीने हिरासत में रहीं.
  • हाई कोर्ट को NSA लगाने के लिए पर्याप्त और ठोस सामग्री नहीं मिली.
  • कोर्ट ने हिरासत को रद्द कर 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.
  • कोर्ट ने रकम की वसूली जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से करने को कहा.

आकृति चौधरी को क्यों किया गया था गिरफ्तार?

अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों ने वेतन, ओवरटाइम और दूसरी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था. इसी आंदोलन से जुड़े मामलों में आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया. पुलिस और प्रशासन की तरफ से उन पर आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने जैसे आरोप लगाए गए. इसके बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगाया गया. मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने हिरासत के आधार और प्रशासन की ओर से पेश सामग्री की जांच की.

Akriti Chaudhary Nsa Case

कोर्ट ने NSA की हिरासत को रद्द कर दिया

जांच में कोर्ट ने पाया कि NSA जैसी कड़ी कार्रवाई के लिए जिस तरह के ठोस आधार की जरूरत होती है, वह पर्याप्त रूप से सामने नहीं आए. अदालत ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकारों के दायरे में आता है. इसी आधार पर अदालत ने NSA की हिरासत को रद्द कर दिया. इसके साथ ही आदेश दिया कि इस मामले के जिम्मेदार अधिकारी आकृति को 5 लाख रुपये का मुआवजा देंगे.

अधिकारियों की सैलरी से पैसा कैसे कट सकता है?

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद से जो बात ज्यादा चर्चा में है, वो ये है कि आखिर सैलरी की कटौती किस तरह से होगी. आम तौर पर किसी सरकारी कर्मचारी के वेतन से रकम काटने के लिए संबंधित विभाग के स्तर पर आदेश और तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है. अगर अदालत वेतन की अटैचमेंट का आदेश देती है तो CPC में इसके लिए प्रावधान मौजूद हैं. CPC की धारा 60(1)(i) के तहत सामान्य पैसा देने की स्थिति में वेतन का एक बड़ा हिस्सा अटैचमेंट से सुरक्षित रहता है.

पहले सरकारी खजानों में जमा होगा पैसा

आईएएस की सर्विस रूल्स 6 (1) 3) में इसका जिक्र है. किसी भी आईएएस के अनुशासनहीनता मामले में रिकवरी वसूली जा सकती है. CPC (Code OF Civil Procedure) Section 60(1)(i) के तहत सैलरी के 2 तिहाई हिस्से को अटैच नहीं किया जा सकता है, यानी उसे वसूला नहीं जा सकता है. इसे अगर एक उदाहरण के तौर पर समझा जाए, तो अगर नोएडा डीएम की सैलरी 3 लाख है, तो सिर्फ 1 तिहाई यानी 1 लाख रुपए ही एक बार सैलरी से काटा जा सकता है. सरकार के आदेश पर सैलरी काटने वाला विभाग CPC 48 के तहत पैसों को काटकर सरकारी खजानों में जमा करता है. यहां से फिर कोर्ट आदेश के मुताबिक उस पैसे को पीड़ित को दिया जाता है.

IAS अधिकारी की सैलरी कितनी होती है?

अब इसी बीच ये सवाल भी सामने आ रहा है कि आखिर जिला मजिस्ट्रेट यानी DM की तनख्वाह कितनी होती है, क्योंकि वो एक IAS अधिकारी होता है. 7वें वेतन आयोग के तहत कलेक्टर/DM की बेसिक सैलरी अधिकारी के स्तर के अनुसार अलग-अलग होती है. एक सामान्य लेवल-12 अधिकारी की बेसिक पे 78,800 रुपये से 1,84,000 रुपये तक होती है, जबकि सीनियर ऑफिसर के लिए लेवल-13 और लेवल-14 की पे-स्केल लागू हो सकती है. बेसिक पे, DA, दूसरी सुविधाएं और सरकारी आवास जैसी चीजें अलग-अलग होती हैं.

Ias Salary Detail

5 लाख रुपये का मुआवजा क्यों?

कोर्ट का कहना था कि आकृति को जिस तरह NSA के तहत हिरासत में रखा गया, उसमें प्रशासन की कार्रवाई में गंभीर कमी थी. अदालत ने इसे सामान्य सरकारी गलती की तरह नहीं देखा. इसी वजह से उसने 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया और यह भी कहा कि इसकी भरपाई उन अधिकारियों से की जाए जो इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार थे. कोर्ट ने जिम्मेदार ऑफिसरों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की दिशा में आदेश दिया है. साथ ही उनके सर्विस रिकॉर्ड में कोर्ट की नाराजगी दर्ज करने को भी कहा गया है.

नोएडा डीएम की सैलरी से कैसे वसूले जाएंगे 5 लाख रुपए? हाई कोर्ट फैसले के बाद समझिए नियम


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