UP News: ‘यह सिर्फ एक संस्थान नहीं, हमारी तालीम का सवाल है’, जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर बोले ओवैसी – INA

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी शनिवार (18 जुलाई) को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सरकार मुसलमानों की तालीम को निशाना बना रही है
मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि यह सिर्फ एक यूनिवर्सिटी का मामला नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज की शिक्षा और भविष्य से जुड़ा सवाल है. उन्होंने कहा कि अगर संस्थान को नुकसान पहुंचाया जाता है तो इसका सीधा असर हजारों छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी तोड़ा जा रहै है ताकि मुसलमान पढ़ न पाएं.
‘यह मुसलमानों की शिक्षा से जुड़ा मामला है’
सांसद ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा सिर्फ एक संस्थान का नहीं, बल्कि यह मुसलमानों की शिक्षा से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में करीब 19-20 प्रतिशत मुसलमानों की आबादी है, लेकिन सिर्फ 3.5 से 3.7 प्रतिशत मुसलमान ही ग्रेजुएट हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में मुस्लिम समुदाय की साक्षरता दर भी करीब 53-54 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं में यह और भी कम है.
‘यूनिवर्सिटी तोड़ने से छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा’
उन्होंने कहा कि अगर जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतों को तोड़ा जाता है तो इससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा. उन्होंने कहा कि अगर आप यूनिवर्सिटी को खत्म करना चाहते हैं, तो इसका मतलब है कि आप नहीं चाहते कि मुसलमान शिक्षित हों. उन्होंने कहा कि यह शिक्षा पर सीधा हमला है.
‘समाधान नियमों के तहत निकाला जा सकता है’
ओवैसी ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी में करीब 3,000 छात्र पढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसी तरह की कानूनी या प्रशासनिक दिक्कत है तो उसे नियमित (रेगुलराइज) किया जा सकता है, उसका समाधान नियमों के तहत निकाला जा सकता है, लेकिन छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की तरक्की की सबसे मजबूत नींव होती है और सरकारों का दायित्व शैक्षणिक संस्थानों को मजबूत करना है, न कि उन्हें विवादों में उलझाकर छात्रों का भविष्य प्रभावित करना.
विधायकों की भूमिका पर क्या बोले ओवैसी
वहीं विधायकों की भूमिका पर पूछे गए सवाल पर ओवैसी ने कहा कि AIMIM का मकसद समाज में स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व तैयार करना है. उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ संख्या का नहीं है, बल्कि यह है कि जनप्रतिनिधि कितने स्वतंत्र हैं और क्या वो अपने जमीर की आवाज खुलकर उठा सकते हैं. उन्होंने कहा कि सिर्फ विधानसभा या संसद में संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों में अपनी बात बेबाकी से रखने की हिम्मत भी होनी चाहिए.
डॉ. भीमराव अंबेडकर का किया जिक्र
इस दौरान AIMIM प्रमुख ने डॉ. भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे भी कभी ऐसा ही जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल पूछा गया था. ओवैसी के अनुसार, बाबा साहब ने उस समय जवाब दिया था कि कुछ लोग सिर्फ अपना मुंह अंगड़ाई लेने के लिए खोलते हैं, वो सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए ही बोलते हैं. उन्होंने कहा कि बाबा साहब की यह टिप्पणी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है. यह आज भी राजनीतिक व्यवस्था पर लागू होती है. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने जमीर की आवाज सुनकर जनता के मुद्दे उठाने चाहिए.
आजाद अधिकार सेना की मांग
इधर आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने डीएम रामपुर और रामपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को भेजा पत्र है. उन्होंने समान कानून और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि अगर निर्माण में अनियमितता है तो विधि सम्मत कार्रवाई हो, लेकिन वही मानदंड पूरे प्रदेश में समान रूप से लागू हों. उन्होंने कहा कि सालों से अवैध निर्माण रहा तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो.
अमिताभ ठाकुर ने ध्वस्तीकरण की स्थिति में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य निर्दोष हितधारकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि पूरी कार्रवाई में पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर दिया. उन्होंने मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव (आवास) को भी पत्र की प्रति भेजी है और प्रदेश के सभी समान निर्माण मामलों में एक समान, पारदर्शी और समयबद्ध प्रवर्तन नीति लागू करने की मांग की है.
सुधीर नामदेव की रिपोर्ट
इनपुट-सफी अहमद
‘यह सिर्फ एक संस्थान नहीं, हमारी तालीम का सवाल है’, जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर बोले ओवैसी
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