UP News: कोर्ट को गुमराह करना वकीलों को पड़ा भारी, इलाहाबाद HC ने दिए आपराधिक कार्रवाई के निर्देश – INA

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कोर्ट को गुमराह कर आदेश हासिल करने के मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाया है. बरेली विकास प्राधिकरण की ओर से दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने माना कि पहले पारित आदेश धोखाधड़ी और भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किया गया था. इसके चलते अदालत ने 24 मई 2024 के आदेश को निरस्त कर दिया. यह मामला भूमि अधिग्रहण मुआवजे पर ब्याज भुगतान से जुड़ा था.
दरअसल, अदालत के सामने यह तथ्य आया कि मूल अवॉर्ड की टाइप की गई कॉपी में ऐसे ब्याज का उल्लेख जोड़ दिया गया था, जो वास्तविक अवॉर्ड में मौजूद ही नहीं था. इसी आधार पर पहले की पीठ ने 9 प्रतिशत और उसके बाद 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश पारित किया था. बाद में रिकॉर्ड की जांच में यह अंतर सामने आने पर बरेली विकास प्राधिकरण ने समीक्षा याचिका दाखिल की.
‘कोर्ट को भ्रमित करने का सुनियोजित प्रयास’
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह केवल टाइपिंग की गलती नहीं बल्कि कोर्ट को भ्रमित करने और अनुचित लाभ लेने का सुनियोजित प्रयास था. अदालत ने संबंधित अधिवक्ताओं की दलीलों और माफी की मांग को भी खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार का आचरण न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा आघात है.
वकीलों के लाइसेंस रद्द करने पर विचार करने के निर्देश
कोर्ट ने बरेली विकास प्राधिकरण को निर्देश दिया कि पहले आदेश के आधार पर लाभार्थियों को जो अतिरिक्त राशि दी गई है, उसकी राजस्व बकाया की तरह वसूली की जाए. साथ ही रजिस्ट्रार जनरल को संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 340 के तहत कार्रवाई शुरू करने और भारतीय दंड संहिता की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए. इसके अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिल से भी अधिवक्ताओं के लाइसेंस रद्द करने पर विचार करने के लिए शिकायत भेजने का आदेश दिया गया है.
अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि वकालत एक सम्मानित पेशा है, लेकिन अगर न्यायालय को गुमराह करने जैसी प्रवृत्तियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो इससे गलत संदेश जाएगा. इसलिए ऐसे मामलों में सख्ती बरतना न्याय व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी है.
ये भी पढ़ें: गोरखपुर जेल से पॉक्सो आरोपी फरार, जेलर सहित 5 सस्पेंड; कई टीमें तलाश में जुटीं
कोर्ट को गुमराह करना वकीलों को पड़ा भारी, इलाहाबाद HC ने दिए आपराधिक कार्रवाई के निर्देश
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,