UP News: Noida Protest: पहले से था हिंसा का अंदेशा, फिर क्यों चूक गया नोएडा प्रशासन? DM की अपील तक रही बेअसर – INA

Noida Protest: पहले से था हिंसा का अंदेशा, फिर क्यों चूक गया नोएडा प्रशासन? DM की अपील तक रही बेअसर

Noida News: औद्योगिक नगरी नोएडा में मजदूरों का आंदोलन एक बड़े विवाद और प्रशासनिक विफलता की कहानी बनता जा रहा है. वेतन वृद्धि और श्रमिक अधिकारों की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विरोध धीरे-धीरे उग्र रूप ले बैठा. सबसे बड़ी बात यह है कि हिंसा की आशंका पहले से जताई जा रही थी, इसके बावजूद प्रशासन समय रहते हालात को संभालने में नाकाम रहा, जिससे अब पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

गौतम बुद्ध नगर केके औद्योगिक सेक्टर में मजदूर बीते कई दिनों से वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. शुरुआत में यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था. मजदूर फैक्ट्री के बाहर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे और प्रशासन से संवाद की उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ, वैसे-वैसे उनका आक्रोश बढ़ता चला गया.

12 से ज्यादा गाड़ियां फूंकी, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

13 अप्रैल यानी सोमवार को हालात अचानक बिगड़ गए और मजदूरों का प्रदर्शन उग्र हो गया. कई जगहों पर आगजनी और पथराव की घटनाएं भी सामने आईं. नोएडा फेस-टू इलाके में प्रदर्शनकारी मजदूरों ने उन फैक्ट्री को निशाना बनाया, जो उस समय खुली हुई थीं. सड़कों पर हंगामा, तोड़फोड़ और अफरातफरी का माहौल बन गया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा.

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इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा कि जब प्रशासन को पहले से हिंसा की आशंका थी तो समय रहते कोई कदम क्यों नहीं उठाए गए? दरअसल, एक दिन पहले ही DM मेधा रूपम ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो जारी कर लोगों से अफवाहों से दूर रहने और शांति बनाए रखने की अपील की थी. उन्होंने यह भी कहा था कि प्रशासन श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन उनकी यह अपील जमीन पर असर नहीं दिखा सकी.

DM मेधा रूपम ने बनाई गाइडलाइन

DM मेधा रूपम ने अपने संदेश में यह भी बताया कि सरकार श्रमिकों के हित में कई कदम उठा रही है. नए श्रम कानून के तहत न्यूनतम वेतन की गारंटी, समय पर वेतन भुगतान, समान कार्य के लिए समान वेतन, ओवर टाइम पर दोगुना भुगतान, सुरक्षित कार्यस्थल और साप्ताहिक अवकाश जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं. इसके अलावा ईपीएफ, ईएसआई और असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना को भी लागू किया जा रहा है.

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DM मेधा रूपम के आश्वासन के बाद भी मजदूरों का असंतोष काम नहीं हुआ. प्रदर्शन के दौरान यह भी आप सामने आया कि पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह फेल रहा. प्रशासन द्वारा बार-बार अपील किए जाने के बावजूद भी पुलिस को यह अंदाजा नहीं लग सका कि प्रदर्शन अचानक उग्र हो जाएगा. कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से बैठे थे, लेकिन पुलिस ने अचानक लाठीचार्ज शुरू कर दिया, जिससे हालात और बिगड़ गए.

DGP ने लखनऊ से रखी हर स्थिति पर नजर

प्रदर्शन के दौरान पुलिस के उच्च अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे. लखनऊ स्थित मुख्यालय से पूरे घटनाक्रम की मॉनिटरिंग की जा रही थी. DGP और ADG स्तर के अधिकारी कंट्रोल रूम से पल-पल की जानकारी ले रहे थे. फिलहाल प्रदर्शन के दौरान उपद्रव करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. प्रशासन ने मजदूरों को भरोसा दिलाने की कोशिश की.

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प्रशासन ने कहा कि किसी भी श्रमिक को अनावश्यक रूप से नौकरी से नहीं निकल जाएगा. ओवर टाइम का भुगतान दोगुनी दर से किया जाएगा. साप्ताहिक अवकाश भी सुनिश्चित किया जाएगा. साथ ही बोनस और अन्य सुविधाएं भी समय पर देने का आश्वासन दिया गया. फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती हालात को सामान्य करना और दोबारा ऐसी स्थिति न बनने देना है. यह घटना साफ संकेत देती है कि अगर समय रहते संवाद और समाधान निकाला गया होता तो छोटे स्तर पर शुरू होने वाला आंदोलन, बड़ा रूप नहीं ले पाता.

Noida Protest: पहले से था हिंसा का अंदेशा, फिर क्यों चूक गया नोएडा प्रशासन? DM की अपील तक रही बेअसर


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