UP News: यूपी से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए क्या है प्लान? सरकार ने संसद में दिया जवाब – INA

दिल्ली, मुंबई जैसे राज्यों में रोजगार की तलाश में उत्तर प्रदेश से लंबे समय से पलायन होता रहा है. यह एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन गया है. अब इसको लेकर लोकसभा में एक सवाल के जवाब में श्रम मंत्रालय ने बताया कि अपने ही राज्य में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही हैं. इसके अलावा मंत्रालय ने यह भी बताया कि जो मजदूर दूसरे राज्यों में काम करते हैं, उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई कानूनी प्रावधान किए गए हैं.
उत्तर प्रदेश से मजदूरों का पलायन क्यों होता है?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है. राज्य के कई जिलों, विशेषकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर उद्योगों और रोजगार के अवसर आबादी के लिहाज से कम है. ऐसे में दूसरे राज्यों में यहां से बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में जाते हैं. फिर वहां, निर्माण, फैक्ट्री, परिवहन, होटल, कृषि और सेवा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के लाखों श्रमिक काम करते हैं.
यूपी से पलायन रोकने के लिए केंद्र सरकार किन योजनाओं पर काम कर रही है?
रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र) से सांसद छोटेलाल ने लोकसभा में पूछा कि सरकार उत्तर प्रदेश से पलायन रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है. इसपर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर कई ऐसी योजनाएं चला रही है,जो उनके क्षेत्र में ही उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं.
- विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)
- दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDU-GKY)
- ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI)
- पीएम स्वनिधि योजना
- दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM)
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
- पीएम विश्वकर्मा योजना
- प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
- प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY)
नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पलायन रोकने लिए कैसे मदद कर रहा है?
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने यह भी बताया कि सरकार की तरफ से लोगों को उनके क्षेत्र में जॉब के अवसर उपलब्ध कराने के लिए नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल भी चला रहा है. यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां निजी और सरकारी नौकरियों की जानकारी, ऑनलाइन और ऑफलाइन रोजगार मेले, करियर काउंसिलिंग, नौकरी की तलाश, स्किल डेवलपमेंट और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी एक ही जगह मिलती है. श्रम मंत्रालय का कहना है कि इस पोर्टल के जरिए युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिल सकते हैं और पलायन कम करने में काफी मदद मिल सकती है.
योगी सरकार कौन-कौन से कदम उठा रही है?
लोकसभा में दिए गए जवाब में श्रम मंत्रालय की तरफ से यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार की कई पहलों का भी जिक्र किया गया है.
- वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना
- विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना
- कौशल विकास एवं कौशल उन्नयन कार्यक्रम
- रोजगार मेले
- न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि
- सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
- भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (BoCW) बोर्ड में श्रमिकों का पंजीकरण
- पंजीकृत श्रमिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व और पेंशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना
दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूरों के लिए क्या सुरक्षा है?
सरकार ने बताया कि अंतरराज्यीय प्रवासी मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए पहले इनर स्टेट माइग्रेंट वर्कमेन एक्ट 1979 लागू था. अब इसे ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडिशंस कोड में शामिल किया गया है. इस कानून के तहत प्रवासी मजदूरों को कई अधिकार दिए गए हैं, जैसे सुरक्षित और बेहतर कार्यस्थल न्यूनतम मजदूरी, टोल-फ्री हेल्पलाइन
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन) का लाभ, साल में एक बार यात्रा भत्ता, ESIC और EPFO जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, जिस संस्थान में वे काम करते हैं, वहां नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं जैसे अधिकार दिए गए हैं.
क्या इन योजनाओं से पलायन रुकेगा?
श्रम मंत्रालय का कहना है कि अगर स्थानीय स्तर पर रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे, तो मजदूरों को दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम पड़ेगी. हालांकि, संसद में दिए गए जवाब में सरकार ने यह नहीं बताया कि उत्तर प्रदेश से हर साल कितने मजदूर पलायन करते हैं. इन योजनाओं के कारण पलायन में कितनी कमी आई है. फिलहाल, उत्तर प्रदेश मेंमजदूरों का पलायन केवल रोजगार का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास से जुड़ा मुद्दा भी है. प्रदेश में जितना विकास
यूपी से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए क्या है प्लान? सरकार ने संसद में दिया जवाब
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