UP News: आपके राज में बेटियां इतनी असुरक्षित क्यों? जानें गाजीपुर घटना को लेकर राहुल-प्रियंका और अखिलेश ने क्या-क्या कहा – INA

उत्तर प्रदेश में गाजीपुर की घटना पर सियासत तेज हो गई. विपक्ष इस घटना को लेकर योगी सरकार को घेरने में जुट गया है. सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने जहां इस घटना को लेकर 29 अप्रैल को गाजीपुर जाने का ऐलान किया है तो वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर बड़ा हमला बोला है. दोनों नेता अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर योगी सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं.

कहा जा रहा है कि गाजीपुर की इस घटना की तुलना हाथरस से की जाने लगी और अब लड़ाई अगड़ा बनाम पिछड़ा की बनाने की कोशिश है. आत्महत्या और हत्या के बीच झूल रही इस वारदात में कैसे सियासी रंग भरा जा रहा है, यह बताने से पहले आपको इस वारदात के बारे में जानकारी देते हैं. दरअसल,14 अप्रैल की देर रात नाबालिक नेहा विश्वकर्मा अपने घर से गायब हुई और रात करीब 2:00 बजे के आसपास गांव से ही कुछ दूरी पर लगे हुए सीसीटीवी कैमरे में उसका अकेले जाते हुए भी देखा गया है. इस दौरान कुछ घंटे के बाद उसने अपने पिता को फोन कर कुछ बातें भी कही थी. लेकिन, जब पिता ने दोबारा उस पर फोन किया तो बात नहीं हो पाई और उसके कुछ देर के बाद सुबह करीब 5 बजे यानी 15 अप्रैल को उसके पिता को डूबने की जानकारी पीआरवी 112 के माध्यम से प्राप्त हुई.

आत्महत्या की आशंका के बाद हत्या का केस दर्ज

बताया जाता है कि जब परिवार के लोग जमानिया गंगा पुल के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उनकी बेटी मृत अवस्था में थी. फिर उस शव को निकाल कर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा था. पुलिस ने डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमॉर्टम कराया. उस लड़की के पिता भी वंहा मौजूद रहे. बकायदा पूरी पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई. शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आपसी प्रेम-प्रसंग का मामला माना और मौत को आत्महत्या माना. लेकिन, पुलिस ने पिता की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

आरोपी के जेल जाने के बाद सियासत शुरू

इसके बाद घटना को लेकर सियासत की शुरुआत होती है. 20 अप्रैल को सपा, भीमा आर्मी और आाद समाज का जिला लेवल का प्रतिनिधिमंडल एसपी और डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन कर संबंधित थाने के इंस्पेक्टर को हटाने की मांग की. इस बीच अखिलेश यादव ने 21 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गाजीपुर में सपा का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा की. 22 अप्रैल को समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पूरे दल बल के साथ कटरिया गांव पहुंचा. इसके बाद वंहा बवाल हो गया. पुलिस के सामने जमकर पत्थरबाजी हुई. सपा नेता और पुलिसकर्मी पत्थरबाजी में घायल हुए. 24 अप्रैल को अखिलेश यादव ने एक प्रेस-कॉन्फ्रेंस की और कहा कि यह सामंतवादी घटना है. इस मुद्दे पर बड़ा कदम उठाएंगे. देर शाम तक 29 अप्रैल को गाजीपुर जाने की घोषणा भी कर दी.

अखिलेश के ऐलान के बाद पुलिस अधिकारी हुए एक्टिव

अखिलेश यादव के ऐलान के बाद आनन-फानन में प्रशासनिक अमला खासकर पुलिस विभाग काफी एक्टिव मोड में आ गया. पीड़ित परिवार से मिलने आईजी वाराणसी पीयूष मोरडिया और डीआईजी वाराणसी वैभव कृष्ण पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की. इस दौरान दोनों अधिकारियों ने बताया कि इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाई जाने का कार्य किया जाएगा और सभी दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी. घटना को लेकर बीजेपी के दिवंगत विधायक कृष्णानंद राय के बेटे ने वीडियो जारी कर अखिलेश पर सवाल खड़ा किया. दिवंगत कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय ने हाथ जोड़ कर अखिलेश यादव से अपील करते हुए कहा, मौत पर गिद्ध की राजनीति न करें.

अखिलेश ने पुलिस और सरकार पर साधा निशाना

इसके बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट आता है. अखिलेश यादव ने एक वीडियो पोस्ट कर लिखा कि वर्चस्ववादी कब समझेंगे गरीब के जीवन का भी महत्व होता है. किसी की भी जान की कीमत कभी पैसा नहीं हो सकता. इस बात की जांच हो कि भाजपा के ये कौन लोग हैं जो समझाने के नाम पर दबाव बना रहे हैं और वो भी पुलिस की साक्षात उपस्थिति में.

इसकी भी जांच हो कि हत्या के मामले में कौन पुलिसवाले सक्रिय होकर पीड़ित पक्ष को एक तरह से धमका रहे हैं और पीड़ित पक्ष का साथ देने वालों पर ही झूठे मुकदमे लगा रहे हैं. ये घोर अत्याचार है. इस तरह से पीडीए समाज की एक जान के बदले पैसे देने की सौदेबाजी एक हत्या के बाद एक और मानसिक हत्या है. न्याय हो!

सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं: राहुल गांधी

इसके साथ ही राहुल गांधी ने भी एक्स पर पोस्ट कर हमला बोला. राहुल ने लिखा- “उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में विश्वकर्मा समाज की एक बेटी के साथ बलात्कार और निर्मम हत्या- और फिर परिवार को FIR दर्ज कराने से रोकने के लिए धमकियां, हिंसा. हाथरस, कठुआ, उन्नाव और आज गाजीपुर – यह एक पैटर्न है. मणिपुर की बेटी ने न्याय की राह देखते-देखते दम तोड़ दिया. हर बार वही चेहरा – पीड़िता दलित, पिछड़ी, आदिवासी, गरीब. हर बार वही सच्चाई – अपराधी को संरक्षण, पीड़ित को प्रताड़ना.

राहुल ने आगे लिखा, हर बार वही चुप्पी – सत्ता की, जिन्हें बोलना चाहिए था. जिस देश और प्रदेश में मां-बाप को अपनी बेटी की FIR लिखवाने के लिए भीख मांगनी पड़े, उस देश की सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं. दोषी पुलिस अफसरों पर कार्रवाई हो, परिवार को सुरक्षा मिले – उच्च स्तरीय जांच हो और तुरंत न्याय मिले. मोदी जी, मुख्यमंत्री जी जवाब दीजिए – आपके राज में बेटियां इतनी असुरक्षित क्यों हैं? ऐसे हालात में न्याय मांगा नहीं, छीना जाता है – और हम छीनकर लाएंगे.

महिलाओं को लेकर पीएम की बड़ी-बड़ी बातें सिर्फ दिखावा

प्रियंका गांधी ने भी एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा है. प्रियंका लिखती है -गाजीपुर, उत्तर प्रदेश में एक लड़की की हत्या के मामले में पहले केस दर्ज होने में आनाकानी, फिर पीड़ित परिवार को धमकियां मिलना और दबंगों द्वारा अराजकता फैलाना यह दिखाता कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार चरम पर है. भाजपा राज में अब यही अघोषित कानून बन गया है कि जब भी किसी महिला पर अत्याचार होता है तो पीड़ित को ही और प्रताड़ित किया जाता है.

महिलाओं को लेकर प्रधानमंत्री जी की बड़ी-बड़ी बातें सिर्फ दिखावा हैं. उन्नाव हो, हाथरस हो, प्रयागराज हो या गाजीपुर, जहां भी महिलाओं के साथ अन्याय हुआ, भाजपा अपनी पूरी सत्ता के साथ पीड़िता के खिलाफ, अत्याचारी के साथ खड़ी हो गई. देश भर की महिलाएं ये अंधेरगर्दी देख रही हैं.

इस घटना को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने

जाहिर है अखिलेश यादव, राहुल और प्रियंका इसे सियासी रंग देने की कोशिश कर रहें है. इससे सरकार की परेशानी बढ़ गई है. 28 और 29 अप्रैल को पीएम यूपी में रहेंगे. ऐसे समय मे जब बंगाल में चुनाव है और बीजेपी महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को घेर रही है, विपक्ष इस मुद्दे को उठा कर बीजेपी को घेरने को कोशिश कर रहा है. विपक्ष का आरोप है कि लड़की की पीएम रिपोर्ट प्रशासन ने सरकार के दबाव बदलवा दी है. हत्या और रेप के मामले को आत्महत्या में तब्दील कर दिया है. मृतक के पिता भी इसे रेप करके हत्या की बात कर रहें. पहले पुलिस इसे आत्महत्या मान रही थी. लेकिन बाद में हत्या के एंगल की भी जांच की और केस दर्ज कर एक आरोपी को जेल भेज दिया. दूसरे की तलाश कर रही है.

पुलिस का पक्ष- सब रिकॉर्ड में दर्ज

एसपी ई राजा ने बताया कि लड़की और लड़के के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था. थोड़े दिन पहले शिकायत आई थी और समझाया गया था. लड़की की शादी राजस्थान में तय कर दी गई थी. शायद यह भी हो सकता है की लड़की ने इस वजह से आत्महत्या की हो. क्योंकि 14 की रात को लड़की जब घर से निकली तो अकेली थी. सीसीटीवी फुटेज में वो अकेली दिखी. जबकि लड़का गांव में ही था उसका लोकेशन में गांव में मिला. उसी दिन लड़का और लड़की के बीच में बातचीत भी नहीं हुई थी. लड़की की सिर्फ परिवार के लोगों से बात हो रही थी. इसके बाद पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी कि हमारी लड़की ने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली है. ये सब पुलिस की रिकॉर्ड में दर्ज है.

पंकज चतुर्वेदी
पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी पिछले 11 साल से देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुवात हुई.

दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अदंर की खबर को बाहर लाने का हुनर के साथ ही यूपी के ब्यूरोकेसी में खास पकड़ रखते हैं.

इनकी पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही आप तक पहुंचाना है.

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