UP News: आपका अधिकारी SC के साथ ‘लुका-छिपी’ क्यों खेल रहा है? जानें क्यों यूपी पुलिस पर भड़के जज – INA

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के नोएडा हेट क्राइम मामले में उत्तर पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मामले के जांच अधिकारी का रवैया बहुत बेकार है. साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा “आपका जांच अधिकारी SC के साथ ‘लुका-छिपी’ क्यों खेल रहा है?” कोर्ट यूपी पुलिस के हलफनामे से बिल्कुल संतुष्ट नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 16 फरवरी को राज्य की ओर से बताया गया था कि शिकायत के आधार पर धारा 153-बी और 295-ए के तहत केस दर्ज होना चाहिए था, लेकिन अब भी 153-बी नहीं जोड़ी गई है. इस पर बेंच ने असंतोष जताते हुए कहा कि दाखिल अनुपालन हलफनामा संतोषजनक नहीं है. जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से पूछा कि एफआईआर में आईपीसी की धारा 153-बी क्यों नहीं जोड़ी गई. यह धारा राष्ट्रीय एकता के खिलाफ बयानबाजी से संबंधित है, जबकि धारा 295-ए धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामलों में लागू होती है.

राज्य के अनुरोध पर दिया दो हफ्ते का समय

सुनवाई के दौरान ASG ने बताया कि ट्रायल कोर्ट ने आगे की जांच की अनुमति दे दी है और पुलिस जरूरी धाराएं जोड़ देगी. हालांकि याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि धारा 153-बी को फिर से हटा दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारी को तलब करने की बात कही, लेकिन राज्य के अनुरोध पर दो हफ्ते का समय दिया है. साथ ही कहा है कि वह अपनी गलती को सुधार ले. वहीं अपनी याचिका में गौतमबुद्धनगर के कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है. इन पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने का आरोप है.

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यूपी सरकार से कहा कि अपने अधिकारियों को सलाह दें, वरना वे मुश्किल में पड़ेंगे. हमें उन्हें बुलाकर फटकार लगाने में कोई रुचि नहीं है.

4 जुलाई 2021 को सेक्टर 37 में हुई थी घटना

बताया जाता है कि यह मामला 4 जुलाई 2021 को नोएडा में कथित हेट क्राइम से जुड़ा है. दिल्ली के रहने वाले शिकायकर्ता एक शादी में अलीगढ़ गए थे. रास्ते में नोएडा के सेक्टर 37 में उनके साथ घटना हुई. उनकी दाढ़ी और मुस्लिम पहचान के कारण उसके साथ मारपीट की गई. इसके अलावा गाली-गलौज और उत्पीड़न किया गया.

पीयूष पांडे
पीयूष पांडे

प्रमुखत: सुप्रीम कोर्ट, वित्त मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग की खबरों की जिम्मेदारी. पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर और आज में सेवाएं दीं. खबरिया चैनल और अखबार के अलावा दैनिक भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म में जिम्मेदारी निभाई, जबकि ऑल इंडिया रेडियो के आमंत्रण पर कई विशिष्ट जनों के साक्षात्कार किए.

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