World News: 2 साल तक युद्ध लड़ने की क्षमता, पाताल में ईरान की असली ताकत, अमेरिका-इजराइल के लिए कम नहीं मुश्किलें – INA NEWS

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की मिसाइल ताकत को लेकर सामने आ रही नई जानकारियों ने अमेरिका की चिंता को बढ़ा दिया है. कई मीडिया रिपोर्टस में ईरान ने दावा करते हुए मिसाइल बेस के कई वीडियो और विजुअल्स जारी किए हैं. जिसमें ऐसे अंडरग्राउंड मिसाइल बेस दिखाई दे रहे हैं, जो जमीन की गहराइयों और पहाड़ों के भीतर बनाए गए हैं. अमेरिका और इजरायल की एजेंसियों के लिए इनका पता लगाना मुश्किल हो रहा है. वो हमले तो कर रहे हैं लेकिन ईरानी मिसाइल के ठिकानों को उतनी रफ्तार से ध्वस्त नहीं कर पा रहे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक ईरान के कुल मिसाइल भंडार का केवल लगभग एक-तिहाई हिस्सा ही नष्ट किया जा सका है, जबकि बड़ी संख्या में हथियार अब भी सुरक्षित ठिकानों पर मौजूद हैं. ऐसे में ईरान की मिसाइल सिटी और अंडरग्राउंड नेटवर्क ने यह साफ कर दिया है कि यह संघर्ष केवल खुले मैदान की लड़ाई नहीं, बल्कि तकनीक, रणनीति और छुपाव की जंग भी है. इन हालातों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने रणनीतिक चुनौती और गहरी होती दिख रही है. एक तरफ ईरान की छिपी सैन्य क्षमता, तो दूसरी ओर वैश्विक दबाव दोनों मिलकर अमेरिकी नीति को कठिन मोड़ पर ले आए हैं.
70% मिसाइल अब भी इस्तेमाल नहीं- ईरान का दावा
ईरान के सांसद मालेक शारियाती का दावा है कि तीन हफ्तों की जंग के बावजूद देश ने अब तक अपने करीब 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार का इस्तेमाल ही नहीं किया है. वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ब्रिगेडियर जनरल आमिर अली हाजीजादेह के अनुसार, ईरान के पास इतने मिसाइल बेस और हथियार हैं कि अगर हर हफ्ते उनका खुलासा किया जाए, तो भी दो साल तक यह सिलसिला जारी रह सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान ने संभावित हमलों को ध्यान में रखते हुए अपने मिसाइल सिस्टम को अलग-अलग गुप्त ठिकानों पर फैला रखा है. यही वजह है कि अमेरिका और इजराइल को उन ठिकानों का पता लगाने ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है. इसके बाद भी ठिकानों का पता नहीं चल रहा है.
ईरान के हाईटेक 4 बेस
- यज्द अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स: लगभग 500 मीटर गहराई में बना हाईटेक बेस, जहां से हाइपरसोनिक मिसाइल लॉन्च की क्षमता बताई जा रही है. ये AI-कनेक्टेड सिस्टम से लैस है.
- केश्म द्वीप बेस: फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप अब नौसैनिक मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन का अहम केंद्र बन चुका है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट पर नजर रखी जाती है.
- कोनेश कैन्यन साइट: करमानशाह क्षेत्र में सुरंगों का जाल, जहां कयाम-1 और फतह जैसी मिसाइलें तैनात हैं. यहां से इजरायल और खाड़ी देशों पर कम समय में हमला किया जा सकता है.
- इमाम जावेद बेस: मोबाइल लॉन्चर सिस्टम के लिए विकसित, जहां मिसाइल से लैस ट्रक सुरंगों के भीतर ही संचालित हो सकते हैं.
मिसाइल बेस के अलावा भी कई गुप्त ठिकाने
ईरान के पास सिर्फ ये चार मिसाइल बेस नहीं बल्कि ऐसे कई ठिकाने हैं, जहां मिसाइलें रेडी टू फायर मोड में रहती हैं. उसके घातक और सबसे ताकतवर मिसाइलों में फतह, खुर्रमशहर, बद्र, जुल्फिकार और कासिम जैसे नाम शामिल हैं. अभी सिर्फ 33 प्रतिशत मिसाइलें नष्ट या खत्म हुई हैं तो बाकी की 67 प्रतिशत कहां हैं. शायद वो इन अंडरग्राउंड सिटी और पहाड़ियों की अनंत गहराइयों में छिपाकर रखी गई हैं ताकि वक्त आने पर दुश्मन खेमे में कोहराम मचाया जा सके.
रणनीतिक बढ़त या मनोवैज्ञानिक दबाव?
मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान ने अपनी मिसाइलों को केवल एक जगह केंद्रित रखने के बजाय, कई गुप्त और सुरक्षित नेटवर्क में बांट दिया है, ताकि दुश्मन को भ्रमित किया जा सके. यही वजह है कि लगातार हमलों के बावजूद मिसाइल ठिकानों को तेजी से खत्म करना संभव नहीं हो पा रहा. इजराइल ने इसके लिए ईरान में मौजूद अपने एजेंटों को भी सक्रिय किया है, लेकिन इसके बाद भी ईरान के इन गुप्त ठिकानों का पता नहीं लगाया जा सका है.
ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी 9 भारतवर्ष
2 साल तक युद्ध लड़ने की क्षमता, पाताल में ईरान की असली ताकत, अमेरिका-इजराइल के लिए कम नहीं मुश्किलें
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