World News: अमेरिका को नशा मुक्त बनाने में बड़ी मदद कर रहा भारत, सामने आए सबूत – INA NEWS

अमेरिका में फेंटेनाइल संकट के खिलाफ जारी जंग में एक बड़ी और अहम सफलता सामने आई है. 4 फरवरी 2026 को अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) ने खुलासा किया कि उसने DEA ऑपरेशन मेल्टडाउन के तहत 200 से ज्यादा इंटरनेट डोमेन जब्त किए हैं.
ये डोमेन अवैध ऑनलाइन फार्मेसियों से जुड़े थे, जिन्हें भारत आधारित एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क चला रहा था. DEA के मुताबिक, इस नेटवर्क का सीधा संबंध अमेरिका में कम से कम 6 लोगों की मौत और 4 गैर-घातक ओवरडोज से पाया गया है.
क्या है ऑपरेशन मेल्टडाउन?
DEA के रॉकी माउंटेन फील्ड डिवीजन की अगुवाई में यह जांच साल 2022 से चल रही थी. जांच में सामने आया कि तस्कर नकली दवाइयों को ऑनलाइन असली पेनकिलर और प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के नाम पर बेच रहे थे. बाहर से ये गोलियां पूरी तरह वैध लगती थीं, लेकिन हकीकत में इनमें घातक फेंटेनाइल मिलाया गया था. DEA ने साफ कहा कि यह ऑपरेशन सिर्फ कुछ लोगों को पकड़ने तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे डिजिटल ड्रग नेटवर्क को जड़ से तोड़ने की कोशिश थी.
ऑनलाइन नकली गोलियां, तस्करों का नया हथियार
DEA के अनुसार, फेंटेनाइल तस्करी अब सड़क किनारे डीलरों तक सीमित नहीं रही. अपराधियों ने तरीका बदल लिया है. अब नकली वेबसाइट्स, सोशल मीडिया और डार्कनेट के जरिए ये गोलियां सीधे अमेरिकी उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जा रही हैं. खतरा इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि फेंटेनाइल इतना ताकतवर है कि एक भी गोली जानलेवा साबित हो सकती है. यही वजह है कि ऑनलाइन बिकने वाली नकली दवाएं अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी हैं.
भारत क्यों बना इस लड़ाई का अहम हिस्सा?
DEA की प्रेस रिलीज में एक बात खास तौर पर कही गई कि इस ऑपरेशन में भारत सरकार की एजेंसियों के साथ सहयोग निर्णायक रहा. DEA ने माना कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क को तोड़ने के लिए भारत जैसे देशों के बिना यह लड़ाई अधूरी है. असल में, फेंटेनाइल की सप्लाई चेन अब एक देश या एक रास्ते तक सीमित नहीं है. यह एक ग्लोबल सिस्टम बन चुकी है, कहीं केमिकल बनता है, कहीं प्रोसेस होता है और कहीं ऑनलाइन बिकता है.
भारत सरकार का कहना है कि अब ड्रग तस्करी से निपटने का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. फोकस सिर्फ ड्रग जब्त करने पर नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को तोड़ने पर है. ह मंत्रालय के मुताबिक, भारत में Narco Coordination Centre (NCORD) के तहत अलग-अलग एजेंसियां मिलकर काम करती हैं.
डराने वाले आंकड़े और बदलती तस्करी
हालांकि 2024 में अमेरिका में ओवरडोज से होने वाली मौतों में गिरावट आई और आंकड़ा पांच साल के निचले स्तर पर पहुंचा, फिर भी करीब 80,000 लोगों की मौत दर्ज की गई. इनमें सबसे बड़ा कारण सिंथेटिक ओपिओइड, खासकर फेंटेनाइल रहा. जैसे-जैसे अमेरिका ने देश के भीतर सख्ती बढ़ाई, तस्करों ने रास्ता बदल लिया और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लेने लगे.
अमेरिका को नशा मुक्त बनाने में बड़ी मदद कर रहा भारत, सामने आए सबूत
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,








