World News: होर्मुज के लिए क्या है ट्रंप का Plan-G? जिस पर ईरान बोला- अमेरिकी सैनिकों को समुद्र में कब्र नसीब नहीं होगी – INA NEWS

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग में रणनीतिक बदलाव में एक ऐसा फैसला ले लिया है, जिसमें अंजाम की कल्पना अब डराने लगी है. डर की वजह ये नहीं है कि अमेरिका पश्चिमी एशिया को जंग का अखाड़ा बना रहा है बल्कि डर की वजह है अमेरिका पर मंडरा रहा नया संकट. वो संकट जो शायद अमेरिका के सुपर पावर बनने के बाद पहली बार खड़ा होगा. ये संकट है हार और अमेरिका को बड़ा नुकसान. ऐसे में जानते हैं कि उसकी अब रणनीति क्या है? मोर्चा कौन सा चुना गया है?

हवाई हमलों से बात नहीं बनी, मिसाइलें ईरान का गुरूर नहीं तोड़ पाईं, इसलिए अमेरिका वो करने जा रहा है, जिसकी कल्पना से ही तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनाई देने लगती है. पेंटागन के ‘वॉर-रूम’ में ‘प्लान-G’ की तैयारी चल रही है. प्लान-G यानी ग्राउंड ऑपेरशन का ब्लूप्रिंट मेज पर आ चुका है. इस प्लान को लेकर ट्रंप अपनी स्थिति साफ कर दी है कि इस ऑपरेशन में एक भी गलती नहीं होगी.

क्या ईरान चुप बैठा रहेगा?

इसलिए प्लान के तहत 10 हज़ार मरीन कमाडो ईरान की धरती पर उतरने वाले हैं. जिनका सिर्फ एक ही मकसद होगा, होर्मुज के संकरे समुद्री रास्ते में ईरान के चक्रव्यूह को तोड़ना. उनकी जमीन में घुसकर व्यूह रचना को नेस्तनाबूद करना. खर्ग से लेकर लरक तक 6 द्वीपों पर कब्जा करना और ईरान को घुटनों पर ले आना लेकिन क्या ईरान चुप बैठा रहेगा?

सवाल ही नहीं है क्योंकि ईरान की तरफ से जारी चेतावनी साफ बता रही है कि अगर अमेरिका ने ईरानी जमीन में एंट्री की तो समुद्र में अमेरिकी सैनिकों को कब्र भी नसीब नहीं होगी. अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट मानें तो ट्रंप ने पश्चिमी एशिया में 10 हज़ार अतिरिक्त सैनिक तैनात करने के आदेश जारी कर दिए हैं. इस तैनाती का मकसद मेनलैंड पर नहीं बल्कि होर्मुज को नियंत्रण में लेना है.

खास तौर पर ईरान के उन 6 द्वीपों को नियंत्रण में लेना ही मकसद है, जिनके करीब से दुनिया का 30 प्रतिशत तेल सप्लाई होता है. ये मकसद दो बड़े विकल्पों से पूरा होगा. पहला खर्ग द्वीप- जिसे नियंत्रण में लेने से ईरान का तेल व्यापार ठप हो जाएगा. दूसरा है केश्म द्वीप- जिसे कब्जे में लेकर अमेरिका वहां अपना बेस बना लेगा और ये संभव होगा सिर्फ ग्राउंड ऑपरेशन से.

अमेरिका के खिलाफ ईरान की क्या रणनीति?

यही वजह है कि ग्राउंड ऑपरेशन के लिए सैनिकों को सपोर्ट करने के लिए अमेरिका ने इतिहास में पहली बार ‘मानवरहित ड्रोन स्पीडबोट्स’ को एक्टिव कॉम्बैट में उतार दिया है. ये समंदर के आत्मघाती ड्रोन हैं जो ईरान की नेवी को उलझा कर रखेंगे. अब ये कैसे होगा? और अमेरिका के इस प्लान के खिलाफ ईरान की रणनीति क्या है? इसे भी समझ लीजिए.

अमेरिका के होर्मुज कंट्रोल प्लान में मुख्य रणनीति चोकप्वाइंट को हटाना है. ताकि फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक शिपिंग लाइन क्लियर हो सके. इसलिए टारगेट पर केश्म द्वीप है जो ईरान का मुख्य फॉरवर्ड बेस है. ऐसे ही होर्मुज द्वीप स्ट्रेट का मुहाना है, लारक शिपिंग लेन के करीब है, ग्रेटर तुंब, लेसर तुंब और अबू मूसा भी रणनीतिक द्वीप हैं.

हालांकि, संकट ये है कि ईरान ने इन्हीं द्वीपों पर सैन्य डिप्लॉयमेंट कर दिया है. इन्हीं के पास कोस्टल एंटी शिप मिसाइलें तैनात कर दी हैं. समुद्र में अमेरिकी गतिविधियों को देखते हुए इन्हीं द्वीपों में फास्ट अटैकिंग बोट्स तैनात कर दी हैं. इन्हीं द्वीपों पर रडार और सर्विलॉन्स सिस्टम एक्टिवेट किया है. यही नहीं अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन पर जवाबी कार्रवाई के लिए ड्रोन और एयर डिफेंस भी यहीं तैनात किए हैं.

ईरान का काउंटर प्लान

अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन वाला प्लान धरातल पर उतरे, उससे पहले ही ईरान ने समुद्री मार्ग पर व्यूह रचना पूरी कर ली है . लेकिन सवाल ये है कि, ट्रंप ने ईरान को झुकाने के लिए इसी प्लान को क्यों चुना? और ट्रंप इतनी जल्दबाज़ी में क्यों हैं? ट्रंप ने इस प्लान को इसलिए एक्टिव किया है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने बचाव की ढाल बना लिया है.

इस संकरे समुद्री रास्ते पर ईरान ने अपने द्वीपों पर बड़ी संख्या में तैनाती की है. इसके अलावा ईरान ने अपना तेल बेचने के लिए SWIFT को दरकिनार कर CIPS के जरिए भुगतान लेना शुरू कर दिया है. युआन में पेमेंट लेना अमेरिका की इकनॉमिक सुप्रीमेसी पर तमाचा है. जिसका जवाब अमेरिका अब सिर्फ ग्राउंड ऑपरेशन करके ही दे सकता है.

हालांकि, सवाल जब ग्राउंड ऑपरेशन के लिए जल्दबाज़ी पर उठता है जो जवाब और भी ज्यादा चौंकाता है. इस जल्दबाजी का जवाब है, ईरान के लारक द्वीप पर कब्जा हासिल करना. वहां अपना बेस बनाना. यानी अमेरिका ग्राउंड ऑपरेशन करके ईरानी सैनिकों को लारक द्वीप से निकालना चाहता है. ईरान के टैक्स वसूली वाले नए सिस्टम को तबाह करना चाहता है.

ग्राउंड ऑपरेशन ट्रंप की मजबूरी

यानी लारक द्वीप को टारगेट करके अमेरिका जिस स्तर पर ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है, वो ट्रंप की मजबूरी है. ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि IRGC ने इस द्वीप के जरिए ही टैक्स वसूली का एक बड़ा सिंडिकेट खड़ा कर लिया है. अमेरिका के लिए होर्मुज स्ट्रेट में संकट बना ईरान का 6 स्टेप वाला टैक्स सिस्टम ये है कि लारक द्वीप पर ईरानी सेना वैरी हाई फ्रिक्वेंसी के जरिए जहाज़ों को संदेश भेजकर रोकती है.

फिर जहाज़ों का पूरा डेटा, माल, मालिक और क्रू की डिटेल हासिल करती है. हालांकि, ऊर्जा शिपमेंट को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन जहाज़ और देश की समीक्षा करने के बाद इस समीक्षा में जो जहाज़ मान्य होता है, उससे युआन में टैक्स वसूल किया जाता है. जो टैक्स देता है, उसे सुरक्षित रास्ता ईरानी एस्कॉर्ड देते हैं. जो जहाज़ अमान्य हो जाते हैं, उन्हें रोक दिया जाता है या वापस भेज दिया जाता है.

अब सवाल ये है कि, क्या ट्रंप का मकसद दुनिया की राह आसान बनाना है? या फिर ट्रंप को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता? ट्रंप का कहना है, आश्चर्यजनक बात यह है कि हमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की जरूरत नहीं है. हमें इसकी बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. हमारे पास जितना तेल मौजूद है उससे देश पर कोई असर नहीं पड़ेगा. मतलब साफ है कि, ट्रंप को दुनिया में गहराए संकट से फर्क नहीं पड़ता लेकिन फर्क पड़ता है तो, उस सिस्टम से, जो ईरान, अमेरिका के अर्थतंत्र को मजबूत बनाने वाल सिस्टम को ध्वस्त कर रहा है.

ट्रंप के पास एक विकल्प है

कुछ हद तक असर डाल रहा है. अमेरिकी रिफाइनरियों पर बढ़ा दबाव. इसलिए ग्राउंड ऑपरेशन ही ट्रंप के पास एक विकल्प बाकी है लेकिन ईरान ने भी जवाबी रणनीति तैयार कर ली है. तसनीम न्यूज के मुताबिक ईरान ने 10 लाख लड़ाकों की एक विशाल फौज तैयार कर ली है. जिनका मकसद है ग्राउंड ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सैनिकों का खात्मा.

ये सिर्फ दावा नहीं है, बल्कि ईरान ने इस ऑपरेशन से जुड़े वो वीडियो भी जारी किए हैं, जो अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन के खिलाफ पुख्ता रणनीति बनाने की पुष्टि करता है. अमेरिकी मरीन कमांडोज़ की तरह ही, ईरान ने भी कम समय में घातक दल बना लिया है. इस जवाबी रणनीतिक तैयारी पर मुहर लगाती है ईरानी सेना के कमांडर जनरल अली जहान शाही की सीमाओं पर बढ़ी हलचल.

वो खुद सैन्य तैनाती की निगरानी करने सरहदी क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं, उनका हौसला बढ़ा रहे हैं. जबकि ईरान के सिक्योरिकी कमीशन के चीफ इब्राहिम अजीजी की धमकी ने भी इस तैयारी में आक्रामकता की पुष्टि कर दी है. उन्होंने साफ कह दिया है कि इस बार अमेरिकी मरीन को कब्र भी नसीब नहीं होगी. इससे साफ पता चलता है कि अब 6 द्वीपों पर छिड़ने वाली जंग, समुद्र से महाजंग की शुरुआत का शंखनाद साबित होगी.

ब्यूर रिपोर्ट, टीवी 9 भारतवर्ष

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