अमेरिका का ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला:ईरान का जॉर्डन-बहरीन में जवाबी अटैक; ट्रम्प बोले- समझौते की जरूरत नहीं, होर्मुज पर हमारा पूरा कंट्रोल- INA NEWS

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमलों की एक लहर पूरी की है। इनमें एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री ठिकाने, माइन बिछाने की क्षमता और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल हैं। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया है। कुवैत में भी ईरानी ड्रोन हमलों के बीच एयर डिफेंस सक्रिय की गई है, जबकि जॉर्डन ने 13 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ किसी समझौते की जरूरत नहीं है। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगभग पूरा कंट्रोल है और ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ढह रही है। रविवार को भी अमेरिका ने किया हमला अमेरिका और ईरान के बीच नया तनाव रविवार से शुरू हुआ। अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना था कि ईरान की IRGC होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रही थी। ईरान ने हमले में लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात कही। हालांकि, संख्या नहीं बताई। ईरान ने हमले को आक्रामक कार्रवाई बताते हुए जवाब देने की धमकी दी। ईरान का अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार अमेरिकी हमले के बाद ईरान की IRGC ने जॉर्डन और UAE में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। जॉर्डन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा ने 8 ईरानी मिसाइलें रोक दीं। UAE ने भी एक ईरानी ड्रोन को मार गिराने की बात कही। इन हमलों में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने या बड़े नुकसान की तुरंत पुष्टि नहीं हुई। एक महीने बाद फिर बढ़ा तनाव अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने से सैन्य कार्रवाई कम थी। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश भी चल रही थी। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा को लेकर विवाद फिर बढ़ गया। होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम है? होर्मुज स्ट्रेट से खाड़ी देशों का तेल और गैस दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचता है। इसलिए यहां संघर्ष बढ़ने से पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है। अमेरिकी हमलों के बाद तेल बाजार में भी चिंता बढ़ी है। तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर ऊर्जा सप्लाई भी घट सकती है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… ईरान-अमेरिका के बीच 60 दिन की डेडलाइन खत्म, फिर ट्रम्प ने हमले का आदेश क्यों नहीं दिया अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का समझौता खत्म हो गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद का समाधान निकालना था। डेडलाइन खत्म होने के बावजूद न तो कोई फाइनल समझौता हुआ, न ही अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया। पूरी खबर पढ़ें…
Source link
यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |