अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर; फल-सब्जियों के दाम बढ़ने की आशंका- INA NEWS

अमेरिका के कैलिफोनिया में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार की कार्रवाई से करीब 30 हजार भारतीय खेत मजदूरों के काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। ऐसे में इमिग्रेशन एजेंसी ICE के छापों और पकड़े जाने के डर से वे खेतों में काम करने से बच रहे हैं। इसका असर खेती पर पड़ सकता है। खेतों में मजदूरों की कमी हुई तो फल और सब्जियों की पैदावार और सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे इनके दाम बढ़ने की आशंका है। ग्रामीण इलाकों और खेतों में छापेमारी तेज अमेरिका में बिना जरूरी कागजात के रह रहे करीब 7.5 लाख भारतीयों में से लगभग एक लाख खेती से जुड़े काम करते हैं। ट्रम्प सरकार की इमिग्रेशन एजेंसी ICE ग्रामीण इलाकों और खेतों में भी छापे मार रही है। कैलिफोर्निया से लेकर कैंसस तक कई जगह खेतों में मजदूरों की कमी देखी जा रही है। ट्रम्प सरकार प्रवासियों को देश से निकालने की कार्रवाई को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है। कैलिफोर्निया में हजारों लोग हिरासत में कैलिफोर्निया में डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार है। ट्रम्प ने राज्य सरकार पर प्रवासियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। इसके बाद ICE वहां भी कार्रवाई कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो महीनों में हजारों खेत मजदूरों को पकड़कर हिरासत केंद्रों में रखा गया है। कुछ लोगों को देश से निकाला भी गया है। बिना वकील के अपना पक्ष रखना मुश्किल अमेरिका में बिना जरूरी कागजात के रह रहे लोगों को भी कुछ कानूनी अधिकार मिलते हैं। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, कई प्रवासियों के लिए इन अधिकारों का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है। उन्हें अपना वकील खुद करना पड़ता है। जिनके पास वकील करने के पैसे नहीं हैं, उनके लिए कानूनी मदद लेना मुश्किल है। ऐसे में कुछ लोगों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिले बिना ही देश से निकाले जाने का खतरा है। पॉलिटिको की रिसर्च के मुताबिक, 40 से ज्यादा अदालतों ने करीब 5 हजार प्रवासियों के पक्ष में फैसले दिए हैं। इसके बावजूद प्रवासियों को सरकार की ओर से इमिग्रेशन वकील नहीं मिल रहे हैं। छापों से बचने के लिए काम बदल रहे भारतीय ICE की कार्रवाई के डर से कई भारतीय मजदूरों ने खेतों में काम करना कम कर दिया है। कुछ लोग अब पेट्रोल पंपों, किराना दुकानों और इमारतों के निर्माण से जुड़े कामों में लग गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन जगहों पर फिलहाल छापों का डर कम है। कुछ भारतीय मजदूर मैक्सिको भी चले गए हैं, लेकिन उनकी संख्या कम बताई जा रही है। इसकी एक वजह यह है कि वहां खेतों में काम करने पर अमेरिका के मुकाबले कम पैसे मिलते हैं। ट्रम्प की चुनावी रणनीति से खेती पर असर पड़ेगा? मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टॉम जुराविच के मुताबिक, मिडटर्म चुनाव में समर्थन हासिल करने के लिए ट्रम्प सरकार प्रवासियों को देश से निकालने पर जोर दे रही है। लेकिन इस कार्रवाई का असर खेती पर पड़ सकता है। अमेरिका में लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया से आए मजदूर खेतों में काम करते हैं। उन्हें अपने देश के मुकाबले ज्यादा मजदूरी मिलती है, लेकिन कई बार उनकी मजदूरी अमेरिकी मजदूरों से कम होती है। ट्रम्प की रणनीती से किसानों का नुकसान अमेरिका की खेती में मशीनों के साथ बड़ी संख्या में मजदूरों की भी जरूरत होती है। अगर खेतों में काम करने वाले मजदूर कम हो गए, तो फसल की बुवाई, देखभाल और कटाई प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों का नुकसान बढ़ने और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की आशंका है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि इस कार्रवाई से अमेरिकी कृषि क्षेत्र को सालाना करीब 6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। फल और सब्जियों के दाम 30 से 32% तक बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। स्ट्रॉबेरी जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों पर इसका असर ज्यादा हो सकता है। अमेरिकी खेती प्रवासी मजदूरों पर कितनी निर्भर? अमेरिका के नेशनल एग्रीकल्चरल वर्कर्स सर्वे के मुताबिक, खेतों में काम करने वाले करीब 45% मजदूर प्रवासी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से बड़ी संख्या ऐसे विदेशी मजदूरों की है जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। इससे पता चलता है कि अमेरिकी खेती में प्रवासी मजदूरों की अहम भूमिका है। अमेरिकन फार्म ब्यूरो फेडरेशन के मुताबिक, किसानों ने पिछले साल खेतों में मजदूरों के लिए 4.15 लाख पदों के विज्ञापन दिए थे, लेकिन सिर्फ 182 श्वेत मजदूरों ने आवेदन किया। वहीं, आइडाहो में हुए एक सर्वे में 53% लोगों ने माना कि ICE के छापों से खेती को नुकसान हो सकता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत: इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। CNN के मुताबिक, हमलावर को एक स्थानीय नागरिक ने गोली मार दी, इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर की उम्र करीब 16 साल थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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