यूपी – केजीएमयू: दुर्लभ बीमारी से जंग जीत रही थी छह साल की आरोही, सिस्टम की बेरुखी ने ले ली जान – INA

छह साल की आरोही साहू दुर्लभ बीमारी गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) से जिंदगी की जंग लड़ रही थी। करीब 40 दिन तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद उसकी हालत में सुधार होने लगा था, लेकिन आरोप है कि डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर से हटाकर सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया, जहां ऑक्सीजन की व्यवस्था तक नहीं थी।

सांस लेने में परेशानी होने पर परिजन डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ से मदद की गुहार गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिला। आखिरकार सिस्टम की इस बेरुखी से मंगलवार सुबह आरोही की मौत हो गई। इससे नाराज परिजनों ने बाल रोग विभाग में हंगामा किया और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।

पिता बैजनाथ साहू ने बताया कि 27 सितंबर को बेटी की हालत बिगड़ने पर उसे केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे थे। घंटों इंतजार के बाद उसे भर्ती किया गया। करीब एक माह 10 दिन तक इलाज और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद उसकी सेहत में कुछ सुधार हुआ।

परिजनों के मुताबिक, हालत में सुधार के बाद डॉक्टरों ने आरोही को बाल रोग विभाग में शिफ्ट कर दिया। वहां आईसीयू में भी वह वेंटिलेटर पर रही मगर कुछ दिन बाद वेंटिलेटर हटाकर सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया। वहां ऑक्सीजन की व्यवस्था भी नहीं थी। कुछ देर बाद बच्ची को सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजनों ने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को उसकी बिगड़ती हालत की जानकारी दी, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। आरोप है कि वे डॉक्टरों के सामने हाथ जोड़कर बच्ची को बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिला।

बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने वार्ड में हंगामा शुरू कर दिया। सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति संभाली। अभिषेक साहू ने आरोप लगाया कि पुलिस ने भी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

जीबीएस से होती है ये परेशानी

गिलियन-बैरे सिंड्रोम दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भूलवश अपनी ही स्वस्थ तंत्रिकाओं पर हमला कर देती है। यह मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से पूरे शरीर में जाने वाले सिग्नल्स कमजोर या बाधित हो जाते हैं। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि बच्ची के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है। बच्ची की हालत गंभीर थी। चिकित्सकों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, मगर ऐसा नहीं हो सका।


Credit By Amar Ujala

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