स्टोर पर ‘आउटसोर्सिंग राज’! गोरखपुर के बाबू के इशारे पर चल रहा पडरौना बिजली उपकेंद्र?

🔴 बिजली विभाग मे अंधेर नगरी: बिना किसी आदेश का स्टोर का बादशाह बने आउटसोर्सिंग आपरेटर अमित सिंह

🔵पडरौना बिजली उपकेंद्र में नियमों की ‘शॉर्ट सर्किट’! गोरखपुर में बैठे बाबू के धौस पर  चलता रहा स्टोर, विभाग मौन 

कुशीनगर। पडरौना विद्युत उपकेंद्र में नियमों को ताक पर रखकर काम करने का तौर तरीका शगल बन गया है। पहले आउटसोर्सिंग के माध्यम से आपरेटरों की नियमविरुद्ध नियुक्तियों का मामला अभी शांत नही हुआ कि, अब विभाग के करोड़ों रुपये के विद्युत सामान से जुड़े स्टोर संचालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि आउटसोर्सिंग ऑपरेटर अमित सिंह वर्षों से बिना किसी सक्षम अधिकारी के लिखित प्रभार आदेश के स्टोर का कार्य संपादित कर रहा है। पूरे मामले में गोरखपुर में तैनात बड़े बाबू वाई.के. गुप्ता का नाम सामने आने से विवाद और गहरा गया है।ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या बिजली विभाग का संवेदनशील स्टोर सरकारी नियमों से नहीं, बल्कि गोरखपुर में बैठे बाबू के मौखिक आदेशों से संचालित हो रहा है?

मीडिया ने जब आउटसोर्सिंग ऑपरेटर अमित सिंह से पूछा कि वह किस आदेश के आधार पर स्टोर का कार्य देख रहे हैं, तो उन्होंने पहले कहा कि गोरखपुर के बड़े बाबू वाई.के. गुप्ता के निर्देश पर वह यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लेकिन जब उनसे लिखित आदेश मांगा गया तो स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई लिखित आदेश नही है।नतीजतन पूरे मामले पर नए सवाल खड़े हो गए।

 🔴क्या बाबू के मौखिक आदेश से चल सकता है सरकारी स्टोर?

विभागीय जानकारों के अनुसार बिजली विभाग का स्टोर करोड़ों रुपये की सरकारी सामग्री का केंद्र होता है। ट्रांसफार्मर, मीटर, केबल, कंडक्टर और अन्य विद्युत उपकरणों का रखरखाव, निर्गमन तथा स्टॉक का पूरा रिकॉर्ड यहीं से संचालित होता है। ऐसी स्थिति में बिना सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश के स्टोर संचालन कराना विभागीय प्रक्रिया और जवाबदेही के सिद्धांतों पर यक्ष प्रश्न खडा कर्ता है।

🔴सवालों के घेरे में बड़े बाबू वाईके गुप्ता

बेशक! अमित सिंह का दावा सही है कि वह गोरखपुर मे बैठे बडे बाबू वाईके गुप्ता के निर्देश पर स्टोर का कार्य कर रहे, तो सवाल यह उठता है कि क्या बड़े बाबू किसी आउटसोर्सिंग कर्मचारी को स्टोर का प्रभार दे सकता हैं? यदि हां, तो उसका लिखित आदेश और शासनादेश कहां है?यदि नहीं, तो फिर वाईके गुप्ता ने आउटसोर्सिंग आपरेटर अमित सिह को स्टोर का प्रभार कैसे सौप दिया? जानकारों का कहना है कि इन सवालों का जबाब विभाग की ओर से सार्वजनिक करना ही पडेगा। 

🔴 क्या कहते हैं नियम ?

विभागीय प्रक्रिया के जानकारों का कहना है कि स्टोर का प्रभार सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश से ही दिया जाता है।प्रभार आदेश विभागीय अभिलेखों में दर्ज होना चाहिए।सरकारी सामग्री की जवाबदेही तय करने के लिए अधिकृत अधिकारी का नाम स्पष्ट होना आवश्यक है।आउटसोर्सिंग कर्मचारी अपने अनुबंध में निर्धारित कार्यों तक ही सीमित होते हैं। उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी देने का कोई प्राविधान नही है। 

🔴 सबसे बड़ा सवाल

महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आउटसोर्सिंग ऑपरेटर अमित सिंह आखिर किस अधिकार से वर्षों से स्टोर का कार्य संपादित कर रहे है? उच्चाधिकारियों द्वारा जब कोई लिखित आदेश नहीं जारी किया गया है, तो विभागीय अधिकारियों द्वारा इस व्यवस्था पर आपत्ति एंव कार्रवाई क्यों नहीं की गयी? गोरखपुर के बड़े बाबू वाईके गुप्ता की भूमिका क्या है? क्या विभागीय व्यवस्था मौखिक निर्देशों के भरोसे संचालित होती है? ऐसे तमाम बडे सवाल है जो सुरसा की तरह मुंह बाये खडी है। 

🔴 जांच से ही साफ होगी तस्वीर

सूत्रों का कहना है कि यदि स्टोर प्रभार आदेश, स्टॉक रजिस्टर, सामग्री निर्गमन रजिस्टर और संबंधित अभिलेखों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, तो यह स्पष्ट हो जायेगा कि पूरी व्यवस्था विभागीय नियमों के अनुरूप थी या नहीं। फिलहाल इस पूरे प्रकरण ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खडे कर दिए हैं। अब देखना यह है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जांच के जरिए पूरे मामले की सच्चाई सामने लाते हैं या फिर कोई गुल खिलाते है।

🔵 रिपोर्ट – संजय चाणक्य 

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