थाने में आरोपी की ‘गुफ्तगू’! तस्वीर ने खड़े किए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल?

🔵शराब तस्करी से पॉक्सो तक के मुकदमों का आरोपी थाने में! दरोगा से गुफ्तगू की तस्वीर वायरल
🔴थाने की चौखट पर कानून के सवाल! आरोपी से दरोगा की गुफ्तगू बनी चर्चा का विषय
कुशीनगर। जिले के तमकुहीराज थाने की एक तस्वीर ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर सात अगस्त की बतायी जा रही है। इसमें एक उपनिरीक्षक थाने के भीतर उस व्यक्ति से बातचीत करते हुए नजर आ रहे है, जिसके खिलाफ शराब तस्करी, वाहन चोरी,जालसाजी, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में आरोपी होने की बात सामने आ रही है। सवाल यह नहीं कि पुलिस किसी आरोपी से पूछताछ क्यो कर रही है,सवाल यह है कि वह व्यक्ति थाने में किस काम से आया था, मुलाकात किस प्रक्रिया के तहत हुई और क्या इसकी विधिवत एंट्री पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है? इस तस्वीर ने तमकुहीराज पुलिस के सामने जवाबदेही का सवाल खड़ा कर दिया है।
बेशक! पुलिस द्वारा किसी आरोपी से पूछताछ करना अपने आप में असामान्य नहीं है। जांच में पुलिस को आरोपियों से पूछताछ करना कानूनी प्रक्रिया है। सवाल यह है कि क्या यह मुलाकात जांच की वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई या थाने के भीतर किसी अन्य उद्देश्य से? तस्वीर में दिखाई दे रही बातचीत को लेकर यही स्थिति पुलिस की जवाबदेही को महत्वपूर्ण बना रही है। क्योंकि थाना आम नागरिक के लिए कानून-व्यवस्था का केंद्र है, न कि ऐसा स्थान जहां गंभीर आरोपों से घिरे व्यक्ति की पुलिसकर्मियों से गुफ्तगू करने का सुरक्षित स्थान। अगर संबंधित व्यक्ति वास्तव में गंभीर धाराओं वाले मुकदमों में आरोपी है तो यह सार्वजानिक करना पुलिस की नैतिक जिम्मेदारी है। इसके साथ महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आरोपी व्यक्ति जो थाने मे पुलिस के साथ गुफ्तगू करते हुए तस्वीर मे दिख रहा है क्या उस को पूछताछ के लिए बुलाया गया था?क्या उसकी आमद थाने की जीडी में दर्ज है? क्या उससे किसी मुकदमे के संबंध में पूछताछ की गयी?क्या सीसीटीवी में उसकी थाने में मौजूदगी दर्ज है? और क्या संबंधित उपनिरीक्षक को उससे मिलने या पूछताछ करने का किसी ने अधिकृत दायित्व सौंपा था?ऐसे तमाम सवाल है जिसका जवाब तस्वीर से नहीं, पुलिस रिकॉर्ड से सार्वजनिक होना चाहिए।
🔴थाना जांच का केंद्र है या ‘सहज मुलाकात’ की जगह?
कहना न होगा कि थाने के भीतर किसी आरोपी की मौजूदगी अपने आप में अपराध नहीं है। कानूनन पुलिस किसी भी आरोपी या संदिग्ध से पूछताछ के लिए थाने मे बुला सकती है। लेकिन जब मामला गंभीर आपराधिक आरोपों से जुड़ा हो, तब पुलिस की हर गतिविधि पारदर्शी होना जरूरी है।क्योंकि पुलिस पर जनता का भरोसा इसी बात से कायम रहता है कि कानून की नजर में आरोपी और आम आदमी के बीच कोई विशेष व्यवहार तो नहीं हो रहा।तस्वीर में दिखाई दे रही सहज बातचीत ने इसी धारणा को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। जानकारों का कहना है कि अगर यह नियमित कानूनी प्रक्रिया थी तो पुलिस के पास उसका रिकॉर्ड जरूर होगा,और अगर यह अनौपचारिक मुलाकात थी तो पुलिस को इसकी वजह सार्वजनिक करनी चाहिए, और यदि तस्वीर को लेकर किये जा रहे दावे गलत हैं तो पुलिस को सामने आकर उसे भी खारिज करना चाहिए।
🔴 क्या है 7 अगस्त’ की तस्वीर का सच
मामला ऐसा भी नहीं है कि इस की जांच के लिए कोई बड़ी कवायद करनी पड़ेगी। यदि तस्वीर सात अगस्त की है तो उस दिन की थाने की जीडी, सीसीटीवी फुटेज, आगंतुक विवरण रजिस्टर और संबंधित मुकदमों की केस डायरी यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि संबंधित व्यक्ति थाने में क्यों मौजूद था। जानकारों की माने तो पुलिस चाहे तो चंद सवालों का स्पष्ट जवाब देकर पूरी तस्वीर साफ कर सकती है।लेकिन यदि सवालों पर पुलिस खामोशी रहती है तो स्वाभाविक रूप से संदेह के साथ चर्चाओं का बाजार गरम रहेगा। सबब यह है कि मामला सिर्फ एक दरोगा और एक अभियुक्त की बातचीत की तस्वीर तक सीमित नही होनी होना चाहिए।
🔴आम लोगो के जेहन में उठ रहे सवाल
वायरल तस्वीर मे दिख रहे दरोगो और आरोपी के बीच चल रही गुफ्तगू को लेकर आम लोगो के जेहन मे तमाम सवाल हिलोरें मार रहे है। कौन था वह व्यक्ति? किस मुकदमे में आरोपी है?थाने क्यों आया था? किस अधिकारी से मिला मुलाकात कितनी देर तक हुई, जीडी में क्या दर्ज है?सीसीटीवी क्या कहता है? क्या मुलाकात पुलिस मैनुअल के मुताबिक पूरी प्रक्रिया के तहत हुआ? यह तमाम सवाल है जिसका जवाब मिलने के बाद ही तस्वीर के पीछे की कहानी साफ हो सकती है। क्योंकि तस्वीर भले ही खामोश है मगर सवाल चीख रहे हैं।अब देखना यह है कि तमकुहीराज पुलिस तस्वीर को महज एक सामान्य मुलाकात मानकर हाथ पे हाथ धरे बैठती है या फिर जीडी, सीसीटीवी और मुकदमे के रिकॉर्ड के साथ पूरे मामले की तस्वीर साफ करती है।क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं कि आरोपी थाने में क्यों था? बड़ा सवाल यह है कि थाने में उस आरोपी की मौजूदगी के पीछे की पूरी कहानी क्या है?
🔵 रिपोर्ट – संजय चाणक्य