Tach – VIVO और डिक्सन ने मिलाया हाथ! अब साथ में तैयार करेंगे स्मार्टफोन, भारतीय यूजर्स को कैसे मिलेगा फायदा?

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केंद्र सरकार ने चीन की स्मार्टफोन कंपनी विवो और भारतीय कंपनी डिक्सन टेक्नोलॉजीज के जॉइंट वेंचर को मंजूरी दे दी है. इस पार्टनरशिप के तहत भारत में स्मार्टफोन का प्रोडक्शन बढ़ेगा, जिससे मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. वहीं, इंपोर्ट पर निर्भरता घटने से ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी और भारत ग्लोबल स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाएगा. इससे भारतीय यूजर्स को बेहतर सप्लाई होने के साथ-साथ और क्या फायदे मिलेंगे, ये आपको बताते हैं.

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इस साझेदारी के बाद दोनों कंपनियां भारत में स्मार्टफोन का प्रोडक्शन बढ़ाने पर काम करेंगी.

भारत में मोबाइल फोन बनाने का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. अब इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. केंद्र सरकार ने चीन की स्मार्टफोन कंपनी VIVO और भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी डिक्सन टेक्नोलॉजीज के जॉइंट वेंचर को मंजूरी दे दी है. इस साझेदारी के बाद दोनों कंपनियां भारत में स्मार्टफोन का प्रोडक्शन बढ़ाने पर काम करेंगी.

सरकार की मंजूरी के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इस साझेदारी से भारत को क्या फायदा होगा? कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय कंपनियां मजबूत होंगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.

भारत में बढ़ेगा मोबाइल का प्रोडक्शन

नई साझेदारी के तहत डिक्सन की नई कंपनी में 51% हिस्सेदारी होगी, जबकि विवो के पास 49% हिस्सा रहेगा. दोनों कंपनियां मिलकर भारत में स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स बनाएंगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पहले जिन मोबाइल फोन का मैन्युफैक्चरिंग विदेशों में होता था, उनमें से कई अब भारत में बन सकेंगे. इससे देश में लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा.

रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

मोबाइल प्रोडक्शन बढ़ने से नए प्लांट, मशीनें और सप्लाई चेन की जरूरत होगी. इससे फैक्ट्री, लॉजिस्टिक्स और दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं. साथ ही भारतीय कंपनियों को नई तकनीक और बड़े ब्रांड्स के साथ काम करने का मौका मिलेगा. डिक्सन पहले से कई इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स बनाती है. विवो के साथ साझेदारी से कंपनी की स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और बढ़ सकती है.

सरकार की मंजूरी क्यों जरूरी थी?

भारत सरकार के नियमों के अनुसार, चीन जैसे पड़ोसी देशों की कंपनियों को भारत में निवेश करने से पहले सरकारी मंजूरी लेनी होती है. इसी वजह से इस साझेदारी को भी सरकार की मंजूरी की जरूरत थी. मंजूरी मिलने के बाद दोनों कंपनियां अब नई कंपनी शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी.

भारतीय यूजर्स को कैसे मिलेगा फायदा?

अगर स्मार्टफोन का उत्पादन भारत में बढ़ता है, तो इसका फायदा सीधे ग्राहकों को भी मिल सकता है. स्थानीय स्तर पर फोन बनने से सप्लाई बेहतर होगी, जिससे कई मॉडल जल्दी मिल सकेंगे. आयात पर निर्भरता कम होने से भविष्य में लागत घटने की संभावना भी बढ़ेगी. साथ ही, सर्विस सेंटर, स्पेयर पार्ट्स और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट में भी सुधार हो सकता है. हालांकि, फोन की कीमतें कम होंगी या नहीं, यह कंपनी की कीमत तय करने की स्ट्रैटजी और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा.

देश की अर्थव्यवस्था को होगा फायदा

अगर भारत में ज्यादा स्मार्टफोन बनेंगे तो आयात पर निर्भरता कम हो सकती है. इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत होगा. ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी इससे मजबूती मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की और साझेदारियां होती हैं, तो भारत आने वाले सालों में दुनिया के बड़े स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग सेंटर्स में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है.

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यशस्वी यादवSub Editor

यशस्वी यादव एक अनुभवी बिजनेस राइटर हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में दो साल का अनुभव है। ये नेटवर्क18 के साथ मनी सेक्शन में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यशस्वी का फोकस बिजनेस और फाइनेंस से जुड़ी खबरों को रिस…और पढ़ें


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