सुप्रीम कोर्ट में खुद अपना मामला लड़ने के दौरान जजों से बदसलूकी करने वाले प्रबल प्रताप यादव जिले की भरथना तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत भोली के गांव नगला जयलाल के रहने वाले हैं। प्रबल प्रताप के पिता सुरेंद्र सिंह यादव ने शनिवार को कहा कि बेटा आर्थिक संकट से जूझ रहा था। इस बीच उसके साथ साइबर फ्रॉड भी हो गया। इसकी शिकायत भी नहीं सुनी गई थी। इसके लिए ही उसने कोर्ट में अर्जी लगाई थी। आर्थिंक तंगी के बीच कहीं सुनवाई न होने की वजह से वह तनाव में था। इसलिए ही उससे शायद कोर्ट में गलती हो गई।
सुरेंद्र ने बताया कि उनकी दो बेटियां और एक बेटा प्रबल है। बेटियों की शादी हो चुकी है। सिर्फ दो बीघा खेती है। ऐसे में घर की आर्थिक स्थिति कमजोर है। आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए प्रबल लगातार पढ़ाई करके अच्छी नौकरी करना चाहता था। उसने तीन साल पहले जिले के चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज से बीएड किया था। सरकारी नौकरी न मिलने की वजह से दो साल पहले वह लखनऊ विवि से वकालत करने चला गया था।
वहां वह कैंपस के पास ही किराए के एक कमरे में रह रहा था। खर्चा चलाने के लिए ट्यूशन पढ़ाता था। वह एक निजी कंपनी में नौकरी भी कर रहा था। इसी बीच वह किसी साइबर फ्रॉड का शिकार हो गया था। जिसमें उसका काफी नुकसान हुआ था। प्रबल के ताऊ रविंद्र सिंह ने बताया कि इस फ्रॉड की शिकायत उन्होंने संबंधित थाने में की थी। वहां सुनवाई नहीं हुई तो पुलिस के उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया लेकिन किसी नहीं सुना। इस पर उसने कोर्ट से मुकदमा दर्ज कराया था। निचली कोर्ट से भी न्याय न मिलने पर प्रबल सुप्रीम कोर्ट गया था।