वर्दी पर दाग! लड़की-शराब की मांग और महिला से बदसलूकी के आरोप में दो सिपाही निलंबित, मुकदमा दर्ज,

जीरो टॉलरेंस का डंडा: सिपाहियों पर लगे संगीन आरोप, निलंबन के साथ मुकदमा दर्ज, बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू, ‘लड़की दो, शराब दो’ के आरोप से मचा बवाल
कुशीनगर। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कुशीनगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कसया थाना में तैनात दो सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करके आरोपी दोनों सिपाहियों की गिरफ्तारी कर जेल भेज दिया गया है। इतना ही नही मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने बर्खास्तगी की विभागीय प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। दोनों सिपाहियों पर एक ढाबा संचालक से कथित रूप से लड़की और शराब की मांग करने, विरोध करने पर घर में घुसकर मारपीट व धमकी देने तथा एक महिला को जबरन गोरखपुर ले जाकर बदसलूकी करने जैसे बेहद गंभीर आरोप लगे हैं।
बेशक! उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि एक बार फिर न सिर्फ धूमिल हुई है बल्कि गंभीर सवालों के घेरे में है। एक तरफ गोरखपुर में सिपाही द्वारा दस वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या का जघन्य मामला पूरे प्रदेश को झकझोर चुका है, वहीं दूसरी ओर कुशीनगर के कसया थाना क्षेत्र में तैनात सिपाही उमाशंकर यादव व उसके साथी पर लड़की और शराब की मांग, मारपीट, घर में घुसकर उत्पात मचाने तथा एक महिला को जबरन वाहन में बैठाकर गोरखपुर ले जाने जैसे बेहद गंभीर आरोप सामने आए हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने कानून की रक्षा करने वाली वर्दी की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
बताया जाता है कि कसया नगर निवासी ढाबा संचालक पप्पू सिंह ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि 3 अगस्त की शाम कसया थाने में तैनात सिपाही उमाशंकर यादव ने फोन कर मिलने के लिए बुलाया। रात तकरीबन नौ बजे मुलाकात के दौरान सिपाही अपने दो साथियों के साथ शराब के नशे में था और उसने लड़की तथा शराब की व्यवस्था करने की मांग की। जब उसने इनकार किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।शिकायत के मुताबिक रात करीब दो बजे आरोपी सिपाही अपने दो साथियों के साथ पीड़ित के आवास पर पहुंचे और दरवाजा नहीं खुलने पर दीवार फांदकर घर में घुसकर मारपीट शुरू कर दी। परिवार की महिलाओं के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया तथा सिपाहियों द्वारा पूरे परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शोर सुनकर आसपास के लोग जुटने लगे तो आरोपी सिपाही वहां से चले गए।
🔴 महिला ने एसपी से लगायी गुहार
इसी प्रकरण में एक महिला ने भी पुलिस अधीक्षक को अलग शिकायती पत्र देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि वह अपनी बहन के साथ कसया में किराये के मकान में रहकर पार्लर में काम करती है। महिला का कहना है कि उसी रात सिपाही उमाशंकर यादव अपने साथी सिपाही महेन्द्र यादव के साथ उसके कमरे पर पहुंचा, दरवाजा तोड़कर अंदर घुसा, मारपीट की और उसे जबरन वाहन में बैठाकर गोरखपुर के माड़ापार क्षेत्र ले गया। महिला का आरोप है कि वहां कई घंटों तक उसके साथ बदसलूकी की गई और सुबह करीब साढ़े पांच बजे उसे वापस कसया छोड़ दिया गया। विरोध करने पर उसे और उसकी बहन को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।दोनों शिकायतकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच कर आरोपी सिपाही एवं उसके साथियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि यदि कानून लागू कराने वाले ही कानून तोड़ने लगें तो आम जनता का पुलिस पर विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है।
🔴पुलिस ने दिखाई सख्ती
कहना न होगा पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों सिपाही उमाशंकर यादव व महेंद्र यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने के बाद गिरफ्तार कराकर जेल भेज दिया है, इतना नही तेज-तर्रार व ईमानदार छवि वाले पुलिस अधीक्षक ने विभागीय स्तर पर बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी है। एसपी का कहना है कि प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
🔴गोरखपुर की घटना के बाद फिर उठे सवाल
हाल ही में गोरखपुर में एक सिपाही पर दस वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या का मामला सामने आने से प्रदेशभर में आक्रोश व्याप्त है। उस घटना की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि कुशीनगर से आए इन आरोपों ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि दोनों मामले अलग-अलग हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने यह प्रश्न जरूर खड़ा किया है कि वर्दी की गरिमा बनाए रखने के लिए जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
🔵 रिपोर्ट – संजय चाणक्य