बाइक चोरों का ‘सेफ जोन’ बना नेबुआ? दो माह में सात वारदात, पुलिस खाली हाथ

🔵सात बाइक चोरी, कार्रवाई शून्य ! आखिर किसके भरोसे है नेबुआ नौरंगिया की सुरक्षा?
🔴नेपाल तक पहुंच गई चोरी की बाइक,पुलिस बेखबर, कार्यप्रणाली पर उठ रहे है सवाल
कुशीनगर। जिले के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र में लगातार हो रही बाइक चोरी की घटनाओं और हाल में सामने आए नेपाल कनेक्शन वाले प्रकरण ने स्थानीय पुलिस की कारस्तानी की कलई खोलकर रख दिया है। यही वजह है कि पुलिस कार्यप्रणाली पर तमाम गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बताया जाता है कि पिछले दो महीनों में सात से अधिक बाइक चोरी की घटनाएं सामने आने के बावजूद न तो अधिकांश मामलों में बरामदगी हो सकी और न ही कोई ऐसा खुलासा हुआ जिससे आम लोगो का भरोसा मजबूत हो सके।
सबसे ज्यादा चर्चा उस मामले को लेकर है जब नेबुआ रायगंज निवासी गोविंद गुप्ता ने दावा किया कि उनकी चोरी की गई बाइक नेपाल में मिली। पीड़ित पक्ष का कहना है कि बाइक के साथ एक चोर भी पकड़ा गया था और स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी। सूचना पर नेबुआ नौरंगिया थाने के दरोगा मणिन्द्र राय व आरक्षी दीपक यादव अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पारकर नेपाल के नवलपरासी जिले के थाना बेलाटारी पहुचे तथा नेपाल पुलिस से बातचतक कर आरोपी अखिलेश पुत्र रमाकांत एंव मोटरसाइकिल को लेकर नेबुआ नौरंगिया थाने आयी और यहा तहरीर बदलवाकर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके पूरी कहनी ही बदल दी। नतीजतन इस पूरे प्रकरण के बाद जो सवाल खड़े हुए, वह एक चोरी की घटना नहीं, वरन पूरे थाना तंत्र की कार्यप्रणाली को बहस के केंद्र में ला दिया है।
🔴नेपाल कनेक्शन ने बढ़ाई बेचैनी
विधि विशेषज्ञों का कहना है कि चोरी की बाइक वास्तव में अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पार नेपाल तक पहुंच गई थी, तो यह साधारण चोरी का मामला नहीं माना जा सकता। इससे यह आशंका भी पैदा होती है कि कहीं कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि यदि ऐसा कोई नेटवर्क काम कर रहा है तो उसकी पड़ताल कितनी गंभीरता से हुई?क्षेत्र में चर्चा है कि जब पीड़ित खुद अपनी बाइक की तलाश करते हुए नेपाल तक पहुंच सकता है, तो पुलिस की खुफिया और निगरानी व्यवस्था आखिर क्या कर रही थी?
🔴दो माह, सात चोरी और नतीजा शून्य
क्षेत्र के अलग-अलग गांवों और बाजारों से लगातार बाइक चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। कई पीड़ितों का कहना है कि तहरीर देने के बाद भी उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला। बरामदगी और गिरफ्तारी के नाम पर ठोस परिणाम दिखाई नहीं दिए ऐसे में सवाल यह है कि आखिर चोरों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए? क्या उन्हें कानून का डर नहीं रहा, या फिर कार्रवाई का स्तर इतना कमजोर हो गया है कि अपराधियों को पुलिस से कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा है?
🔴 गश्त पर भी उठ रहे सवाल
लगातार हो रही चोरियों के बाद पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। लोगों का कहना है कि बाजार, बैंक, पेट्रोल पंप, शादी समारोह और सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी मजबूत होती तो शायद तमाम घटनाएं रोकी जा सकती थीं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि चोरी की घटनाओं के बाद सक्रियता दिखाने के बजाय कार्रवाई कागजी ज्यादा और जमीनी कम दिखाई देती है। यही कारण है कि अपराधियों के हौसले टूटने के बजाय बढ़ते नजर आ रहे हैं।
🔴 सवाल सीधे थाना नेतृत्व पर
किसी भी थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग की अंतिम जिम्मेदारी थाना प्रभारी की मानी जाती है। ऐसे में जब लगातार चोरी की घटनाएं हों, बरामदगी नगण्य हो और कार्रवाई को लेकर विवाद भी पैदा हो जाएं, तो स्वाभाविक रूप से सवाल थाना नेतृत्व तक पहुंचते हैं।
🔵 रिपोर्ट – संजय चाणक्य