खबर शहर , Agra News: सीकरी की पहाड़ियों में बनी रॉक पेंटिंग होंगी संरक्षित, मिली मंजूरी – INA

आगरा। आठ साल के लंबे इंतजार के बाद फतेहपुर सीकरी की रॉक पेंटिंग को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संरक्षित करने की मंजूरी मिल गई। बृहस्पतिवार को नई दिल्ली में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की तकनीकी मूल्यांकन समिति (टीईसी) की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

एएसआई महानिदेशक यदुवीर सिंह की अध्यक्षता में धरोहर भवन, नई दिल्ली में हुई बैठक में आगरा के फतेहपुर सीकरी की रॉक पेंटिंग, लद्दाख के स्कुरबुचन स्थित प्राचीन किला, लद्दाख के ही नुब्रा स्थित टेगर में मौजूद जिमखांग गोंगमा और झारखंड के चतरा जिले में मौजूद कोलहुआ पहाड़ी पर मौजूद रॉक कट जैन मूर्तियों, शिलालेख और किले की दीवार को संरक्षित करने पर चर्चा की गई।

फतेहपुर सीकरी की रॉक पेंटिंग को संरक्षित करने पर सहमति बनी। इस बैठक के बाद अब संरक्षण की प्रक्रिया को एएसआई शुरू करेगा। रसूलपुर, पतसाल और जाजौली की पहाड़ियों में मौजूद रॉक पेंटिंग के संरक्षण की प्राथमिक अधिसूचना जारी की जाएगी। आपत्तियों के बाद अंतिम अधिसूचना जारी होगी।

प्रागैतिहासिक काल की हैं रॉक पेंटिंग

वर्ष 2020 में इन पेंटिंग को संरक्षित करने का प्रस्ताव दिल्ली भेजा गया था, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में कमियों के कारण इन पर फैसला नहीं हो सका। प्रागैतिहासिक काल की इन पेंटिंग को संरक्षित करने के लिए आगरा के एक्टिविस्ट डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने एएसआई से इस मामले पर लगातार पैरवी की और आरटीआई के जरिये सवाल पूछे।

तीन साल पहले तत्कालीन केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने भी इन पेंटिंग को सीकरी आकर देखा था। एएसआई की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिता कुमार ने बीते माह दोबारा नए सिरे से प्रस्ताव भेजा, जिस पर मूल्यांकन समिति ने यह फैसला लिया है।

आठ साल पहले हाथीखाना हुआ था संरक्षित

आगरा में 70 स्मारक संरक्षित हो चुके हैं। आठ साल पहले अगस्त 2018 में मुगल काल की दो धरोहरें हाथी खाना और हवेली आगा खां संरक्षित हुई थी। हाथीखाना ताजमहल के पूर्वी गेट पर बना है, जबकि हवेली आगा खां यमुना किनारे ताजमहल के पूर्वी गेट पर मौजूद है। इन दोनों स्मारकों के संरक्षण के बाद अब जाकर प्रागैतिहासिक काल की रॉक पेंटिंग सहेजी जाएंगी।


Credit By Amar Ujala

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