Tach – पैसा अमेरिका का, चिप Nvidia की और टेंशन चीन को, क्यों सिर पकड़कर बैठ गया ड्रैगन?

नई दिल्ली. नई दिल्ली. एआई को लेकर अमेरिका और चीन के बीच जो शह और मात का खेल चल रहा है, उसमें अब अचानक ऐसा मोड़ आया है जिसने बीजिंग में बैठे चीनी रणनीतिकारों के माथे पर पसीना आ गया है. अमेरिकी कंपनी एनवीडिया ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक चौसर पर एक ऐसी चाल चली है, जिससे चीनी चिप कंपनियों की तो मानो सांसें ही अटक गई हैं और ड्रैगन इस डर से सिर पकड़कर बैठ गया है कि कहीं यह नया दांव उसके पूरे टेक-इकोसिस्टम को ही पंगु न बना दे.
एनवीडिया (Nvidia) ने AI डेटा सेंटर्स के लिए 500 अरब डॉलर जुटाने का ऐलान किया है. इसके लिए कंपनी ने दुनिया के छह बड़े वित्तीय संस्थानों के साथ हाथ मिलाया है. ब्लैकरॉक, ब्लैकस्टोन और गोल्डमैन सॉक्स जैसे संस्थानों के साथ मिलकर एनवीडिया विशेष कंप्यूट फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म्स तैयार करेगा. ये प्लेटफॉर्म ग्राहकों को एनवीडिया की चिप खरीदने और AI फैक्ट्री बनाने को पैसा मुहैया कराएंगे. कंपनी के इस कदम से चीन के माथे पर पसीना आ रहा है.
चीन के लिए बड़ा झटका
चीन के सिर पकड़कर बैठने का कारण भी जायज है. यदि एनवीडिया ने 500 अरब डॉलर जुटाकर अपनी योजना धरातल पर उतार दिया तो चीन की कैम्ब्रिकॉन टेक्नोलॉजीज, हाइगॉन इन्फॉर्मेशन और बिरेन टेक्नोलॉजी जैसी चिपमेकर कंपनियों को भारी नुकसान होगा. दुनिया के साथ-साथ खुद चीन की निर्भरता भी अमेरिकी सीयूडीए (CUDA) सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम पर हमेशा के लिए पक्की हो जाएगी. ऐसा होना चीन के लिए न आर्थिक और न ही रणनीतिक, यानी किसी भी लिहाज से फायदेमंद नहीं होगा. वहीं, विश्लेषकों का कहना है कि चीन और अमेरिका के की इस AI की इस होड़ में एसेट बबल्स बनना तय है और एक दिन इसका फूटना भी.
कैसे होगा खेल?
एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी डेटा सेंटरों को जब अमेरिकी बैंकों से सस्ती फाइनेंसिंग पर एनवीडिया के प्रीमियम जीपीयू मिल जाएंगे, तो चीन की कैम्ब्रिकॉन टेक्नोलॉजीज, हाइगॉन इन्फॉर्मेशन और बिरेन टेक्नोलॉजी जैसी चिप निर्माता कंपनियों पर संकट आ जाएगा. इन कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदार मिलना नामुमकिन सा हो जाएगा. AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अंधाधुंध खर्च के चलते चीनी टेक कंपनियों की बैलेंस शीट पर भी भारी दबाव दिखने लगा है.
वीचैट (WeChat) की पैरेंट कंपनी टैंसेंट होल्डिंग्स (Tencent Holdings) का इसका ताजा उदाहण है. कंपनी का तिमाही राजस्व 11% बढ़कर 204.8 अरब युआन हुआ, लेकिन नेट प्रॉफिट केवल 0.7% बढ़कर 56 अरब युआन पर अटक गया. इसका कारण कंपनी का AI पर कैपेक्स तीन गुना बढ़कर 52.8 अरब युआन होना है.
FCC ला रहा है नया प्रतिबंध
कुछ चीनी विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि विदेशों में AI फैक्ट्रियां बनने से चीन के सर्वर और कूलिंग उपकरणों का निर्यात बढ़ेगा, लेकिन अमेरिका ने इस रास्ते को भी बंद करने की तैयारी कर ली है. अमेरिकी एजेंसी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) साल के अंत से पहले ऐसा नियम ला रही है, जिससे चीन में बने ऑप्टिकल ट्रांसीवर के आयात पर पूरी तरह बैन लग जाएगा. अमेरिका ने इन चीनी उपकरणों से डेटा चोरी या साइबर जासूसी का खतरा बताया है.
चीन की क्या है तैयारी?
ड्रैगन भी चुपचाप बैठने के मूड में नहीं है. चीन अपनी कंप्यूटिंग क्षमता को वित्तीय संपत्ति (Securitization) बनाने की दौड़ में लगा है. चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस के रिसर्चर झांग युनक्वान ने सुझाव दिया है कि चीन को AI कंप्यूटिंग पावर के फ्यूचर्स और ऑप्शंस जैसे वित्तीय उत्पाद बाजार में उतारने चाहिए. इससे चिप्स की ट्रेडिंग और फाइनेंसिंग आसान होगी. चीन ने राष्ट्रीय कंप्यूटिंग नोड्स और कंप्यूटिंग फ्यूचर्स के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी हैं. वहीं, चीनी डेटा सेंटर ऑपरेटर 21Vianet Group ने हाल ही में करीब 6.3 अरब युआन के दो कंप्यूटिंग REITs पूरे किए हैं.
आ सकता है 2008 जैसा सबप्राइम संकट
चीनी विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सीधे तौर पर चीन के AI मिशन की रीढ़ तोड़ने जैसा है. बीजिंग स्थित टेक पोर्टल Guancha.cn के लेखक लाई जियाकी ने इस पूरे मॉडल को एक ‘क्लोज्ड लूप’ (बंद चक्र) बताया है. उनका कहना है, “इन्वेस्टर्स को डर है कि यह एक ऐसा चक्र है जहां पैसा एक हाथ से घूमकर दूसरे हाथ में जा रहा है. एनवीडिया फाइनेंसिंग दिलवाती है, ग्राहक उसी पैसे से एनवीडिया की चिप्स खरीदते हैं और वह पैस वापस Nvidia की बैलेंस शीट में दर्ज हो जाता है.”
लाई जियाकी का कहना है कि इससे वास्तविक औद्योगिक मांग के बजाय बाहरी कर्ज के सहारे चिप्स की मांग पैदा हो सकती है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि AI एप्लिकेशन्स से उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं मिला, तो यह वित्तीय जोखिम ठीक 2008 के सबप्राइम मॉर्गेज संकट जैसा बवंडर खड़ा कर सकता है. AI बूम में मंदी आई तो Nvidia और उसके वॉल स्ट्रीट पार्टनर्स को अमेरिकी कांग्रेस और रेगुलेटरी जांच का उसी तरह सामना करना पड़ेगा, जैसा 2008 के संकट में बैंकों को क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप को लेकर करना पड़ा था.
खतरे और भी हैं
ताइवान के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री लैंग शियानपिंग का कहना है कि चीन और अमेरिका के बीच AI की इस होड़ में एसेट बबल्स बनना तय है. लेकिन दुनिया को इस बुलबुले के फूटने से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अंततः इस जंग में खड़ा किया जा रहा AI इंफ्रास्ट्रक्चर ही भविष्य में रियल प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करेगा.
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