यूपी – सुना है क्या: ‘सुननी पड़ी फटकार’, साथ ही ‘पूरी शिद्दत से खेल रहे साहब और डॉक्टर बने आर्थिक सलाहकार’ के किस्से – INA

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘मुखिया की सुननी पड़ी फटकार’ की कहानी। इसके अलावा ‘पूरी शिद्दत से खेल रहे साहब’ और ‘डॉक्टर बने आर्थिक सलाहकार’ के किस्से भी चर्चा में रहे। . पढ़ें, नई कानाफूसी…

मुखिया की सुननी पड़ी फटकार

प्रदेश में पूर्वांचल के एक प्रमुख विश्वविद्यालय की प्रमुख के ग्रह-नक्षत्र आज कल सही नहीं चल रहे हैं। पहले तो उन्हें विश्वविद्यालय के एक बड़े आयोजन में ही कैंपस के हालात को लेकर सुनना पड़ा था। इसके बाद परिसर में ही उन्हें भारी विरोध का भी सामना करना पड़ा है। चर्चा है कि हाल ही में प्रदेश स्तर की हुई एक बैठक में प्रमुख ने भी एक मामले में जब उन्होंने कुछ बोलना चाहा तो उन्हें चुप करा दिया। मुखिया ने उनसे इस मामले में नाराजगी भी जताई। इसे लेकर अब राज्य विश्वविद्यालयों में चर्चा का बाजार गर्म है।

पूरी शिद्दत से खेल रहे साहब

खेल मंत्रालय के बड़े सेंटर में प्रतिनियुक्ति पर तैनात साहब नौकरी के मजे लेने में व्यस्त हैं। खेल प्रोत्साहन से उनका रिश्ता कितना गहरा है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मुख्यालय से योजना आते ही फाइल सीधे अधीनस्थ की गोद में पहुंच जाती है और साहब की जिम्मेदारी वहीं खत्म। हां, मंत्री या किसी बड़े खेल अधिकारी के कदम सेंटर में पड़ें तो साहब अचानक पूरे फॉर्म में आ जाते हैं। महकमे में चर्चा है कि खेलों की चिंता हो न हो, साहब अपनी पारी पूरी शिद्दत से खेल रहे हैं।

डॉक्टर बने आर्थिक सलाहकार

सेहत महकमे के मुख्यालय में तैनात एक डॉक्टर बात-बात में अपनी बिरादरी की धौंस देते हैं। उन्हें मुख्यालय से हटाकर मरीजों के उपचार में लगाने के लिए कई बार मुखिया के मुखिया यानी आलाकमान आदेश भी जारी कर चुके हैं। फिर भी डॉक्टर के मुखिया अपने मुखिया के आदेश को नजरअंदाज कर रहे हैं। वह चहेते डॉक्टर को हटाने के लिए तैयार नहीं है। विभाग में चर्चा है कि ये जब से मुखिया के आर्थिक सलाहकार की भूमिका में आए हैं, तब से इनका मन मरीजों के उपचार में नहीं लगता है। इसलिए ये अस्पताल जाने के बजाय मुख्यालय में डटे रहते हैं। अब देखना यह है कि मुख्यालय के मुखिया पर आला मुखिया का असर होता है या नहीं।


Credit By Amar Ujala

Back to top button