Sport : Explainer: ऑस्ट्रेलिया में 2 दिन में टेस्ट मैच खत्म, फिर भी पिच 'फिट'… भारतीय उपमहाद्वीप से इतनी नफरत और दोहरा मापदंड क्यों? #INA

Explainer: क्रिकेट जगत में इस बात पर बहस चल रही है कि जब पश्चिमी देशों में कोई टेस्ट मैच 2 दिन में खत्म होता है, तो उसे ‘शानदार तेज गेंदबाजी का प्रदर्शन और उनकी उपलब्धि’ कहा जाता है. लेकिन जब भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान) में ऐसा होता है, तो पिच को ‘क्रिकेट और बल्लेबाजों के लिए खतरा’ बता दिया जाता है. हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की धरती पर बांग्लादेश के खिलाफ खेला गया दूसरा टेस्ट मैच इसका सबसे ताजा उदाहरण है, जिसने पश्चिमी देशों के इस दोहरे रवैये को एक बार फिर उजागर कर दिया है. तो आइए, इस आर्टिकल में समझने की कोशिश करते हैं कि ऐसा क्यों होता है. 

मकाय के मैदान पर 2 दिन ही खत्म हुआ ऑस्ट्रेलिया-बांग्लादेश का दूसरा टेस्ट मैच

बांग्लादेश की टीम ने 23 साल के लंबे वक्त के बाद ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था, जहां दोनों टीमों के बीच 2 टेस्ट मैचों की सीरीज खेली गई. पहला टेस्ट मैच डार्विन में खेला गया, जिसे बांग्लादेश ने 9 विकेट से जीतकर ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की. इस ऐतिहासिक जीत के बाद बांग्लादेशी टीम काफी आत्मविश्वास में थी और लगा कि वह ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में दूसरा टेस्ट भी हराकर सीरीज अपने नाम कर सकती है, लेकिन मकाय के मैदान पर खेला गया दूसरा टेस्ट मैच सिर्फ 2 दिनों के भीतर ही खत्म हो गया. पहले ही दिन 18 विकेट गिर गए थे और पिच पर इतना अधिक अतिरिक्त उछाल और गति थी कि बांग्लादेश की पहली पारी 67 रनों पर सिमट गई थी. 

मकाय पिच को ICC ने माना फिट

इसके बाद ऑस्ट्रेलिया जब बल्लेबाजी करने आई, तो पहले ही दिन उनके भी 8 विकेट गिर गए. इसके बाद दूसरे दिन ऑस्ट्रेलिया ने पारी और 51 रनों से बांग्लादेश को हराकर सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली. ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने मैच में 10 विकेट चटकाए. यानी 2 दिन में ही मैच खत्म हो गया, लेकिन फिर भी आईसीसी की ओर से मकाय की पिच को पूरी तरह फिट और सुरक्षित माना गया है. इसके बाद से कई सवाल उठ रहे हैं कि ऐसा अगर उपमहाद्वीप (भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान) में होता है, तो पश्चिमी मीडिया में बवाल मच जाता है.  

पश्चिमी देशों की मीडिया और दिग्गजों का डबल स्टैंडर्ड

चूंकि यह मैच ऑस्ट्रेलिया में हरी और उछाल भरी पिच पर हुआ था, इसलिए पश्चिमी मीडिया ने इसे ‘मिचेल स्टार्क का घातक स्पेल’, ‘तेज गेंदबाजी का मास्टरक्लास’ और ‘बांग्लादेशी बल्लेबाजों की तकनीकी कमजोरी करार दिया. किसी ने भी मकाय की पिच को ‘अनफिट’ या ICC द्वारा बैन करने की मांग नहीं की. क्रिकेट इतिहास के शुरुआती दशकों में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का वर्चस्व था. वहां की मीडिया की मानसिकता यह बन चुकी है कि गेंद का हवा में तैरना (Swing) या टप्पा खाकर बाहर-अंदर निकलना (Seam) ही ‘असली क्रिकेट’ है. जब भारतीय उपमहाद्वीप में गेंद पहले ही दिन से टर्न होने लगती है और स्पिनर्स को मदद मिलने लगती है, तो उसे एक ‘अस्वाभाविक’ व्यवहार माना जाता है. उनके अनुसार, टर्न सिर्फ चौथे या पांचवें दिन होना चाहिए, जबकि तेज गेंदबाजों के लिए पहले घंटे से मिलने वाली मदद को वो ‘पिच में कितनी जान है’ कहते हैं. 

घरेलू फायदा या खराब पिच? विदेशी मैदानों पर दिग्गजों की चुप्पी!

जब गाबा में साल 2022 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच 2 दिन में खत्म हुआ हो, केपटाउन में साल 2024 में भारत-साउथ अफ्रीका मैच सिर्फ 1.5 दिन में ही खत्म हो गया हो, या अब फिर बांग्लादेश-ऑस्ट्रेलिया का मैच 2 दिन में खत्म हुआ हो और एक दिन में 15 से 18 विकेट गिरते हैं, तो विदेशी दिग्गज इसे ‘कठिन परिस्थितियां’ कहकर बल्लेबाजों को दोष देते हैं.

उपमहाद्वीप की पिचों पर पश्चिमी मीडिया और दिग्गजों का हंगामा

जब भारत में स्पिनरों के कारण मैच जल्दी खत्म होता है, तो इसे ‘पिच डॉक्टरिंग’ (पिच के साथ जानबूझकर की गई छेड़छाड़) का नाम दे दिया जाता है. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के तमाम दिग्गज इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं और पिच की आलोचना शुरू कर देते हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की अपनी पिच पर आज सभी चुप हैं. कोई भी 2 दिन में ही मैच खत्म होने को लेकर पिच की आलोचना नहीं कर रहा है.

विदेशी मीडिया को स्वीकार करनी होगी खेल की सच्चाई

क्रिकेट एक ऐसा खेल है जो अपनी विविधता के लिए जाना जाता है. अगर ऑस्ट्रेलिया में मिचेल स्टार्क 10 विकेट लेकर 2 दिन में मैच खत्म कर सकते हैं और वह ‘महान गेंदबाजी’ है, तो उपमहाद्वीप में रवीचंद्रन अश्विन या रवींद्र जडेजा द्वारा 2 दिन में मैच खत्म किया जाना भी ‘महान स्पिन गेंदबाजी’ है. विदेशी मीडिया को यह स्वीकार करना होगा कि जिस तरह तेज और उछाल भरी पिचें क्रिकेट का हिस्सा हैं, उसी तरह सूखी और टर्निंग पिचें भी खेल की कला का एक अहम हिस्सा हैं.

ऐसे तय होता है क्रिकेट में दोहरे मापदंड 

परिस्थितिऑस्ट्रेलिया/इंग्लैंड में (जैसे मकाय टेस्ट, 2026)भारतीय उपमहाद्वीप में (टर्निंग पिच)
मैच 2 दिन में खत्म होना“मिचेल स्टार्क ने कहर बरपाया”, “गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन“टेस्ट क्रिकेट की मौत”, “पिच खेलने लायक ही नहीं थी”
बल्लेबाजों का फ्लॉप होना“बल्लेबाज उछाल को संभाल नहीं पाए”“पिच पर भूत कूद रहे हैं, लॉटरी सिस्टम बन गया है”
विशेषज्ञों की राय“पिच में जान थी, जो टेस्ट क्रिकेट के लिए रोमांचक है”“पिच पर पहले दिन से धूल उड़ रही थी, यह घटिया पिच है”

यह भी पढ़ें:  ध्रुव जुरेल ने कोलंबो टेस्ट में शतक जड़ बनाया कीर्तिमान, टेस्ट क्रिकेट में ये कारनामा करने वाले बने सिर्फ दूसरे भारतीय कीपर

Explainer: ऑस्ट्रेलिया में 2 दिन में टेस्ट मैच खत्म, फिर भी पिच 'फिट'… भारतीय उपमहाद्वीप से इतनी नफरत और दोहरा मापदंड क्यों?





देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,

#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY

Copyright Disclaimer :->/b>Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on newsnationtv.com, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,

Back to top button