Sport : Explainer: इंजरी के बाद भी कैसे क्रिकेट मैच में हिस्सा ले पाते हैं खिलाड़ी? जानिए किस चीज से मिलती है खेलने की ताकत #INA

Cricketers Injuries : क्रिकेट का गेम कापी रोमांचक होता है. इस चाकाचौंद से भरे खेल में फैंस को काफी मजा आता है. क्रिकेटर जब मैदान पर छक्के-चौकों की बरसात करते हैं, तो फैंस को झूमने का मौका मिलता है. वहीं गेंदबाज जब विकेट चटकाकर स्टंप से गिल्लियां बिखेरते हैं तो फैंस को खुश होने का मौका मिलता है. क्रिकेट मैच में 2 टीमों के कुल 22 खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहाते हैं और फैंस का खेल के द्वारा मनोरंजन करते हैं.

क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ी जब अपनी टीम को बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर जीत दिलाते हैं तो फैंस उनकी जमकर तारीफ करते हैं और उनके लिए सोशल मीडिया पर भी अच्छा-अच्छा लिखते हैं. वहीं कुछ फैंस कभी-कभी खिलाड़ियों को उनके निराशाजनक प्रदर्शन पर जमकर खरी-खोटी भी सुनाते हैं. लेकिन उन्हें नहीं पता होता है कि, वो क्रिकेटर्स किस हालात में मैदान पर खेल रहे हैं. 

क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ी कभी-कभी चोट के साथ भी खेलते हैं. क्रिकेट प्लेयर इंजरी के बाद भी मैदान पर अपनी टीम को जीत दिलाने और अपने देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उतरते हैं. इस दौरान वो खिलाड़ी काफी दर्ज में होते हैं. उनकी पीढ़ा का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. लेकिन इस सबके बीच सवाल उठता है कि, आखिर इंजरी के बाद भी खिलाड़ी कैसे क्रिकेट मैच में हिस्सा ले पाते हैं. किस चीज उन्हें मैच खेलने की ताकत मिलती है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

चोट के बाद भी क्रिकेट खेलते हैं खिलाड़ी?

क्रिकेट प्लेयर्स में अपने देश के प्रति खेलने का जोश और जूनन होता है. इसके बाद ही वो खिलाड़ी इंजरी के बाद भी खेल पाते हैं. ऐसा ही कुछ भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने किया था. उन्होंने जब 2023 वनडे वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया था, तब वो चोटिल थे लेकिन उन्होंने भारत के प्रति अपना कर्तव्य समझा और इंजरी के साथ वर्ल्ड कप खेला. वो उस टूर्नामेंट में 7 मैचों में 24 विकेट हासिल किए. इस दौरान शमी ने 7 विकेट सेमीफाइनल मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ चटकाए थे. इसके बाद शमी में अपनी इंजरी पर काम किया और उनकी एडी की सर्जरी हुई थी. 

इस बात से साफ होता है कि, खिलाड़ी इंजरी के साथ भी क्रिकेट खेल सकते हैं. लेकिन इंजरी के बाद क्रिकेटर का मैच खेल पाना इस बात पर निर्भर करता है कि, चोट कितनी गंभीर है और शरीर का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ है. हर चोट के बाद खिलाड़ी को मैदान पर उतरने की अनुमति नहीं मिलती. कुछ खास मौकों पर ही उन्हें चोट के साथ खेलने के लिए अनुमति मिल जाती है. 

चोट के बाद कैसे खेल पाते हैं खिलाड़ी?

मेडिकल जांच : इंजरी के बाद मैच खेलने के लिए सबसे पहले खिलाड़ी की जांच होती है. उसके बाद उनकी चोट की गंभीर देखी जाती है. अगर वो चोट के साथ मैच खेल सकता है, तो उसे खेलने की अनुमति दी जाती है. टीम के डॉक्टर और फिजियो चोट का आकलन करते हैं और तय करते हैं कि खिलाड़ी खेल सकता है या नहीं.

फिजियोथेरेपी और रिहैब : चोट के अनुसार स्ट्रेचिंग, एक्सरसाइज और रिहैब से शरीर को दोबारा खेलने के लिए तैयार किया जाता है. खिलाड़ी को मैच खेलने से पहले या मैच के बाद चोल लगी है और उसे मैच से कुछ घंटों पहले ठीक किया जा सकता है तो उसे मैच खेलने की अनुमति मिल जाता है. मैच के दौरान चोटिल होने के बाद भी खिलाड़ी टेस्ट मैचों में अगले दिन या वनडे और टी20 मैचों में कुछ घंटो बाद खेलने के लिए ठीक होकर आ सकता है. ऐसा ऋषभ पंत और इंग्लैंड के क्रिस वोक्स के साथ भी हुआ था. पंत पैर में चोट के बाद खेलने आए वहीं वोक्स हाथ में चोट के बाद एक हाथ से खेलने के लिए आए.

 

टेपिंग और सपोर्ट : खिलाड़ियों को इंजरी के बाद मैच खेलने के लिए कभी कभी टेपिंग और सपोर्ट का सहारा भी लेना पड़ जाता है. कुछ चोटों में प्रभावित हिस्से को टेप, बैंडेज या दूसरे सपोर्ट से स्थिर किया जाता है, जिससे खिलाड़ी को खेलने में मदद मिल सकती है. 

दर्द और सूजन का प्रबंधन (दवा और इंजेक्शन) : खिलाड़ियों की चोट अगर ज्यादा है, और उन्हें दर्द हो रहा है तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर की निगरानी में उपचार के जरिए दर्द और सूजन को नियंत्रित किया जा सकता है. इस दौरान उन्हें दवाइयां दी जा सकती है. वहीं कभी-कभी खिलाड़ी इंजेक्शन लेकर भी खेलते हैं. ये इंजेक्शन दर्द कम करने और उस एरिए को शून्न कर देता है, जहां पर चोट लगी है, जिससे कुछ समय के लिए वहां की चोट का पता नहीं चलता है लेकिन लंबे समय में इसका बड़ा नुकसान होने का खतरा होता है. 

फिटनेस टेस्ट : इंजरी के बाद भी मैच खेलने से पहले खिलाड़ी को फिटनेस टेस्ट भी कभी-कभी देना पड़ता है. खिलाड़ी को दौड़ने, बल्लेबाजी, गेंदबाजी या फील्डिंग जैसी गतिविधियां करके अपनी क्षमता साबित करना पड़ जाता है. इसके साथ ही खिलाड़ी को चोट के बाद भी मानसिक मजबूत दिखानी पड़ती है. 

खिलाड़ी को किस चीज से मिलती है खेलने की ताकत?

इंजरी के बाद भी खिलाड़ियों को खेलने की ताकत आमतौर पर मेडिकल ट्रीटमेंट, फिजियोथेरेपी, रिहैबिलिटेशन, फिटनेस, सही पोषण और दर्द/सूजन के लिए दी जाने वाली दवाईयों और इंजेक्शन से मिलती है. अगर चोट के बावजूद खिलाड़ी मैच खेल रहा है, तो उस स्थिति उसे खलने के लिए तैयार करने कि लिए दवाईयां दी जाती है. कभी कभी खिलाड़ी दर्द कम महसूस होने के लिए दर्द निवारक इंजेक्शन लेते हैं. 

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