Technology, अब एक व्हाट्सएप अकाउंट में जोड़ सकेंगे कई पासकी, आ गए 3 जबरदस्त सिक्योरिटी फीचर्स – Whatsapp Advanced Passkey 2fa Alphanumeric Password Call Screening Security Features — INA

सार

WhatsApp ने यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई नए फीचर्स पेश किए हैं। अब एक अकाउंट में एक से ज्यादा पासकी (Passkey) जोड़ी जा सकेगी। साथ ही टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) में अल्फान्यूमेरिक पासवर्ड सेट करने और अनजान कॉल के लिए नई जानकारी भी मिलेगी।

WhatsApp पर अब अकाउंट की सुरक्षा पहले से ज्यादा मजबूत होने वाली है। Meta के स्वामित्व वाले इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ने पासकी, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और कॉल स्क्रीनिंग से जुड़े नए फीचर्स पेश किए हैं। कंपनी के मुताबिक, दुनियाभर में एक अरब से ज्यादा यूजर्स पासकी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

नए अपडेट के बाद खास तौर पर उन यूजर्स को फायदा मिलेगा, जो एक ही WhatsApp अकाउंट को अलग-अलग Android या iOS डिवाइस पर इस्तेमाल करते हैं। अब ऐसे यूजर्स अपने अकाउंट में एक से ज्यादा Passkey जोड़ सकेंगे।अब एक अकाउंट में जोड़ सकेंगे कई Passkey

  • WhatsApp ने Android यूजर्स के लिए Passkey सपोर्ट 2023 में शुरू किया था। इसके बाद 2024 में इसे iOS यूजर्स के लिए भी उपलब्ध कराया गया। Passkey की मदद से यूजर बिना पारंपरिक पासवर्ड टाइप किए फिंगरप्रिंट, Face ID या फोन के स्क्रीन लॉक से अपने अकाउंट में लॉगिन कर सकता है।
  • अब WhatsApp यूजर्स एक ही अकाउंट के लिए अलग-अलग डिवाइस पर अलग Passkey बना सकेंगे। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति अपना WhatsApp अकाउंट Android और iPhone दोनों पर चलाता है तो वह दोनों डिवाइस के लिए अलग Passkey सेट कर सकता है।
  • इसके लिए WhatsApp की सेटिंग्स में जाकर Account Settings और फिर Passkey सेक्शन में जाना होगा। यहां से नया Passkey तैयार किया जा सकता है।

बदल गया पासवर्ड सेट करने का तरीका

WhatsApp ने टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA में भी बदलाव किया है। अब यूजर्स सिर्फ छह अंकों की PIN तक सीमित नहीं रहेंगे। कंपनी यूजर्स को अल्फान्यूमेरिक पासवर्ड बनाने का विकल्प दे रही है। इसमें अक्षरों और अंकों के साथ स्पेशल कैरेक्टर भी शामिल किए जा सकते हैं। लंबा और ज्यादा जटिल पासवर्ड अकाउंट की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

स्कैम रोकने के लिए स्मार्ट कॉल स्क्रीनिंग

  • WhatsApp ने Android यूजर्स के लिए कॉल स्क्रीनिंग को भी पहले से स्मार्ट बनाया है। अब किसी अनजान नंबर से कॉल आने पर एप अतिरिक्त जानकारी दिखाएगा।
  • यूजर कॉल रिसीव करने से पहले यह देख सकेगा कि कॉल किस देश से आ रही है। साथ ही यह जानकारी भी मिलेगी कि कॉल करने वाला व्यक्ति यूजर के साथ किसी कॉमन ग्रुप चैट में शामिल है या नहीं।
  • WhatsApp का कहना है कि यह जानकारी यूजर्स को अनजान कॉल का जवाब देने या उसे नजरअंदाज करने का फैसला लेने में मदद करेगी।
  • खासकर साइबर ठगी में अपराधी अक्सर जल्दबाजी और डर का माहौल बनाकर लोगों से प्रतिक्रिया करवाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में कॉल से जुड़ा अतिरिक्त संदर्भ यूजर को सावधान रहने का मौका देगा।

यह भी जानेंक्या है पासकी?

  • पासकी (Passkey) एक आधुनिक और बेहद सुरक्षित डिजिटल चाबी है, जिसे पासवर्ड को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए बनाया गया है। यह आपको अपने किसी भी अकाउंट (जैसे गूगल, एपल, अमेजॉन या बैंकिंग एप्स) में बिना कोई पासवर्ड टाइप किए, सिर्फ अपने फोन या कंप्यूटर के बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट, फेस आईडी) या स्क्रीन लॉक पिन (PIN) का उपयोग करके लॉगिन करने की अनुमति देता है।
  • पासकी को दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों (गूगल, एपल, माइक्रोसॉफ्ट) ने FIDO अलायंस और W3C के साथ मिलकर तैयार किया है ताकि इंटरनेट को अधिक सुरक्षित और आसान बनाया जा सके।

पासकी काम कैसे करता है?

  • पासकी क्रिप्टोग्राफी (Cryptographic Key Pairs) तकनीक पर काम करता है। जब आप किसी वेबसाइट पर अपनी पासकी बनाते हैं, तो दो चाबियां (Keys) जनरेट होती हैं- पब्लिक की और प्राइवेट की। पब्लिक की वेबसाइट या एप के सर्वर पर सेव होती है। यह कोई गुप्त कोड नहीं है, इसलिए इसके चोरी होने का कोई खतरा नहीं होता। वहीं, प्राइवेट की आपके डिवाइस (फोन, लैपटॉप या पासवर्ड मैनेजर) में सुरक्षित रूप से सेव हो जाती है। यह कभी किसी के साथ शेयर नहीं होती, यहां तक कि उस वेबसाइट को भी नहीं पता चलती।
  • जब आप लॉगिन करते हैं, तो वेबसाइट आपके डिवाइस को एक ‘चैलेंज’ भेजती है। आप अपने फिंगरप्रिंट या फेस आईडी से उसे अनलॉक करते हैं, जिससे दोनों चाबियां मैच हो जाती हैं और आप बिना पासवर्ड डाले लॉगिन हो जाते हैं।

पासकी के क्या फायदे हैं?

  • हैकिंग से पूरी सुरक्षा:पासकी को गेस (अनुमान) नहीं किया जा सकता और न ही इसे कोई चुरा सकता है।
  • फिशिंग प्रूफ:हैकर्स अक्सर असली जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाकर आपका पासवर्ड चुरा लेते हैं। लेकिन पासकी केवल उसी असली वेबसाइट या ऐप पर काम करेगी जिसके लिए उसे बनाया गया है।
  • क्लाउड सिंक:आपकी पासकी आपके Google एकाउंट (Android) या iCloud (Apple) पर सुरक्षित सिंक हो जाती है। इसका मतलब है कि अगर आपका फोन खो भी जाए, तो नए फोन में लॉगिन करते ही आपकी पासकी वापस आ जाएगी।
  • टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) की जरूरत नहीं:पासकी इतनी सुरक्षित है कि आपको बार-बार आने वाले OTP (वन टाइम पासवर्ड) के झंझट से मुक्ति मिल जाती है।

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