पार्टनर झगड़े के बाद चुप है तो पीछे न पड़ें:शांत होने का समय दें, भरोसा रखें; बार-बार हो तो खुलकर बात करें- INA NEWS

झगड़े के बाद पार्टनर अचानक बात करना बंद कर दे तो मन में कई सवाल आने लगते हैं- आखिर हुआ क्या, गलती किसकी थी और अब रिश्ता किस दिशा में जाएगा? विशेषज्ञों के मुताबिक, हर चुप्पी ‘साइलेंट ट्रीटमेंट’ यानी दबाव बनाने की कोशिश नहीं होती। कई बार इंसान गुस्से या भावनाओं से इतना भर जाता है कि तुरंत बात नहीं कर पाता। कुछ लोग इस डर से भी बातचीत रोक देते हैं कि गुस्से में ऐसी बात न कह दें, जिसका बाद में पछतावा हो। इसलिए पहले यह समझना जरूरी है कि पार्टनर शांत होने के लिए समय मांग रहा है या बिना बताए बात बंद कर रहा है। बिना बताए लंबे समय तक चुप रहना परेशानी बनता है अगर पार्टनर बिना बताए लंबे समय तक बात न करे, तो दूसरे व्यक्ति को समझ नहीं आता कि वह नाराज है, दुखी है या रिश्ता खत्म करना चाहता है। यही अनिश्चितता बेचैनी और असुरक्षा बढ़ाती है। मनोवैज्ञानिक रेचल नीडल के मुताबिक, चुप्पी सामने वाले को इस तरह महसूस करा सकती है जैसे उसे ठुकरा दिया गया हो। मैसेज पर यह स्थिति और मुश्किल हो जाती है, क्योंकि सामने वाले की आवाज, चेहरे के भाव और तुरंत मिलने वाले संकेत नहीं होते। ऐसे में छोटी बात भी बड़ी गलतफहमी बन सकती है। बार-बार जवाब मांगने से दूरी बढ़ सकती है ऐसी स्थिति में अक्सर एक व्यक्ति तुरंत बात करके झगड़ा सुलझाना चाहता है, जबकि दूसरा तनाव से बचने के लिए और दूर चला जाता है। पहला जितना ज्यादा फोन या मैसेज करता है, दूसरे को उतना ही ज्यादा दबाव महसूस हो सकता है। इसलिए पार्टनर को एक साफ संदेश देने के बाद थोड़ा समय दें। बार-बार फोन या मैसेज करने और बदले में खुद भी चुप हो जाने से बचें। इस दौरान टहलना, किसी भरोसेमंद दोस्त से बात करना या किसी दूसरे काम में ध्यान लगाना बेचैनी कम करने में मदद कर सकता है। बार-बार हो तो अपनी सीमा साफ बताएं एक बार की चुप्पी से पूरे रिश्ते को खराब नहीं मानना चाहिए। लेकिन अगर बिना बताए बात बंद करना बार-बार हो और बातचीत के बाद भी व्यवहार न बदले, तो अपनी सीमा साफ बताना जरूरी है। ऐसे में कह सकते हैं- “अगर तुम्हें समय चाहिए तो मैं दूंगा, लेकिन अनिश्चित समय तक बात बंद रहना मेरे लिए ठीक नहीं है।” सीमा तय करने का मतलब रिश्ता खत्म करना नहीं है। इसका मतलब है कि दोनों के लिए यह साफ हो कि शांत होने के लिए स्पेस मिलेगा, लेकिन दूसरे को अनिश्चितता में छोड़ना रिश्ते का तरीका नहीं बनेगा। बात दोबारा शुरू होने पर पुराने झगड़े का पूरा हिसाब लगाने के बजाय यह समझने की कोशिश करें कि उस समय पार्टनर को किस चीज की जरूरत थी। इससे अगली बार ऐसी स्थिति को संभालना आसान हो सकता है।
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