यूपीपीसीएल का आदेश बेअसर, ‘बड़े बाबू योगेन्द्र ’ का रसूख बरकरार! अमित सिंह पर अब तक नही हुई कार्रवाई

🔴बड़े बाबू योगेन्द्र का प्रभाव या विभाग की मजबूरी? यूपीपीसीएल के आदेश बेअसर
🔴 दस हजार की नौकरी, स्टोर का प्रभार और संपत्ति पर सवाल! यूपीपीसीएल के आदेश के बाद भी अमित सिंह के खिलाफ कार्रवाई ठप
कुशीनगर। जिले के पडरौना विद्युत उपकेन्द्र में आउटसोर्सिंग के जरिए ऑपरेटर के पद पर तैनात अमित सिंह के नियम विरुद्ध तरीके से स्टोर का प्रभार संभालने के मामले में शुरू हुई के कार्रवाई मे रोडा बने गोरखपुर बिजली विभाग में तैनात बड़े बाबू योगेन्द्र कुमार गुप्ता का प्रभाव चर्चा में है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि योगेन्द्र गुप्ता की ऊंची पहुंच और संरक्षण के चलते यूपीपीसीएल के निर्देश के बावजूद अमित सिंह के खिलाफ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। यही नहीं, अमित सिंह की कथित आर्थिक हैसियत और संपत्ति को लेकर भी विभाग में सवाल उठ रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि यूपीपीसीएल का आदेश भारी पड़ेगा या गोरखपुर बिजली विभाग के भण्डारण के बड़े बाबू योगेन्द्र गुप्ता का रसूख? क्या योगी सरकार में नियमों को ताक पर रखकर स्टोर का प्रभार संभालने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारी अमित सिंह पर कार्रवाई होगी, या फिर संरक्षण और पहुंच का दबाव जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई पर भारी पड़ेगा?
बतादे कि बीते दिनो मीडिया द्वारा बिजली विभाग के सबसे महत्वपूर्ण पटलो मे शुमार स्टोर का नियम विरुद्ध प्रभार लेकर बैठे आउटसोर्सिंग आररेटर अमित का मामला प्रमुखता से उठाने के बाद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने संज्ञान में लेकर अमित सिंह के खिलाफ जांच व कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए है।इसके बावजूद अब तक न तो कोई कार्रवाई की गयी और न ही जिम्मेदारी तय हुई। सूत्र बताते है कि तकरीबन पांच वर्ष पूर्व अमित सिंह की नियुक्ति आउटसोर्सिंग के जरिए आपरेटर के पद पर हुई थी। सूत्रो की माने तो गोरखपुर बिजली विभाग के भण्डारण मे तैनात बडे बाबू योगेन्द्र कुमार गुप्ता ने बिहार के मूल निवासी अमित सिंह व उनके भाई को अपने प्रभाव के दम पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से पडरौना व देवरिया उपकेन्द्र पर नियुक्त कराया है। इतना ही नही योगेन्द्र गुप्ता ने नियम विरुद्ध तरीके से न सिर्फ अमित सिंह को पडरौना स्टोर का प्रभार दिलाया है बल्कि अमित के भाई को भी नियम विरुद्ध तरीके से देवरिया विद्युत उपकेन्द्र मे स्टोर का प्रभार दिलाकर दोनो हाथो से मलाई काट रहे है। हलाकि सूत्रो के इस दावे की पुष्टि नही है लेकिन चर्चा जोरो पर है ऐसे मे इसकी जांच भी जरूरी है।
🔴किस आदेश और किस नियम के तहत मिला अमित को स्टोर का प्रभार
जानकार बताते है कि विद्युत विभाग में भण्डारण का पटल विभागीय संसाधनों और उपकरणों से जुड़े महत्वपूर्ण पटल हैं। ऐसे पटल की जिम्मेदारी किस कर्मचारी के पास होगी, इसका निर्धारण विभागीय आदेश और जिम्मेदारी के स्पष्ट निर्धारण से होना चाहिए। ऐसे में सवाल यह है कि अमित सिंह को स्टोर का प्रभार किस आदेश से मिला? आदेश किस सक्षम अधिकारी ने जारी किया? क्या आदेश विभागीय अभिलेखों में दर्ज है?आउटसोर्सिंग कर्मचारी को नियमित विभागीय जिम्मेदारी देने का नियम क्या है?
🔴 गोरखपुर के बड़े बाबू योगेन्द्र गुप्ता की चर्चा
पूरे मामले में गोरखपुर में बिजली विभाग में भण्डारण के बड़े बाबू के पद पर कार्यरत योगेन्द्र गुप्ता का नाम चर्चा में है। आरोप है कि उनके प्रभाव के चलते अमित सिंह को विभागीय व्यवस्था में असामान्य रूप व नियम विरुद्ध तरीके से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हुई है। यदि योगेन्द्र गुप्ता ने अमित सिंह को स्टोर ( भण्डारण) का प्रभार दिलाने अथवा कार्य कराने में कोई भूमिका निभाई है तो यह भी जांच का विषय है, उन्होंने किस अधिकार के तहत ऐसा निर्देश दिया और क्या उसका कोई लिखित अभिलेख मौजूद है।
🔴 संपत्ति को लेकर उठ रहे हैं सवाल
अमित सिंह की कथित आर्थिक स्थिति को लेकर भी विभागीय सूत्रों और स्थानीय स्तर पर चर्चाएं खूब हो रही हैं। सीमित मानदेय पाने वाले. आउटसोर्सिंग कर्मचारी के पास महंगी कार और अन्य सुविधाएं होने के दावों के आधार पर उनकी आय और संपत्ति की जांच की मांग जोरो पर उठ रही है।इसलिए वास्तविकता आय, संपत्ति, वाहन और वित्तीय अभिलेखों की वैधानिक जांच भी जरूरी है।
🔴यूपीपीसीएल की कार्रवाई पर टिकी निगाहे
जब प्रकरण उच्च स्तर तक पहुंचा और यूपीपीसीएल की ओर से एससी को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए तो उम्मीद थी कि संबंधित अभिलेखों की जांच होगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।लेकिन निर्देश के बाद भी कार्रवाई ठंडे बस्ते मे है। ऐसे मे संबंधित अधिकारी को यह स्पष्ट करना होगा कि अब तक क्या जांच हुई, किस स्तर पर हुई और उसका परिणाम क्या रहा।आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं होना अपने आप में कई सवाल खड़ा करता है।
🔴 जांच का दायरा सिर्फ एक व्यक्ति तक न रहे सीमित
जानकारो का कहना है कि जांच हो रही है तो केवल अमित सिंह की भूमिका तक सीमित रखने के बजाय यह भी देखना भी जरूरी है कि स्टोर का वास्तविक प्रभार किसके पास था? प्रभार का लिखित आदेश किस अधिकारी ने जारी किया? स्टोर के स्टॉक और निर्गमन अभिलेख किसके नियंत्रण में रहे। आउटसोर्सिंग कर्मचारी अमित सिंह को स्टोर की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई? गोरखपुर बिजली विभाग के भण्डार के बडे बाबू योगेन्द्र कुमार गुप्ता की भूमिका क्या रही। यूपीपीसीएल के निर्देश के बाद स्थानीय स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
🔴 ‘मैनेज’ के खेल की चर्चा ने बढ़ाई बेचैनी
सूत्रो का कहना है कि कार्रवाई न होने के बाद अब विभागीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोगों का दावा है कि मामले को दबाने या मैनेज करने की कोशिश शुरू हो गयी है। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यही कारण है कि अब जांच की पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है जितना कि मूल आरोप। यदि आरोप गलत हैं तो जांच रिपोर्ट सामने आनी चाहिए और यदि अमित सिंह को बिना किसी आदेश के नियम विरुद्ध तरीके से स्टोर की जिम्मेदारी देकर नियमों का उल्लंघन किया गया है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।ऐसे मे यूपीपीसीएल के निर्देश के बाद भी यदि कार्रवाई नहीं होती है तो सवाल केवल अमित सिंह पर नहीं, बल्कि पूरी विभागीय व्यवस्था पर उठेगा जो जांच के आदेश के बावजूद कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ा पा रही है। अब देखना दिलचस्प है कि जांच की फाइल खुलती है या ‘मैनेज’ की चर्चा के बीच मामला फिर किसी ठंडे बस्ते में चला जाता है।
🔴 रिपोर्ट – संजय चाणक्य