UP News: BJP के नए प्रभारियों की फुल एनालिसिस: राम माधव के बाद संघ के भदौरिया-सहस्त्रबुद्धे की भी वापसी, बलूनी और द्विवेदी का बढ़ा कद – INA
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने संगठन के राज्य प्रभारियों और सह प्रभारियों की नई टीम घोषित कर दी है. नई सूची में कई वरिष्ठ नेताओं को एक से अधिक राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है तो कई राज्यों में स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अनुभवी और क्षेत्रीय चेहरों का संयोजन किया गया है. पार्टी ने पिछले महीने अगस्त में राष्ट्रीय टीम में भी बड़ा बदलाव करने के बाद अब राज्यों के प्रभारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर देने से पार्टी का नया संगठनात्मक ढांचा काफी हद तक सामने आ गया है.
पार्टी के प्रदेश प्रभारियों की सूची में एक खास बात यह है कि इस सूची में कुल 21 महिला नेताओं को प्रभारी और सह प्रभारी बनाया गया है. देश के 4 राज्यों में संगठन प्रभारी महिलाएं बनाई गई हैं जबकि 17 राज्यों में वह सह प्रभारी की भूमिका में भी हैं. बीजेपी ने जिन महिला नेताओं को प्रभारी बनाया है उसमें स्मृति ईरानी, डी पुरंदेश्वरी, भारती पवार और वर्षा बेन दोषी का नाम शामिल है.
65 प्रभारियों में से 32% महिलाओं की भागीदारी
कुल 65 प्रभारी और सह प्रभारियों में से 21 महिलाओं को भागीदारी देना पार्टी में महिला सशक्तिकरण के रूप में देखा जा रहा है. इस प्रकार से बीजेपी ने प्रभारी की सूची में 32% भागीदारी महिलाओं को दी है.
नई व्यवस्था में 6 नेताओं को एक साथ 2 राज्यों का प्रभार देना भी काफी अहम है. इस क्रम में हरीश द्विवेदी को बिहार के साथ-साथ कर्नाटक, स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ के साथ-साथ हरियाणा, सतीश पूनिया को पंजाब के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, राम माधव को तमिलनाडु के साथ-साथ उत्तराखंड और सुनील बंसल को तेलंगाना के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी गई है. जबकि अनिल एंटनी को नागालैंड का प्रभारी बनाया गया है और वे गोवा में सह प्रभारी की भूमिका भी निभाएंगे.
अहम राज्यों में संगठनात्मक प्रभारियों पर निर्भर
बीजेपी में प्रभारियों की नई व्यवस्था से साफ हो गया है कि पार्टी कुछ महत्वपूर्ण राज्यों में अलग-अलग नेताओं की जगह ऐसे संगठनात्मक प्रभारियों पर निर्भर कर रही है जिनके पास व्यापक संगठनात्मक या चुनावी अनुभव है. खास तौर पर सुनील बंसल का तेलंगाना और पश्चिम बंगाल, राम माधव का तमिलनाडु और उत्तराखंड तथा सतीश पूनिया का पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों का प्रभार उल्लेखनीय है.
उत्तर प्रदेश का प्रभार विनोद तावड़े को अगस्त में ही दे दिया गया था, उनके साथ जगदीश पटेल को सह प्रभारी बनाया गया था. अब यूपी की टीम में मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को भी सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. यानी एक प्रभारी के साथ चार सह प्रभारी लगाकर बीजेपी ने आगामी चुनाव के लिए संगठन को मजबूती देने की कोशिश की है. इस लिहाज से यूपी में एक प्रभारी के साथ कई सह प्रभारियों की टीम बनाना संगठन के अलग-अलग हिस्सों में जिम्मेदारियां बांटने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है.
स्मृति ईरानी को हरियाणा-छत्तीसगढ़ का प्रभार
स्मृति ईरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों का प्रभारी बनाया गया है. दोनों राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां भी अलग हैं. ऐसे में एक नेता को दोनों राज्यों का प्रभार देना पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से संगठनात्मक जिम्मेदारी का ही विस्तार है. ईरानी पहले से राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की प्रमुख नेताओं में रही हैं और अगस्त में घोषित राष्ट्रीय टीम में भी उन्हें महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली थी.
पार्टी उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा को महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया गया है. उनके साथ अमित मालवीय, सदानंद शेट तानावड़े और कमलजीत सहरावत को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है. महाराष्ट्र जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में प्रभारी के साथ 3 सह प्रभारियों की नियुक्ति यह संकेत देती है कि पार्टी यहां संगठनात्मक काम को कई स्तरों पर बांटने की तैयारी में है.
अमित मालवीय की सह प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी
अमित मालवीय की नियुक्ति विशेष रूप से ध्यान खींचती है. वे लंबे समय तक बीजेपी के सोशल मीडिया और डिजिटल संचार से जुड़े रहे हैं. अब उन्हें महाराष्ट्र के संगठनात्मक ढांचे में सह प्रभारी की भूमिका दी गई है.
नई सूची में दक्षिण भारत के राज्यों के लिए भी पार्टी के मूल विचारधारा और संघ पृष्ठभूमि के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है. कर्नाटक में हरीश द्विवेदी, केरल में प्रो. एम. नागराजा, तमिलनाडु में राम माधव, तेलंगाना में सुनील बंसल, आंध्र प्रदेश में अरविंद भदौरिया और पुडुचेरी में के. सुरेंद्रन को जिम्मेदारी मिली है. इसमें तमिलनाडु और तेलंगाना खास तौर पर अहम हैं, क्योंकि दोनों राज्यों में राम माधव और सुनील बंसल जैसे अनुभवी संगठनात्मक नेताओं को लगाया गया है. राजधानी दिल्ली का प्रभारी संघ से आए डॉक्टर विनय सहस्रबुद्धे को बनाया गया है जबकि सह प्रभारी के रूप में उनके साथ जामवांग त्सेरिंग नामग्याल और श्रीमति दर्शनाबेन जरदोश को रखा गया है.
पूर्वोत्तर राज्यों में भी संगठनात्मक जिम्मेदारियों का व्यापक परिवर्तन हुआ है. असम में मंगल पांडे के साथ फांग्नोन कोन्याक और मनोज तिग्गा को सह प्रभारी बनाया गया है. अरुणाचल प्रदेश में देवेश कुमार, मणिपुर में राजदीप रॉय, मेघालय में कनाद पुरकायस्थ, मिजोरम में भगवत कराड, नागालैंड में अनिल एंटनी और त्रिपुरा में मृगांका देव बर्मन को जिम्मेदारी मिली है. सिक्किम का प्रभार राजू बिस्ता को दिया गया है. इससे बीजेपी ने अगस्त में राष्ट्रीय स्तर पर भी पूर्वोत्तर के लिए अलग समन्वय व्यवस्था बनाई थी, जिसमें संबित पात्रा को नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेटर और राजीव बब्बर को ज्वाइंट कोऑर्डिनेटर बनाया गया था.
संचार तंत्र में भी BJP ने किया अहम बदलाव
राज्य प्रभारियों की सूची के साथ बीजेपी ने अपने संचार तंत्र में अहम बदलाव भी किया है. बीजेपी मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी को अब कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट का कोऑर्डिनेटर बनाया गया है और उनकी जगह आशीष अग्रवाल को मीडिया डिपार्टमेंट का कन्वीनर बनाया गया है. अभी हाल में ही पार्टी द्वारा अनिल बलूनी को मीडिया कन्वीनर और आशीष उषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी तथा सिद्धार्थ यादव को मीडिया को-कन्वीनर बताया गया था. जबकि सोशल मीडिया की जिम्मेदारी दीपक म्हास्के को दी गई थी.
यह बदलाव इसलिए अहम माने जा रहे हैं क्योंकि बीजेपी के संचार तंत्र में मीडिया, आईटी और सोशल मीडिया अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े हुए हिस्से हैं. ऐसे में कम्युनिकेशन स्तर पर एक समन्वयकारी भूमिका बनाना पार्टी की संचार व्यवस्था को अधिक एकीकृत करने की दिशा में कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
इस तरह से बलूनी को व्यापक कम्युनिकेशन कोऑर्डिनेशन की भूमिका देने से एक बात साफ हो गई है कि पार्टी मीडिया, आईटी और सोशल मीडिया के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना चाहती है.
BJP के नए प्रभारियों की फुल एनालिसिस: राम माधव के बाद संघ के भदौरिया-सहस्त्रबुद्धे की भी वापसी, बलूनी और द्विवेदी का बढ़ा कद
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