आज का एक्सप्लेनर:तिहाड़ जेल से अमेरिका गया 'भाड़े का सैनिक' मैथ्यू; आतंकी साजिश के आरोप थे, फिर कैसे छूटा, क्या अब भारत लौटेगा- INA NEWS

24 सितंबर को तिहाड़ जेल से निकला मैथ्यू वैनडाइक अमेरिका की उड़ान भर चुका है। वही भाड़े का सैनिक मैथ्यू, जिसे 6 महीने पहले भारत की सबसे सख्त आतंकवाद-रोधी एजेंसी NIA ने पकड़ा था और UAPA जैसा कड़ा कानून लगाया था। आखिर कौन है मैथ्यू, UAPA लगने के बावजूद भारत से जाने क्यों जाने दिया गया और क्या वापस लौटेगा; 3 चैप्टर्स में पूरी कहानी… मैथ्यू वैनडाइक 1981 में अमेरिका के बाल्टीमोर में पैदा हुआ। वो खुद को मर्सिनरी बताता है, यानी भाड़े का सैनिक, जो पैसों के बदले किसी भी देश या संगठन के लिए लड़ सकता है। मैथ्यू की वेबसाइट के मुताबिक, वो ‘Sons of Liberty International’ (SOLI) नाम की प्राइवेट मिलिट्री का फाउंडर, जंग कवर करने वाला पत्रकार, डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर है। वह सीरिया और इराक जैसे देशों में युद्धबंदी भी रहा है। पिछले दो दशकों में उसने दुनियाभर में कई ऑपरेशन किए… तो मैथ्यू भारत में क्या कर रहा था? गिरफ्तारी के वक्त NIA ने आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, यानी UAPA की धारा 18 लगाई, जो आतंकी साजिश, कोशिश, समर्थन, उकसाने या मदद करने से जुड़ी है। UAPA के तहत जांच पूरी करके 180 दिनों में चार्जशीट दायर करनी होती है, जो मैथ्यू के मामले में 8 सितंबर 2026 को खत्म हो रही थी। NIA ने 8 सितंबर को चार्जशीट दाखिल तो कर दी, लेकिन UAPA की धाराओं के बजाय इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 लगाईं। धारा 21 वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज के बिना भारत में दाखिल होने से जुड़ी है, जबकि धारा 23 वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में रुकने या वीजा नियमों को तोड़ने से जुड़ी है। NIA का तर्क था कि जांच अब भी जारी है और UAPA के तहत अपराध की पुष्टि करने के लिए अभी और वक्त चाहिए। यहीं से कानूनी छूट का एक मौका बना… कोर्ट छूट के साथ कुछ शर्तें भी लगाईं… इसके बाद 24 सितंबर की रात मैथ्यू और बाकी 6 आरोपी तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। इस पर कई विपक्षी नेता सवाल खड़े कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 23-26 मई को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के सामने मैथ्यू का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी दबाव ने यह नतीजा तय किया, लेकिन भारत को बदले में क्या मिला? इससे भी अहम है कि इन विदेशी संदिग्धों को वीजा कैसे मिला और इन्हें भारत के रास्ते म्यांमार जाने की इजाजत कैसे मिली? AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘UAPA के तहत किसके खिलाफ चार्जशीट दायर की जानी चाहिए, यह सर्जियो गोर तय करते हैं। भारतीय नागरिक UAPA के तहत 9 से 10 साल तक जेल में सड़ सकते हैं, क्योंकि उनके पास सर्जियो गोर नहीं हैं।’ स्ट्रैटजिक अफेयर्स एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मा चेलानी मानते हैं कि भारत ने बार-बार कूटनीतिक या रणनीतिक दबाव के तहत विदेशी नागरिकों या संस्थाओं के खिलाफ हाई-प्रोफाइल आपराधिक कार्यवाहियों को कमजोर कर दिया गया, छोड़ दिया गया या बेअसर कर दिया गया। कोर्ट ने साफ कहा है कि एक महीने बाद मैथ्यू और बाकी 6 आरोपियों को भारत लौटना होगा और लौटने के 72 घंटों के भीतर कोर्ट को बताना होगा। वहीं NIA की UAPA को लेकर जांच जारी है। अगर एजेंसी को सबूत मिले और अपराधों की पुष्टि हुई, तो वह सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर सकती है। ऐसा हुआ तो मैथ्यू पर फिर से UAPA के तहत आतंकी गतिविधियों के आरोप फिर से लग सकते हैं और केस चल सकता है। हालांकि मैथ्यू की वापसी पर संशय बना हुआ है। ज्यादातर मामलों में विदेशी आरोपियों के लौटने की गारंटी लेने वाला कोई नहीं होता। पहले भी ऐसा हो चुका है कि जब विदेशी आरोपी एक बार छूटने के बाद वापस लौटे ही नहीं। 3 चर्चित मामले… ऐसे में अगर मैथ्यू तय समय पर नहीं लौटता, तो भारत के पास 2 विकल्प हैं- जमानत रद्द कर गैर-जमानती वारंट जारी करना या भारत-अमेरिका की प्रत्यर्पण संधि (1997) के तहत औपचारिक प्रत्यर्पण की मांग करना। ————— ये भी खबर पढ़िए…. मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम रख पाकिस्तान कैसे करोड़ों जुटाएगा; ये मोस्ट वॉन्टेड आतंकी आखिर छिपा कहां है जैश-ए-मोहम्मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर के सिर पर पाकिस्तान ने 70 लाख रुपए का इनाम रखा है। पाकिस्तान 2021 से दावा करता आ रहा है कि मसूद अफगानिस्तान भाग चुका है, जबकि भारतीय एजेंसियों का मानना है कि वो पाकिस्तान में ही छिपा है। पूरी खबर पढ़िए…
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