खबर शहर , यूपी: नहर की जमीन पर कब्जा! सिकंदरा रजबहा मामले में एनजीटी का 11 अधिकारियों को नोटिस; 4 जनवरी को सुनवाई – INA

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में आगरा कैनाल के सिकंदरा रजबहा और उसके पास मौजूद संरक्षित वन की जमीन बहाल करने की याचिका पर सोमवार को सुनवाई की गई। एनजीटी चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के 11 अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं, जिनमें मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव पर्यावरण, डीएम, नगर आयुक्त भी शामिल हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 4 जनवरी को होगी।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने एनजीटी में दायर की गई याचिका में कहा है कि शहरीकरण के कारण आगरा नहर के रजबहों और इससे जुड़े संरक्षित वन क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है। आगरा के वर्ष 1905 और 1965 के गजेटियर में सिकंदरा रजबहा का ब्योरा दिया गया है। यूपीएसआईडीसी के औद्योगिक क्षेत्र सिकंदरा साइट सी में गांव लखनपुर में रजबहा नष्ट कर सड़क बना दी गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि साइट-सी से भगवान टाॅकीज तक रजबहा और उसके संरक्षित वन पर अतिक्रमण हो चुका है।
सिकंदरा रजबहा भगवान टॉकीज से होता हुआ लंगड़े की चौकी की ओर से वाटरवर्क्स के पीछे यमुना नदी में नाले के रूप में गिरता है। इसे शाही कैनाल का नाम दिया गया था, जो अब भी नगर निगम के दस्तावेजों में दर्ज है। इसी तरह रोहता नहर के संरक्षित वन क्षेत्र पर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने एनजीटी में सरकारी दस्तावेज, जीपीएस लोकेशन की तस्वीरें और सेटेलाइट तस्वीरें प्रस्तुत कीं।
इन अधिकारियों को जारी किए गए नोटिस
एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव पर्यावरण, प्रमुख मुख्य वन, प्रमुख सचिव सिंचाई विभाग, प्रमुख सचिव नगर विकास, प्रमुख सचिव ग्रामीण विकास, जिलाधिकारी आगरा, नगर आयुक्त के साथ उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष और क्षेत्रीय अधिकारी एवं एडीए को नोटिस जारी किया गया है।