Technology, उम्र की पाबंदी ठीक नहीं? सोशल मीडिया बैन को चकमा दे रहे बच्चे, रोकेंगे तो असुरक्षित ऑनलाइन ठिकानों का खतरा भी? – Social Media Age Restrictions Children Bypass Ban Online Safety Risks — INA

सार
सोशल मीडिया पर उम्र की पाबंदी लगाने से क्या बच्चों की सुरक्षा होगी या खतरा बढ़ेगा? बच्चे पहले ही बैन को चकमा दे रहे हैं। ऐसे में रोक लगाने पर उनके असुरक्षित ऑनलाइन ठिकानों तक पहुंचने का डर क्यों जताया जा रहा है? पढ़िए इस रिपोर्ट में।

बच्चों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल से रोकने के लिए दुनिया के कई देश उम्र सीमा तय कर रहे हैं। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका सही समाधान नहीं है। शुरुआती अनुभव बताते हैं कि बच्चे इन पाबंदियों को चकमा देने के रास्ते खोज लेते हैं। ऐसे में एक बड़ी आशंका यह है कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध बच्चों को इंटरनेट की ऐसी जगहों पर धकेल देंगे जहां निगरानी और सुरक्षा के इंतजाम और भी कमजोर होंगे।
प्रतिबंध के समर्थकों का कहना है कि उम्र की जांच और सख्त होनी चाहिए, ताकि बच्चे इनका रास्ता न निकाल सकें। लेकिन विशेषज्ञों का तर्क है कि बच्चों का प्रतिबंधों को चकमा देना केवल नियमों की अवहेलना नहीं है। यह बताता है कि ऐसी पाबंदियों की अपनी सीमाएं हैं। एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू में प्रकाशित एक लेख में विश्लेषकों ने बताया कि किशोरावस्था में बच्चे जानकारी हासिल करते हैं, अपनी पहचान को समझते हैं और सामाजिक रिश्ते बनाते हैं। सोशल मीडिया उन्हें समान रुचियों वाले लोगों से जुड़ने, उपयोगी जानकारी पाने और डिजिटल सुरक्षा सीखने का अवसर भी देता है। पूर्ण प्रतिबंध इन जरूरतों को नजरअंदाज कर सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में पाबंदी का नहीं पड़ा असर :
ऑस्ट्रेलिया का अनुभव पाबंदियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। वहां 2024 में प्रतिबंध लागू किया गया था। इस साल प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि 16 साल से कम उम्र के पांच में से चार किशोर प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में सफल रहे। कुछ बच्चों ने पहचान सत्यापन के लिए भाई-बहन के चेहरे का इस्तेमाल किया, तो कुछ ने चेहरे पर नकली मूंछें बनाकर चकमा दिया।
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फ्रांस में अदालत ने हटा दिया प्रतिबंध
जुलाई में फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक की कोशिश की। हालांकि, 14 अगस्त को फ्रांस की शीर्ष कोर्ट ने मानवाधिकारों के आधार पर इसे रोक दिया। ब्रिटेन 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए रोक लगाने की तैयारी कर रहा है।
खतरनाक स्रोतों तक पहुंच रोकना जरूरी
ऑस्ट्रेलिया में पाबंदी के बाद शोध में पता चला कि बच्चों का स्क्रीन टाइम नहीं घटा। बल्कि वे दूसरी ऑनलाइन जगहों पर चले गए हैं, जिनके बारे में माता-पिता को जानकारी तक नहीं थी। ऐसी जगहों पर बच्चों के उत्पीड़न का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दूर करना बच्चों की सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
इन तरीकों से घट सकता है ऑनलाइन जोखिम
कंपनियां बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों से जुटाए गए डाटा का इस्तेमाल सीमित करें। इससे उनकी पसंद और व्यवहार के आधार पर सामग्री दिखाने की कोशिशों पर लगाम लग सकती है।
माता-पिता और बच्चों को ऐसे आसान व लचीले टूल मिलें, जिनसे वे अपनी जरूरत के मुताबिक सामग्री और पहुंच नियंत्रित कर सकें।
कीवर्ड आधारित फिल्टर से बच्चे किसी खास अपमानजनक शब्द, उपनाम या टिप्पणी को ब्लॉक कर सकते हैं। इससे उन्हें अपनी समस्या के हिसाब से सुरक्षा तय करने का अधिकार मिलता है।