Technology, LinkedIn पर AI का कब्जा: स्टडी में दावा- हर 10 में से 4 लंबे पोस्ट इंसानों ने नहीं, AI ने लिखे — INA

जब आप अपना लिंक्डइन (LinkedIn) फीड स्क्रॉल करते हैं, तो अक्सर आपको शानदार करियर टिप्स, संघर्ष की प्रेरक कहानियां या लीडरशिप के गहरे ज्ञान वाली लंबी-चौड़ी पोस्ट्स पढ़ने को मिलती हैं। हम में से कई लोग इन्हें पढ़कर लाइक करते हैं या इनसे कुछ सीखते हैं। लेकिन एक कड़वा सच यह है कि इनमें से ज्यादातर पोस्ट किसी इंसान के दिमाग की नहीं, बल्कि मशीन की उपज हो सकती हैं।

हाल ही में AI डिटेक्शन स्टार्टअप ‘पैंग्राम’ (Pangram) ने एक स्टडी प्रकाशित की है, जिसके नतीजे हैरान करने वाले हैं। इस स्टडी के अनुसार, सोशल मीडिया की दुनिया में लिंक्डइन इस वक्त AI द्वारा लिखे गए कंटेंट का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। रिपोर्ट बताती है कि लिंक्डइन पर लगभग 40 प्रतिशत लंबी पोस्ट्स पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (AI) द्वारा जनरेट की गई हैं।

लिंक्डइन बना AI कंटेंट का गढ़


  • पैंग्राम की स्टडी ने लिंक्डइन, एक्स (X), रेडिट (Reddit), सबस्टैक (Substack) और मीडियम (Medium) जैसे प्रमुख सोशल प्लेटफॉर्म्स की 10 लाख से ज्यादा पोस्ट्स का विश्लेषण किया। चौंकाने वाली बात यह रही कि AI द्वारा जनरेटेड मानी गई कुल पोस्ट्स में से लगभग दो-तिहाई हिस्सा अकेले माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के स्वामित्व वाले लिंक्डइन का था।

  • स्टडी का दावा है कि लिंक्डइन के खुद के टूल्स, जैसे कि ‘इनहैंस पोस्ट’ फीचर ने, प्लेटफॉर्म पर AI-कंटेंट को एक सामान्य बात बना दिया है। आज हर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर AI कंटेंट की भरमार यह साबित करती है कि ‘सिंथेटिक टेक्स्ट’ अब ऑनलाइन संवाद का एक मुख्य हिस्सा बन चुका है।

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रेडिट और अन्य प्लेटफॉर्म्स का क्या हाल है?


  • स्टडी में पाया गया कि सबसे ज्यादा स्कैन (36.7%) किए जाने के बावजूद, रेडिट (Reddit) पर AI कंटेंट की हिस्सेदारी सबसे कम, मात्र 4.4% थी। रेडिट पर लोग जो जवाब देते हैं, वे 98.1% इंसानों द्वारा ही लिखे गए थे। हालांकि, रेडिट पर ‘टॉप-लेवल पोस्ट्स’ में 11.6% और एक्स (X/Twitter) पर 10% पोस्ट्स AI द्वारा लिखी गई पाई गईं।

  • रिपोर्ट के मुताबिक, रेडिट की सख्त स्पैम पॉलिसी के कारण वहां मशीन जनरेटेड रिप्लाई कम होते हैं, लेकिन बड़ी पोस्ट्स आसानी से मॉडरेशन को चकमा दे जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि लंबी पोस्ट्स (250 शब्दों से ज्यादा) के AI द्वारा लिखे जाने की संभावना सबसे ज्यादा (25.72%) होती है। इसका एकमात्र अपवाद सबस्टैक (Substack) है, जहां लंबी पोस्ट्स अक्सर इंसानों द्वारा ही लिखी जाती हैं।

डिटेक्शन टूल्स पर उठते सवाल

जैसे-जैसे AI कंटेंट इंसानी लेखन के करीब पहुंच रहा है, उसे पकड़ना मुश्किल होता जा रहा है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इन AI डिटेक्शन स्कोर्स को केवल एक संकेत माना जाना चाहिए, अंतिम सत्य नहीं। आलोचकों का भी कहना है कि पैंग्राम के दावों को पूरी तरह सच नहीं माना जा सकता, क्योंकि ऐसे टूल्स अक्सर उन लोगों के लेखन को भी AI बता देते हैं, जिनकी मातृभाषा अंग्रेजी नहीं है।

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. का रास्ता क्या है?



  • पैंग्राम के सीईओ और सह-संस्थापक मैक्स स्पेरो (Max Spero) ने अपने ब्लॉग में चिंता जताते हुए कहा, “सोशल मीडिया पर AI राइटिंग अब हर जगह एक समस्या बन गई है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इंटरनेट पर पब्लिश होने वाली 35% नई वेबसाइट्स भी AI की मदद से बन रही हैं।”




  • उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की स्टडीज से AI कंटेंट को लेकर पारदर्शिता आएगी और इंटरनेट यूजर्स को यह तय करने का नियंत्रण वापस मिलेगा कि वे अपना समय और ध्यान किस कंटेंट पर खर्च करना चाहते हैं।



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