सीजी- CG: कांग्रेस बोली- 15 अगस्त से पहले जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों को रिहा करें सरकार, वापस लें झूठे मुकदमे – INA

CG Politics: कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा है। तिरंगा यात्रा को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों के साथ 15 अगस्त को तिरंगा यात्रा निकालकर आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ हजारों निर्दोष आदिवासी आज भी जेल की सलाखों के पीछे अपनी आजादी के लिए तरस रहे हैं। आखिर भाजपा सरकार का यह दोहरा मापदंड क्यों?

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ठाकुर ने कहा कि सरकार दावा करती है कि नक्सलवाद खत्म हो गया है। नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की योजनाएं बनाई जा रही हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास सहित सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। फिर सवाल यह है कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी निर्दोष आदिवासी जेलों में क्यों बंद हैं?

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि जिन आदिवासियों को नक्सली बताकर या नक्सलियों का सहयोगी बताकर जेल में डाल दिया गया, उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कब होगी? जिन बेगुनाह आदिवासियों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उनमें से अनेक भय के कारण अपने घर-गांव छोड़कर दूसरे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। सरकार यदि सच में नक्सलवाद खत्म होने का दावा करती है तो आदिवासियों को न्याय देने से पीछे क्यों हट रही है?

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जवाब दे जब दुर्दांत नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद उनका पुनर्वास हो सकता है, तो निर्दोष आदिवासियों की रिहाई क्यों नहीं? नक्सलवाद खत्म हो गया तो निर्दोष आदिवासियों पर दर्ज मुकदमे अब तक खत्म क्यों नहीं किए गए? 15 अगस्त को नक्सलियों के साथ तिरंगा यात्रा हो सकती है, तो जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों के हाथों में तिरंगा कब आएगा? आजादी के अमृत पर्व की बात करने वाली सरकार हजारों आदिवासियों की आजादी क्यों छीन कर बैठी है?

उन्होंने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि 15 अगस्त के पहले जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों के मामलों की समीक्षा की जाए। बेगुनाहों के खिलाफ दर्ज झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं और उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। तिरंगा यात्रा निकालने  वाली भाजपा सरकार निर्दोष आदिवासियों की आजादी का हिसाब दे। नक्सलियों का पुनर्वास मंजूर है, तो निर्दोष आदिवासियों को न्याय क्यों नहीं?


Credit By Amar Ujala

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