सीजी- छत्तीसगढ़ मौसम: आठ जिलों में यलो अलर्ट जारी, बारिश की संभावना, जानें कैसा रहेगा रायपुर समेत इन स्थानों का हाल – INA

छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई का दौर जारी है। ऐसे में प्रदेश में शुष्क मौसम बना हुआ है। तेज धूप होने से लगातार गर्मी बढ़ रही है। उसम भरी गर्मी से लोग परेशान हैं। रायपुर से मानसून की विदाई हो चुकी है। अगले कुछ दिनों में पूरे छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई हो जायेगी।
प्रदेश के आठ जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में रायगढ़, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सुरगुजा, सूरजपुर, कोरया, बलरामपुर शामिल हैं। यहां पर बादल के गरजने, आकाशीय बिजली गिरने
की संभावना है। वहीं 30-40 प्रति घंटे की रफ्तार से हवायें चल सकती हैं।
रायपुर में बारिश थमने के बाद पारा बढ़ा हुआ है। दिन के साथ ही रात में भी राहत नहीं मिल रही है। गर्मी जैसे हालात से लोग बेहाल हैं। मंगलवार को मौसम विभाग ने आकाश साफ रहने की संभावना जताई है। अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रह सकता है।
पिछले 24 घंटों से मौसम शुष्क
प्रदेश में पिछले 24 घंटों में मौसम शुष्क बना हुआ है। किसी भी स्थान पर वर्षा दर्ज नहीं की गई है। राजधानी में 34.4 डिग्री सेल्सियस तो राजनांदगांव में सबसे अधिक 35 डिग्री सेल्सियस रहा। अधिकतर जिलों में तापमान 33 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। प्रदेश में तापमान की बात करें तो पेंड्रारोड में 33. 8 डिग्री, बिलासपुर में 33.6 डिग्री, दुर्ग में 33. 5 डिग्री, जगदलपुर में 33.3 डिग्री और अंबिकापुर में 32 डिग्री सेल्सियस रहा।
आठ जिलों में यलो अलर्ट
रायगढ़, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सुरगुजा, सूरजपुर, कोरया, बलरामपुर
द्रोणिका केंद्रित
छत्तीसगढ़, विदर्भ और मराठवाड़ा होते हुए एक द्रोणिका बनी हुई है, जिसके प्रभाव से कुछ एक क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो-तीन दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना है। दो दिन के बाद हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी की रेखा सुपौल, रांची, रायपुर, ब्रह्मपुरी, परभणी, बारामती, हरनाई से होकर गुजर रही है। पश्चिम बंगाल से मध्य महाराष्ट्र तक – झारखंड, ओडिशा के अंदरूनी इलाकों, छत्तीसगढ़, विदर्भ और मराठवाड़ा से होते हुए एक द्रोणिका बना हुआ है। इसके अतिरिक्त उत्तर-मध्य बिहार से उत्तरी ओडिशा तक झारखंड और गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल से होते हुए एक द्रोणिका बना हुआ है।