Delhi-Ncr एक्साइज पॉलिसी केस: जज बदलने की अपील… हाईकोर्ट से इनकार के बाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे केजरीवाल- #INA

दिल्ली शराब नीति से जुड़े मामले में हाईकोर्ट से इनकार के बाद अब अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जज बदलने की मांग की है. केजरीवाल ने याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से केस ट्रांसफर करने की अपील की है. केजरीवाल के साथ-साथ सिसोदिया ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने इस मांग को खारिज कर दिया था, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है.
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा है कि CBI की याचिका मौजूदा रोस्टर के हिसाब से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को दी गई है. उन्होंने कहा कि केस से अलग होने की किसी भी रिक्वेस्ट पर संबंधित जज को ही विचार करना होगा. कोर्ट ने कहा कि हालांकि, मुझे एडमिनिस्ट्रेटिव साइड से ऑर्डर पास करके पिटीशन को ट्रांसफर करने का कोई कारण नहीं दिखता.
केजरीवाल ने ट्रांसफर करने की मांग की थी
दरअसल अरविंद केजरीवाल ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में उन्हें बरी किए जाने को चुनौती देने वाली CBI की क्रिमिनल पिटीशन को ट्रांसफर करने की मांग की थी. केजरीवाल इस मामले में रेस्पोंडेंट में से एक हैं. CBI की याचिका पर 9 मार्च को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में सुनवाई हुई थी.
बरी किए गए सभी 23 लोगों को नोटिस
उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ CBI की दलीलें सुनने के बाद आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत शराब नीति मामले में बरी किए गए सभी 23 लोगों को नोटिस जारी किया था. इसके साथ ही मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च तय की थी. सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि शराब नीति मामले में AAP नेताओं केजरीवाल, सिसोदिया और दूसरे सभी आरोपियों को बरी करते समय गवाहों और अप्रूवर के बयानों के बारे में ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां, चार्ज स्टेज पर, पहली नज़र में गलत हैं और उन पर विचार करने की ज़रूरत है.
वहीं अरविंद केजरीवाल ने अपनी अर्जी में कहा था कि 9 मार्च के ऑर्डर में ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों में खास गड़बड़ी के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है. संबंधित बेंच ने एक्साइज पॉलिसी केस से जुड़े कई मामलों पर पहले ही फैसला कर लिया है, जिसमें पहली नजर में टिप्पणियां दर्ज की गई हैं और आरोपियों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है.
केजरीवाल ने अर्जी में क्या कहा
अर्जी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को राहत दी है. उन्होंने कहा कि उनकी दलील किसी निजी पसंद पर आधारित नहीं है, बल्कि सिर्फ एक निष्पक्ष और जानकार लिटिगेंट के मन में एक वाजिब आशंका को परखने के लिए है. इसलिए गंभीर, सच्ची और वाजिब आशंका के आधार पर ट्रांसफर की मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और न्यूट्रैलिटी वाली सुनवाई नहीं हो सकती है.
राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला
27 फरवरी को फैसला सुनाते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट ने पाया था कि अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आरोप सह-आरोपी या गवाहों के बयानों पर आधारित थे, लेकिन उन्हें किसी भी आपराधिक साजिश से जोड़ने वाला कोई स्वतंत्र सबूत नहीं था. इसके अलावा, ट्रायल कोर्ट ने यह भी देखा कि CBI ने लंबे समय तक सरकारी गवाह के बयानों को बार-बार दोबारा रिकॉर्ड किया, जाहिर तौर पर कमियों को भरने, सरकारी वकील की कहानी को बेहतर बनाने, और आरोपियों को फंसाने, या हालात की चेन में गायब कड़ियों को बनावटी ढंग से जोड़ने के लिए.
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कही ये बात
9 मार्च को CBI की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा था कि आरोप लगाने के स्टेज पर ही, गवाहों और अप्रूवर के बयानों के बारे में ट्रायल कोर्ट की कही गई कुछ बातें पहली नज़र में गलत लगती हैं और उन पर विचार करने की ज़रूरत है.
कोर्ट ने यह भी कहा था कि CBI इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के खिलाफ की गई तीखी टिप्पणी कि उन्होंने गलत जांच करने के लिए अपने ऑफिशियल पद का गलत इस्तेमाल किया, पहली नज़र में पूरी तरह से गलत है, खासकर जब यह आरोप लगाने के स्टेज पर की गई हो. इन बातों को देखते हुए, कोर्ट ने इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी, जिसमें उनके खिलाफ डिपार्टमेंटल एक्शन की सिफारिश करने का निर्देश भी शामिल था.
इस बीच कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से, जहां मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई पेंडिंग है, कहा की कि वह केस को हाई कोर्ट के सामने तय तारीख के बाद की तारीख तक टाल दे और CBI की अर्जी के नतीजे का इंतजार करे.
इन लोगों को किया गया था बरी
दरअसल दिल्ली की आबकारी नीति में कथित घोटाले से जुड़े CBI मामले में स्पेशल जज जीतेन्द्र सिंह ने 27 फरवरी को सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया, जिनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के कविता के साथ आरोपी नंबर 1 कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण पिल्लई, मूथा गौतम, समीर महेंद्रू, अमनदीप सिंह ढल्ल, अर्जुन पांडे, बुच्ची बाबू गोरंटला, राजेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, अरविंद कुमार सिंह, चनप्रीत सिंह, दुर्गेश पाठक, अमित अरोड़ा, विनोद चौहान, आशीष चंद माथुर और सरथ रेड्डी शामिल हैं.
ट्रायल कोर्ट ने कड़े शब्दों में जांच में कमियों के लिए CBI को फटकार लगाई थी और कहा था कि चार्जशीट में कई कमियां हैं जिनका किसी गवाह या बयान से कोई सबूत नहीं है. CBI मनीष सिसोदिया के खिलाफ पहली नज़र में कोई केस बनाने में नाकाम रही. स्पेशल CBI जज ने कहा था कि केजरीवाल को बिना किसी ठोस सबूत के फंसाया गया.आबकारी नीति में कथित घोटाले मामले में मनीष सिसोदिया तकरीबन 530 दिनों तक जेल में रहे. वहीं अरविंद केजरीवाल ने दो बार में तकरीबन 156 दिन जेल में बिताए.
क्या है मामला?
दिल्ली सरकार ने 2021 में रेवेन्यू बढ़ाने और शराब के व्यापार में सुधार के लिए एक्साइज़ पॉलिसी बनाई थी, जिसे बाद में लागू करने में गड़बड़ियों के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया था. लेफ्टिनेंट-गवर्नर विनय कुमार सक्सेना ने पॉलिसी की जांच CBI से कराने के आदेश दिए थे.
जांच के दौरान ED और CBI ने दावा किया कि इस एक्साइज पॉलिसी का इस्तेमाल जो दिल्ली में शराब के व्यापार को पूरी तरह से प्राइवेट करने की कोशिश कर रही थी सरकारी खजाने की कीमत पर प्राइवेट कंपनियों को गलत फायदा पहुंचाने के लिए किया गया और इसमें भ्रष्टाचार की बू आ रही है.
मनीष सिसोदिया को सबसे पहले CBI ने एक्साइज पॉलिसी से जुड़े एक मामले में 26 फरवरी, 2023 को और बाद में ED ने 9 मार्च, 2023 को गिरफ्तार किया था. CBI द्वारा दर्ज की गई FIR में, मनीष सिसोदिया और अन्य पर 2021-22 की एक्साइज पॉलिसी के बारे में सिफारिश करने और फैसले लेन में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है, ‘बिना किसी सक्षम अथॉरिटी की मंजूरी के, जिसका मकसद टेंडर के बाद लाइसेंसी को गलत फायदा पहुंचाना था’. एजेंसी ने यह भी दावा किया कि AAP नेता को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि उन्होंने सबूतों के सामने आने के बावजूद गोलमोल जवाब दिए और जांच में सहयोग करने से इनकार कर दिया.
एक्साइज पॉलिसी केस: जज बदलने की अपील… हाईकोर्ट से इनकार के बाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे केजरीवाल
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,



