गाजियाबाद साइबर पुलिस की शानदार सफलता: स्विगी पर फर्जी रेस्टोरेंट बनाकर 30 लाख की ठगी करने वाले मास्टरमाइंड का पर्दाफाश

गाजियाबाद: डिजिटल युग में साइबर अपराधों पर लगाम कसने और नागरिकों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने की दिशा में गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ‘स्विगी’ (Swiggy) पर फर्जी रेस्टोरेंट बनाकर करीब ₹30 लाख की धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर साइबर अपराधी को गाजियाबाद साइबर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के बिछाए जाल में फंसा शातिर दिमाग
वसुंधरा इन्फ्राप्लाजा स्थित ऑपरेशन टीम के मैनेजर श्री विश्वजीत चौधरी द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद, गाजियाबाद पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई। तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल फुटप्रिंट्स का बारीकी से विश्लेषण करते हुए पुलिस ने 18 सितंबर 2026 को थाना कौशाम्बी क्षेत्र से इस मास्टरमाइंड को धर दबोचा।
गिरफ्तार किए गए अभियुक्त का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:
- नाम: गर्वित (उम्र लगभग 21 वर्ष)
- पिता का नाम: संजीव कुमार
- मूल निवासी: मकान नं0 1917, वार्ड नं0 13, मोहल्ला पहाड़ा, थाना पुरानी सब्जी मंडी, रोहतक, हरियाणा।
- वर्तमान पता: प्लॉट नं0 20, तृतीय तल, ए ब्लॉक, सेक्टर-03, वैशाली, गाजियाबाद।
- शिक्षा: बी.कॉम (B.Com) पास।
- पृष्ठभूमि: अभियुक्त पूर्व में एक नामी आईटी कंपनी (टेक महिंद्रा) में कस्टमर केयर में नौकरी कर चुका है।
ठगी का हाई-टेक तरीका और पुलिस की पैनी नजर
पूछताछ में पता चला कि इस उच्च शिक्षित युवा ने यूट्यूब से ठगी के तरीके सीखे। उसने स्विगी पर “श्याम की रसोई”, “राधा की रसोई” और फिर “खाना खजाना” नाम से फर्जी रेस्टोरेंट रजिस्टर किए और FSSAI से सर्टिफिकेट भी लिया। इसके बाद वह ‘FAST OTP BOT’ नामक टेलीग्राम चैनल के जरिए एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड धारकों का डेटा चुराता था। आरोपी ‘JIOJOIN’ ऐप से वीडियो कॉल कर खुद को बैंक का अधिकारी बताता था और सर्विस चार्ज हटाने के नाम पर ग्राहकों से OTP हासिल कर लेता था। इस OTP का इस्तेमाल वह अपने ही फर्जी रेस्टोरेंट में झूठे ऑर्डर का भुगतान करने और बिना डिलीवरी किए स्विगी से वह पैसा अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए करता था।
बरामदगी और नेटवर्क पर प्रहार
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के पास से अपराध में इस्तेमाल किए गए 4 मोबाइल फोन, 1 टैबलेट और 1 लैपटॉप बरामद किया है। पुलिस अब टेलीग्राम चैनल के चैट, गूगल शीट और क्यूआर कोड्स की भी बारीकी से जांच कर रही है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके। 17 सितंबर 2026 को एम. श्रीनिवास नामक व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड से की गई ₹38,000 की ठगी का खुलासा भी इसी जांच का परिणाम है।
पर्दाफाश करने वाली जांबाज पुलिस टीम
इस पूरे हाई-टेक फर्जीवाड़े की गुत्थी सुलझाने, तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ने और अपराधी को कानून के शिकंजे में लाने का पूरा श्रेय “थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम, कमिश्नरेट गाजियाबाद” को जाता है। डिजिटल दुनिया के इस अदृश्य अपराधी को असल दुनिया में सलाखों के पीछे पहुंचाने में इस टीम ने बेहतरीन तकनीकी दक्षता, वैज्ञानिक अनुसंधान और पेशेवर कौशल का शानदार परिचय दिया है।
‘सेवा, सुरक्षा, समर्पण’ की जीती-जागती मिसाल
गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट का यह सफल ऑपरेशन यह साबित करता है कि साइबर अपराधी चाहे कितनी भी नई तकनीक का इस्तेमाल कर लें, वे कानून से बच नहीं सकते। इस त्वरित कार्रवाई से न केवल एक बड़े फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, बल्कि गाजियाबाद पुलिस ने अपने ध्येय वाक्य ‘सेवा, सुरक्षा, समर्पण’ को भी पूरी तरह चरितार्थ किया है।