खबर शहर , वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग माता-पिता: दिवाली से पहले लेने पहुंच गए बेटे-बहू, तो छलक पड़े आंसू – INA

पांच दिवसीय दिवाली पर्व के पहले दिन धन त्रियोदशी पर जहां हर घर में दीये जल रहे थे वहीं शहर के दो परिवारों में वर्षों बाद रिश्तों का उजाला फैला। सिकंदरा स्थित रामलाल वृद्धाश्रम में रह रहे दो बुजुर्ग माता-पिता अपने परिजन के बीच वापस पहुंचे और यह दिवाली उनके जीवन की सबसे यादगार बन गई।
जब परिजन बुजुर्गों को साथ ले जाने आश्रम पहुंचे तो वक्त का पहिया मानो थम सा गया। अपनों का साथ मिलते ही बुजुर्गों के चेहरों पर छाए एकाकीपन के बादल छंट गए। हाथों ने हाथ थामा तो वर्षों की दूरियां क्षण भर में समाप्त हो गईं। परिजन के मुंह से प्यार के दो बोल सुनकर सारे गिले-शिकवे आंसुओं के दरिया में बह गए। आश्रम के संचालक शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि संस्था का लक्ष्य सिर्फ आश्रय देना ही लक्ष्य नहीं है बल्कि कोशिश यही रहती है कि बुढ़ापे की इस दहलीज पर कोई भी अपनों के प्यार और दुलार से वंचित न रहे।
केस 1-
83 वर्षीय रामसेवक पिछले तीन साल से रामलाल वृद्धाश्रम में रह रहे थे। आश्रम प्रबंधन ने परिजन से बातचीत का सिलसिला शुरू किया। संवादहीनता दूर होने पर उन्हें अपी भूल का अहसास हुआ और वो बुजुर्ग को वापस घर ले जाने के लिए सहमत हो गए।
केस 2-
रावतपाड़ा निवासी 75 वर्षीया विमला देवी भी पिछले दो साल से अपने परिजनों से दूर थीं। आश्रम की टीम ने दोनों पक्षों को उनके गिले-शिकवे दूर कराए। समझौते के बाद परिजन विमला देवी को आदर-सत्कार के साथ अपने साथ घर ले गए।