खबर शहर , शोध में खुलासा: 35 की उम्र में माहवारी बंद, मधुमेह-मोटापा और हड्डियां हुईं कमजोर; महिला इन बातों का रखें ध्यान – INA

काम इतना, व्यायाम कब करूं। बच्चे (पाैष्टिक आहार) खा लेंगे, मेरा मन नहीं। ये कहकर अक्सर महिलाएं अपनी सेहत की अनदेखी करती हैं। इसी के चलते 35-40 की उम्र में मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) की संख्या बढ़ रही है। इससे वो मेटाबॉलिक सिंड्रोम की चपेट में तेजी से आ रही हैं। एशिया की 35-65 साल की 638 महिलाओं पर मेनोपॉज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बीच ऑनलाइन अध्ययन हुआ।


शोध में आगरा समेत भारत की करीब 500 महिलाएं शामिल रहीं। इसमें 21 फीसदी चिकित्सक-नर्सिंग स्टाफ और बाकी कामकाजी-घरेलू महिलाएं रहीं। इसमें 61 फीसदी (392) महिलाओं में मेटाबॉलिक सिंड्रोम से प्रभावित मिलीं। 40 से कम उम्र की 47.8 फीसदी रहीं। मेटाबॉलिक सिंड्रोम मेनोपॉज के 3-10 साल में बीमारियां पनपने लगीं। 68.9 फीसदी में पांच साल में ही प्रभाव दिखने लगा। इनका वजन बढ़ने के साथ कमर का आकार भी 96 सेमी से अधिक मिला। एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह का कहना है कि अधिकांश महिलाओं में 45-55 की उम्र में मेनोपॉज हो रहा है। तीन या इससे अधिक बीमारी होने पर मेटाबॉलिक सिंड्रोम बोलते हैं। इसमें पेट की चर्बी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह समेत अन्य परेशानी हैं।

 


Credit By Amar Ujala

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